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एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस: मरीज की सर्जरी होनी या नहीं, जानने को PGI के डॉक्टरों ने ढूंढा नया तरीका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 12 Oct 2018 01:09 PM IST
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Surgery
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एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस एक गंभीर मर्ज है, जिसमें जितनी जल्दी हो सके मरीज को इलाज मिल जाए। इसमें आधे मरीज को सर्जरी की आवश्यकता होती है और आधे को नहीं। अब इसका पता कैसे लगाया जाए? जो अनुभवी डॉक्टर हैं वे चिकित्सकीय अनुभव से काफी हद तक पता लगा लेते हैं। इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है। मगर पीजीआई के जनरल सर्जरी के डॉक्टरों ने अब इसका एक तरीका ढूढ़ने में कामयाबी हासिल की है।
डॉक्टरों ने अपनी एक स्टडी में पाया है कि रक्त के अंदर दो मार्कर हैं। यदि शरीर के अंदर ड्रेन डालने से मार्कर नीचे आते हैं तो उस मरीज की सर्जरी की जरूरत नहीं है। इसके विपरीत जब मार्कर ऊपर जाते हैं तो सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है और पेशेंट की मौत का खतरा भी रहता है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ सर्जिकल गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी ने इस स्टडी को बेस्ट पेपर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। स्टडी में जनरल सर्जरी के प्रोफेसर राजेश गुप्ता, सीनियर रेजिडेंस आदित्य कुलकर्णी, डॉ. मधु, डॉ. सुरेंद्र राणा, डॉ. हरप्रीत सिंह, डॉ. विशाल शामिल हैं।
ऐसे बढ़ी स्टडी
डॉ. आदित्य कुलकर्णी बताते हैं कि एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस का इलाज पहले ओपन सर्जरी से किया जाता था। सर्जरी के बाद भी बहुत ज्यादा दिक्कतें आती थीं। इससे मौतें भी ज्यादा होती थीं। साल 2008 से डॉ. राजेश गुप्ता ने ड्रेन डालकर इसका इलाज शुरू किया। ड्रेन के माध्यम से पेनक्रियाज में जमे पश को निकाला जाता है। इसके रिजल्ट अच्छे आए और मौते भी कम हुई। इसमें देखा गया कि बिना सर्जरी के भी इसे ठीक किया जा सकता है। रिसर्चरों ने इस स्टडी के आगे बढ़ते हुए सोचा कि क्या ब्लड के किसी ऐसे संकेत से पता चल सकता है कि किस मरीज में सर्जरी होनी या नहीं। रिसर्चरों ने पाया कि ब्लड के अंदर आईएल-सिक्स व सीआर-पी दो ऐसे मार्कर हैं, जो इंफेक्शन व इंफ्लामेशन कंट्रोल होने पर नीचे आते हैं। ऐसे मरीजों में सर्जरी की जरूरत नहीं होती। उसका इलाज ड्रेन के माध्यम से संभव है।
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क्या होता है एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस
उत्तर भारत में यह काफी कामन है। इसकी दो प्रमुख वजह होती हैं। पहला हद से ज्यादा शराब पीना और दूसरा गालब्लेडर में स्टोन होना। स्टोन कभी-कभार स्लिप होकर पेनक्रियाज के ओपनिंग को ब्लॉक कर देता है। पेनक्रियाज का काम डाइजेशन को कंट्रोल करना होता है। इससे हार्मोन रिलीज होते हैं, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल में होती है। इसमें गड़बड़ होने पर लोगों को डायबिटीज होती है।
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डॉक्टरों ने अपनी एक स्टडी में पाया है कि रक्त के अंदर दो मार्कर हैं। यदि शरीर के अंदर ड्रेन डालने से मार्कर नीचे आते हैं तो उस मरीज की सर्जरी की जरूरत नहीं है। इसके विपरीत जब मार्कर ऊपर जाते हैं तो सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है और पेशेंट की मौत का खतरा भी रहता है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ सर्जिकल गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी ने इस स्टडी को बेस्ट पेपर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। स्टडी में जनरल सर्जरी के प्रोफेसर राजेश गुप्ता, सीनियर रेजिडेंस आदित्य कुलकर्णी, डॉ. मधु, डॉ. सुरेंद्र राणा, डॉ. हरप्रीत सिंह, डॉ. विशाल शामिल हैं।
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ऐसे बढ़ी स्टडी
डॉ. आदित्य कुलकर्णी बताते हैं कि एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस का इलाज पहले ओपन सर्जरी से किया जाता था। सर्जरी के बाद भी बहुत ज्यादा दिक्कतें आती थीं। इससे मौतें भी ज्यादा होती थीं। साल 2008 से डॉ. राजेश गुप्ता ने ड्रेन डालकर इसका इलाज शुरू किया। ड्रेन के माध्यम से पेनक्रियाज में जमे पश को निकाला जाता है। इसके रिजल्ट अच्छे आए और मौते भी कम हुई। इसमें देखा गया कि बिना सर्जरी के भी इसे ठीक किया जा सकता है। रिसर्चरों ने इस स्टडी के आगे बढ़ते हुए सोचा कि क्या ब्लड के किसी ऐसे संकेत से पता चल सकता है कि किस मरीज में सर्जरी होनी या नहीं। रिसर्चरों ने पाया कि ब्लड के अंदर आईएल-सिक्स व सीआर-पी दो ऐसे मार्कर हैं, जो इंफेक्शन व इंफ्लामेशन कंट्रोल होने पर नीचे आते हैं। ऐसे मरीजों में सर्जरी की जरूरत नहीं होती। उसका इलाज ड्रेन के माध्यम से संभव है।
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क्या होता है एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस
उत्तर भारत में यह काफी कामन है। इसकी दो प्रमुख वजह होती हैं। पहला हद से ज्यादा शराब पीना और दूसरा गालब्लेडर में स्टोन होना। स्टोन कभी-कभार स्लिप होकर पेनक्रियाज के ओपनिंग को ब्लॉक कर देता है। पेनक्रियाज का काम डाइजेशन को कंट्रोल करना होता है। इससे हार्मोन रिलीज होते हैं, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल में होती है। इसमें गड़बड़ होने पर लोगों को डायबिटीज होती है।