पंजाब में इन 5 सीटों पर कड़ी टक्कर में 'आप'
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आम आदमी पार्टी ने इस बार लोकसभा चुनाव में सारे समीकरण बदल दिए हैं। पंजाब के इतिहास में यह पहला मौका है जब लोकसभा चुनाव के दौरान तीसरे विकल्प के रूप में आप मैदान में है।
अब तक मुकाबला दोनों परंपरागत प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और शिअद-भाजपा के बीच होता आ रहा है। लेकिन इस बार आप की मौजूदगी से सारा गणित बदल गया है।
पंजाब की पांच सीटों पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने दमदार कंपने के जरिये विरोधियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
कांग्रेस और शिअद-भाजपा कैंप में एक ही सवाल चल रहा है कि आप के उम्मीदवार किसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे। दोनों ही दल अपने-अपने हिसाब से अपने पक्ष में हिसाब लगाने में जुटे हैं।
केंद्र और प्रदेश सरकार से जनता खफा
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में दोनों तरह का एंटी इंकंबेंसी फैक्टर है। केंद्र सरकार से भी नाराजगी है, तो राज्य सरकार के कामकाज को लेकर भी लोगों में काफी गुस्सा है। केंद्र सरकार से नाराज लोग इस बार भाजपा को चुनते, पर इसमें आम आदमी पार्टी भी सेंध लगाएगी।
वहीं, राज्य सरकार से नाराज लोग कांग्रेस में विकल्प तलाशते, पर उनके पास अब आप के रूप में दूसरा विकल्प भी है। इस तरह आम आदमी पार्टी कांग्रेस और भाजपा, दोनों के वोट बैंक में सेंध लगा रही है। पर किसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी यह तो सोलह मई को पता चल पाएगा।
संगरूर
संगरूर में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार और हास्य कलाकार भगवंत मान, कांग्रेस के विजय इंदर सिंगला और शिअद के सुखदेव सिंह ढींढसा के लिए चुनौती बन गए हैं। मान ने प्रचार के अपने खास अंदाज से दोनों उम्मीदवारों को परेशान कर रखा है।
पूरे पंजाब में जहां जुबानी जंग चल रही है। वहीं, मान हंसी के फव्वारे के बीच व्यंग्य के बाण भी चला रहे हैं। उनके निशाने पर मुख्य तौर पर अकाली दल ही रहता है। मान के जलसों में युवाओं की बढ़ती भीड़ बाकी दोनों पार्टियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
मान पिछले विधानसभा चुनाव में संगरूर के ही सुनाम हलके से पीपीपी के टिकट पर लड़े थे और करीब 23 हजार वोट लाकर चुनाव हार गए थे। इस बार उनके पीछे आम आदमी पार्टी है, जिसे सब जगह आम लोगों का समर्थन मिल रहा है।
अगर सिर्फ प्रचार की बात करें तो मान ने संगरूर में मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। जलसों में जुटने वाली भीड़ वोट बैंक में तब्दील होगी या नहीं, यह किसी को नहीं पता।
पटियाला
पटियाला से आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस की दिग्गज परनीत कौर और शिअद के दीपइंदर ढिल्लों के मुकाबले डॉ. धरमवीर गांधी को उतारा है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गांधी पटियाला में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।
पिछले कई सालों से वह समाजसेवा करते आ रहे हैं। डॉ. गांधी को शहरी हलकों में मिल रहे जनसमर्थन ने दोनों पार्टियों की नींद उड़ा दी है। पटियाला में आप की सबसे ज्यादा मेंबरशिप भी हुई थी।
आप नेताओं का दावा है कि उन्हें ग्रामीण हलकों में भी काफी अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। आम लोग, खासकर यूथ, उनके साथ जुड़ रहा है। कांग्रेस और शिअद में यही मंथन चल रहा है कि डॉ. गांधी किसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे।
