Haryana Election: आप का हरियाणा में नहीं खुला खाता, इस बार भी सूखा जारी, बाॅर्डर एरिया की सीटों पर भी निराशा
पंजाब से सटी हरियाणा की सीटों पर पंजाब के सीएम भगवंत मान प्रचार के लिए खुद उतरे थे। साथ ही 14 कैबिनेट मंत्रियों को भी उतारा था। पार्टी ने 40 स्टार प्रचारकों के साथ विधायकों की ड्यूटी भी लगाई थी लेकिन पार्टी का खाता नहीं खुला।
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आम आदमी पार्टी (आप) के लिए हरियाणा विधानसभा चुनाव में इस बार भी सूखा जारी रहा और पार्टी अपना खाता नहीं खोल पाई है। आप ने सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसके लिए पंजाब से मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद कमान संभाली थी। यहां तक कि चार जिलों में उन्होंने जोर-शोर से प्रचार भी किया था।
इसके अलावा पंजाब के मंत्रियों व विधायकों को भी प्रचार के लिए मैदान में उतारा गया था, बावजूद इसके पार्टी के हाथ निराशा लगी है। पिछली बार की तरह ही पार्टी इस बार भी एक भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रेवाड़ी, कैंथल, अंबाला व पानीपत जिलों में प्रचार की कमान संभाली थी। सीएम मान ने यहां बड़े रोड शो किए थे। साथ ही व्यापारियों के साथ बैठक भी की थी।
पार्टी ने चुनाव में नारा दिया था कि अगर पंजाब और दिल्ली में बिजली फ्री की जा सकती है तो हरियाणा में क्यों नहीं की जा सकती है। चुनाव के अंतिम दौर में मुख्यमंत्री मान की तबीयत भी खराब हो गई थी, जिसके चलते मुख्यमंत्री कुछ समय के लिए प्रचार से दूर भी रहे। पंजाब में सरकार की तरफ से चलाई जा रही योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए मंत्रियों व विधायकों को मैदान में उतारा गया था।
बाॅर्डर से सटी सीटों पर था फोकस
पार्टी का फोकस खासकर बॉर्डर एरिया के साथ लगती सीटों पर था, जिसमें अंबाला कैंट, अंबाला सिटी, कालका, पंचकूला, टोहाना, रतिया, नरवाना, डबवाली, नारायणगढ़, शाहबाद, थानेसर, पिहोवा, कैंथल, पुंडरी, करनाल समेत अन्य सीटों शामिल हैं। यही कारण है कि इन सीटों पर सीएम मान ने प्रचार के लिए खुद उतरने के साथ ही 14 कैबिनेट मंत्रियों को भी उतारा था। इसके अलावा पार्टी ने 40 स्टार प्रचारकों के साथ विधायकों की ड्यूटी भी लगाई गई थी। यहां तक कि पार्टी प्रमुख अरविंद ने भी प्रदेश में बड़ी रैलियों व रोड शो किए थे, बावजूद इसके पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा।
पंजाब में हरियाणा के बाद आगे विधानसभा की चार सीटों गिद्दड़बाहा, डेरा बाबा नानक, चब्बेवाल और बरनाला पर उपचुनाव है। इसके अलावा वर्ष 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव भी हैं। यही कारण है कि हरियाणा में पार्टी अच्छे प्रदर्शन की आस के साथ चुनाव मैदान में उतरी थी, क्योंकि पड़ोसी राज्य होने के चलते हरियाणा चुनाव के नतीजों का प्रभाव पंजाब में पड़ने की भी संभावना है। हरियाणा में पिछले विधानसभा चुनाव में आप ने 46 सीटों पर चुनाव लड़ा था, तब भी पार्टी को एक भी एक सीट नहीं मिली थी। यहां तक कि नोटा से भी कम वोट पड़े थे। जबकि इसके बाद पंजाब विधानसभा चुनाव में आप ने 92 सीटों पर रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी।
पंजाब के इन मंत्रियों को उतारा था प्रचार में
आप ने प्रचार के लिए 40 स्टार प्रचारकों की जारी की थी, जिसमें पंजाब से कैबिनेट अमन अरोड़ा, हरजोत बैंस, कुलदीप सिंह धालीवाल, हरभजन सिंह ईटीओ व लालजीत भुल्लर शामिल थे। इसके अलावा पूर्व मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा, अनमोल गगन मान, सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर व डॉ. राजकुमार चब्बेवाल भी इस सूची में शामिल थे।
कांग्रेस के साथ गठबंधन की थी तैयारी, पर नहीं बनी थी बात
आप हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन में उतरने की तैयारी कर रही थी। गठबंधन के लिए सब कुछ फाइनल भी हो गया था, लेकिन चुनाव से ठीक पहले सहमति नहीं बन पाई थी। पंजाब में आप व कांग्रेस आमने सामने हैं। कांग्रेस प्रमुख विपक्षी दल है। यही भी एक वजह है कि पंजाब में दोनों पार्टियों के नेता यह नहीं चाहते थे कि हरियाणा में यह गठबंधन सिरे चढ़े, क्योंकि इसका प्रभाव पंजाब की राजनीति में भी पड़ना था। यह भी एक वजह है कि दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया था। वहीं, दूसरी तरफ पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि जगाधरी सीट पर आप उम्मीदवार को 43 हजार से ऊपर वोट पड़े हैं। पार्टी के सभी वर्करों ने कड़ी मेहनत की, जिसके लिए मैं सभी कार्यकर्ताओं का आभार जताता हूं।