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Chandigarh News: फरार शिमला ईडी के सहायक निदेशक ने गिरफ्तारी से बचने के लिए दायर की अग्रिम जमानत याचिका, बाद में ले ली वापस
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चंडीगढ़। धन शोधन से जुड़े मामले में ढाई करोड़ की रिश्वत मांगने वाले शिमला ईडी के फरार सहायक निदेशक विशालदीप ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सीबीआई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। बुधवार को इस पर सुनवाई हुई, लेकिन बाद में आरोपी पक्ष ने याचिका को वापस ले लिया। उधर, इस मामले में फरार आरोपी के गिरफ्तार भाई विकास दीपक व बुआ के लड़के नीरज द्वारा भी दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इस मामले में अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2012 से 2017 के बीच शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई ने धोखाधड़ी जबकि ईडी ने धन शोधन को लेकर केस दर्ज किया हुआ है। धन शोधन से जुड़े मामले में शिमला ईडी के सहायक निदेशक विशालदीप द्वारा दो शिक्षण संस्थान संचालकों से ढाई करोड़ रुपये रिश्वत मांगी गई थी। बाकायदा इन संचालकों में चांदपुर ऊना में स्थित देवभूमि ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के संचालक भूपिंद्र कुमार शर्मा को रहीम नाम के व्यक्ति ने फोन करके 55 लाख और कालाअंब स्थित हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन रजनीश बंसल से मुन्नवर नाम के व्यक्ति ने 1.10 करोड़ व 60 लाख रुपये की डिमांड की थी। विशालदीप अभी फरार है और गिरफ्तारी के लिए सीबीआई लगातार छापेमारी कर रही है।
आरोपियों की जमानत याचिका का सीबीआई ने किया विरोध
सीबीआई ने इस रिश्वतकांड में फरार सहायक निदेशक के भाई विकासदीप को जींद में स्थित एक होटल से गिरफ्तार कर लिया था। जांच टीम ने उसके पास से 54 लाख रुपये बरामद करने का भी दावा किया। जांच टीम ने विकासदीप की निशानदेही पर उसकी बुआ के लड़के नीरज को भिवानी से गिरफ्तार किया था। इन दोनों को कोर्ट के आदेशों पर दोनों को जेल भेज दिया गया था। इन दोनों आरोपियों ने बीते शनिवार को जमानत के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। बुधवार को कोर्ट में सीबीआई की जांच टीम ने आरोपियों द्वारा दायर की गई याचिका का विरोध किया और बताया कि आरोपियों से अभी रिश्वत के एक लाख रुपये की रिकवरी सहित मुख्य आरोपी विशालदीप को गिरफ्तार किया जाना बाकी है। लेकिन कोर्ट ने इस मामले में भी सुनवाई के लिए 13 जनवरी की तारीख दे दी। उसी दिन आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला सुनाया जाएगा।
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गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2012 से 2017 के बीच शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई ने धोखाधड़ी जबकि ईडी ने धन शोधन को लेकर केस दर्ज किया हुआ है। धन शोधन से जुड़े मामले में शिमला ईडी के सहायक निदेशक विशालदीप द्वारा दो शिक्षण संस्थान संचालकों से ढाई करोड़ रुपये रिश्वत मांगी गई थी। बाकायदा इन संचालकों में चांदपुर ऊना में स्थित देवभूमि ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के संचालक भूपिंद्र कुमार शर्मा को रहीम नाम के व्यक्ति ने फोन करके 55 लाख और कालाअंब स्थित हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन रजनीश बंसल से मुन्नवर नाम के व्यक्ति ने 1.10 करोड़ व 60 लाख रुपये की डिमांड की थी। विशालदीप अभी फरार है और गिरफ्तारी के लिए सीबीआई लगातार छापेमारी कर रही है।
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आरोपियों की जमानत याचिका का सीबीआई ने किया विरोध
सीबीआई ने इस रिश्वतकांड में फरार सहायक निदेशक के भाई विकासदीप को जींद में स्थित एक होटल से गिरफ्तार कर लिया था। जांच टीम ने उसके पास से 54 लाख रुपये बरामद करने का भी दावा किया। जांच टीम ने विकासदीप की निशानदेही पर उसकी बुआ के लड़के नीरज को भिवानी से गिरफ्तार किया था। इन दोनों को कोर्ट के आदेशों पर दोनों को जेल भेज दिया गया था। इन दोनों आरोपियों ने बीते शनिवार को जमानत के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। बुधवार को कोर्ट में सीबीआई की जांच टीम ने आरोपियों द्वारा दायर की गई याचिका का विरोध किया और बताया कि आरोपियों से अभी रिश्वत के एक लाख रुपये की रिकवरी सहित मुख्य आरोपी विशालदीप को गिरफ्तार किया जाना बाकी है। लेकिन कोर्ट ने इस मामले में भी सुनवाई के लिए 13 जनवरी की तारीख दे दी। उसी दिन आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला सुनाया जाएगा।
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