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हेरिटेज मेनहोल के ढक्कनों को म्यूजियम में रखेगा प्रशासन
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चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल में ली कार्बूजिए की ओर से डिजाइन किए गए मेनहोल के ढक्कनों को अब चंडीगढ़ प्रशासन संरक्षित करेगा। लगातार हो रही चोरी की वारदात के बाद चंडीगढ़ प्रशासन इन हेरिटेज ढक्कनों को निकाल कर ली कार्बूजिए सेंटर और सेक्टर-10 स्थित म्यूजियम आर्ट गैलरी में रखेगा। इन हेरिटेज ढक्कनों को चंडीगढ़ से चोरी कर विदेशों में लाखों में बेचा जाता है। ली कार्बूजिए के चाहने वाले इन ढक्कनों को मुंह मांगी कीमत पर खरीदते हैं।
एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा कि हेरिटेज श्रेणी में आने वाले ढक्कनों को, जिनपर शहर का पूरा नक्शा बना है उन्हें शहर भर से एकत्रित किया जा रहा है। इन्हेें प्रशासन ली काबूर्जिए सेंटर या अन्य म्यूजियम में रखा जाएगा ताकि पर्यटकों को इनके बारे में बताया जा सके। परिदा ने बताया कि शहर के कई विभाग ऐसे हैं, जहां हेरिटेज कुर्सियां, टेबल और ली काबूर्जिए के समय का अन्य फर्नीचर पड़ा है। ऐसे विभागों को हेरिटेज फर्नीचर को संरक्षित करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि प्रशासन हेरिटेज चेयर व अन्य फर्नीचर को अपने म्यूजियम में जगह देगा ताकि पर्यटकों को इसकी अहमियत समझ आए। परिदा ने बताया कि बुड़ैल जेल में कैदियों की ओर से हेरिटेज फर्नीचर की रेप्लिका तैयार की गई है। गौरतलब है कि प्रशासन जल्द ही सेक्टर-18 में गवर्नमेंट प्रेस बिल्डिंग में हेरिटेज आइटम्स के लिए एक म्यूजियम बनाने जा रहा है।
इसलिए विदेश में लाखों में बिकते हैं ये ढक्कन
मेनहोल के ढक्कनों पर चंडीगढ़ का पूरा नक्शा बना हुआ है। ढक्कन के ऊपरी हिस्से में बीच से दाईं तरफ जाती दो लाइनें असल में सुखना झील को सींचने वाली बरसाती नदी है और इन लाइनों के खत्म होने पर बना त्रिकोण सुखना झील है। नीचे चौकोर खाने शहर के सेक्टर हैं और उसी पैटर्न पर बने हैं, जिस पर शहर के सेक्टर बसे हुए हैं। इन ढक्कनों का डिजाइन साल 1951 में ली कार्बूजिए ने बनाया था। इन ढक्कनों को इस तरह डिजाइन किया गया था कि शहर के सारे मेनहोलों के ढक्कन एक ही दिशा यानी सीधे ही फिट हो सकते थे। शहर की पहचान इन ढक्कनों की कीमत के बारे में चंडीगढ़ के अफसरों को तब पता चला, जब विदेश में इसकी नीलामी की खबर आई।
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एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा कि हेरिटेज श्रेणी में आने वाले ढक्कनों को, जिनपर शहर का पूरा नक्शा बना है उन्हें शहर भर से एकत्रित किया जा रहा है। इन्हेें प्रशासन ली काबूर्जिए सेंटर या अन्य म्यूजियम में रखा जाएगा ताकि पर्यटकों को इनके बारे में बताया जा सके। परिदा ने बताया कि शहर के कई विभाग ऐसे हैं, जहां हेरिटेज कुर्सियां, टेबल और ली काबूर्जिए के समय का अन्य फर्नीचर पड़ा है। ऐसे विभागों को हेरिटेज फर्नीचर को संरक्षित करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि प्रशासन हेरिटेज चेयर व अन्य फर्नीचर को अपने म्यूजियम में जगह देगा ताकि पर्यटकों को इसकी अहमियत समझ आए। परिदा ने बताया कि बुड़ैल जेल में कैदियों की ओर से हेरिटेज फर्नीचर की रेप्लिका तैयार की गई है। गौरतलब है कि प्रशासन जल्द ही सेक्टर-18 में गवर्नमेंट प्रेस बिल्डिंग में हेरिटेज आइटम्स के लिए एक म्यूजियम बनाने जा रहा है।
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इसलिए विदेश में लाखों में बिकते हैं ये ढक्कन
मेनहोल के ढक्कनों पर चंडीगढ़ का पूरा नक्शा बना हुआ है। ढक्कन के ऊपरी हिस्से में बीच से दाईं तरफ जाती दो लाइनें असल में सुखना झील को सींचने वाली बरसाती नदी है और इन लाइनों के खत्म होने पर बना त्रिकोण सुखना झील है। नीचे चौकोर खाने शहर के सेक्टर हैं और उसी पैटर्न पर बने हैं, जिस पर शहर के सेक्टर बसे हुए हैं। इन ढक्कनों का डिजाइन साल 1951 में ली कार्बूजिए ने बनाया था। इन ढक्कनों को इस तरह डिजाइन किया गया था कि शहर के सारे मेनहोलों के ढक्कन एक ही दिशा यानी सीधे ही फिट हो सकते थे। शहर की पहचान इन ढक्कनों की कीमत के बारे में चंडीगढ़ के अफसरों को तब पता चला, जब विदेश में इसकी नीलामी की खबर आई।
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