नंगल के आदित्य भारद्वाज की सकुशल वापसी: कहा- यूक्रेन में अगर हाथ में तिरंगा है तो किसी का डर नहीं, पीएम मोदी का जताया आभार
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रही एक और छात्रा भारत सरकार के प्रयासों से मलोट स्थित अपने घर पहुंची। उनके पारिवारिक सदस्यों और रिश्तेदारों ने छात्रा का स्वागत किया।
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भारत सरकार के प्रयासों से यूक्रेन में फंसे भारतीयों को वतन लाने की मुहिम जारी है। नंगल की पीएसीएल कॉलोनी से एमबीबीएस की शिक्षा लेने यूक्रेन गए शाम सुंदर का बेटा आदित्य भारद्वाज भी सकुशल अपने घर पहुंचा। आदित्य पांच वर्ष पहले एमबीबीएस की शिक्षा ग्रहण करने यूक्रेन गया था। आदित्य ने केंद्र सरकार खासकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत मीडिया का भी आभार व्यक्त किया।
आदित्य ने कहा कि आज दुनिया में देश के प्रधानमंत्री का डंका बोल रहा है और भीषण युद्ध के बीच भी अगर आपके हाथ में देश का तिरंगा है तो आप को किसी भी बात का डर नहीं। अब तो यूक्रेन में भारतीय तिरंगे को अपनी जान बचाने के लिए पाकिस्तानी भी इस्तेमाल कर रहे हैं जो आज से पहले तिरंगे से नफरत करते थे।
आदित्य ने कहा कि उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को नजदीक से देखा है और शैलिंग व बम फटने की आवाज से कलेजा कांप उठता था और भागकर बंकरों में जाना पड़ता था। आदित्य ने कहा कि जिस कर्नाटक के छात्र की गोली लगने से मौत हुई वह उन्हीं की यूनिवर्सिटी का था और ग्रोसरी स्टोर से सामान खरीदने गया था। उस समय उन्हें बहुत डर लगा।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी उनसे मुलाकात कर उन्हें हौसला बंधाया था। आदित्य की माता इंदू व पिता शाम सुंदर ने बेटे के सकुशल घर आने पर भगवान का शुक्रिया अदा करने के बाद देश के प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनके घर में दीवाली जैसा माहौल है। यहां रिश्तेदारों व कॉलोनी निवासियों ने फूल मालाएं पहनाकर और फूलों की वर्षा कर आदित्य का स्वागत किया और भगवान का आभार व्यक्त किया कि आज आदित्य सकुशल उनके बीच है। परिजनों ने बधाई देने वालों का मुंह मीठा करवाया।
मुश्किलों का सामना कर मलोट पहुंचीं एकमदीप कौर
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रही एक और छात्रा भारत सरकार के प्रयासों से मलोट स्थित अपने घर पहुंची। उनके पारिवारिक सदस्यों और रिश्तेदारों ने छात्रा का स्वागत किया। एमबीबीएस के अंतिम वर्ष की छात्रा एकमदीप कौर पुत्री हरप्रीत सिंह निवासी पुडा कालोनी मलोट ने बताया कि वह कोविड से करीब पौने तीन साल पहले वहां गई थी और खारकीव में रह रही थी।
अब जंग के हालातों के बीच अफरा-तफरी के माहौल के बाद वह 01 मार्च को अपनी तीन सहपाठी छात्राओं समेत खारकीव स्थित घर से पैदल चल पड़ी थीं। इस दौरान किसी से लिफ्ट लेकर वे मेट्रो स्टेशन तक पहुंचीं। माइनस डिग्री की ठंड और भारी परेशानियां झेलते हुए वे लोग पोलैंड की सरहद पर पहुंचे, जहां भारतीय एबेंसी ने उनको बस से एक होटल में पहुंचाया। वहां से फ्लाइट मिलने पर वह भारत पहुंचीं और देर रात अपने घर आईं। एकमदीप मलोट की तीसरी छात्रा हैं जो यूक्रेन से सकुशल अपने घर लौटी हैं। उधर, यूक्रेन-रूस की जंग में फंसे अमलोह व मंडी गोबिंदगढ़ के मेडिकल छात्रों की वतन वापसी होने वाली है।