दोनों पार्टियों के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर डॉ. गांधी पचास हजार वोट पर सिमटते हैं तो नुकसान अकाली दल को होगा। पर अगर वह इससे ज्यादा वोट ले जाते हैं तो कांग्रेस का नुकसान होगा।
लुधियाना
लुधियाना से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार एडवोकेट एचएस फुलका ने मुकाबला चतुष्कोणीय बना दिया है। यहां से कांग्रेस के रवनीत बिट्टू और शिअद के मनप्रीत अयाली के साथ-साथ दमदार आजाद उम्मीदवार सिमरजीत बैंस मैदान में हैं।
फुलका सुप्रीम कोर्ट में 1984 के सिख दंगा पीड़ितों के मामलों की सालों से पैरवी करते आ रहे हैं। सिखों के बीच उनकी काफी अच्छी छवि है। फुलका के साथ भी आम लोग और यूथ ब्रिगेड है। जिससे लुधियाना की जंग काफी दिलचस्प हो गई है।
लुधियाना में भी सियासी विश्लेषकों का मानना है कि अगर फुलका पचास हजार तक वोट लेकर जाते हैं तो कांग्रेस को फायदा होगा। पर अगर उनके वोट ज्यादा हो गए, तो कांग्रेस को नुकसान हो सकता है।
अमृतसर
दो दिज्गजों के अखाड़े अमृतसर में आम आदमी पार्टी ने बेहद लोकप्रिय उम्मीदवार डॉ. दलजीत सिंह को उतारा है। भाजपा के राष्ट्रीय नेता अरुण जेटली और कांग्रेस के दिग्गज कैप्टन अमरिंदर सिंह के मैदान में होने के कारण यह सीट हाई प्रोफाइल हो गई है। ऊपरी तौर पर लोग सिर्फ कैप्टन और जेटली की बात कर रहे हैं।
पर दोनों पार्टियों को इस बात की बेहद चिंता है कि डॉ. दलजीत किसे नुकसान पहुंचाएंगे। पद्मश्री आई सर्जन डॉ. दलजीत अमृतसर हलके में जाना-पहचाना नाम हैं। शहर से लेकर गांवों तक हर कोई उन्हें जानता है। पर चुनाव में वोट डालने के पीछे और भी बहुत से कारण होते हैं।
दिज्गजों के बीच कांटे की जंग में थोड़ा सा वोट बैंक खिसकना भारी पड़ सकता है। इसलिए कांग्रेस और भाजपा की नजरें आप उम्मीदवार पर टिकी हैं। कहा जा रहा है कि अगर डॉ. दलजीत तीस हजार तक वोट ले जाते हैं तो कांग्रेस का फायदा है। पर अगर उनका वोट बैंक बढ़ा तो भाजपा को फायदा हो सकता है।
गुरदासपुर
गुरदासपुर भी कांग्रेस के प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा और भाजपा के स्टार विनोद खन्ना के लड़ने से हॉट सीट बनी हुई है। यहां से आम आदमी पार्टी ने सुच्चा सिंह छोटेपुर को उम्मीदवार बनाया है।
छोटेपुर के हलके में प्रभाव और उनके साथ आप का कैडर मिलने से मुकाबला यहां भी त्रिकोणीय बन गया है। छोटेपुर पहले भी यहां से धारीवाल और कादियां विधानसभा हलकों से चुनाव लड़ चुके हैं।
वह अकाली दल के दिग्गज नेता सेवा सिंह सेखवां को हरा भी चुके हैं। इस बार वह आप के टिकट पर मैदान में हैं। उनकी मौजूदगी को दोनों पार्टियां अपने हक में देख रही हैं। भाजपा का मानना है कि आप और कांग्रेस, दोनों के उम्मीदवार सिख हैं, दोनों का प्रभाव क्षेत्र भी एक है।
इसलिए आप, कांग्रेस का नुकसान करेगी। परंपरागत हिंदू वोट भाजपा की झोली में जाएगा। वहीं, कांग्रेस को लगता है कि आप, भाजपा को नुकसान पहुंचा रही है।
केजरीवाल के रोड शो ने बढ़ाई चिंता
आम आदमी पार्टी ने पंजाब की सभी तेरह सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। उम्मीदवारों के ऐलान से पहले मेंबरशिप ड्राइव हुई। उम्मीदवार घोषित होने के बाद सभी हलकों में आप का प्रचार चल रहा था। कांग्रेस और शिअद-भाजपा आपस में ही उलझे हुए थे।
पर जिस दिन आप के कनवीनर अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में रोड शो किया, पहली बार दोनों दलों की नींद उड़ी। इससे पहले आप के समर्थक साइलेंट थे। पर केजरीवाल के रोड शो के दौरान जिस तरह भीड़ उमड़ी, उसने दोनों पार्टियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। केजरीवाल के रोड शो में अमृतसर, लुधियाना, संगरूर में जबरदस्त भीड़ उमड़ी।
इसमें आम लोग और युवा थे। इसके बाद कांग्रेस और शिअद-भाजपा को पंजाब में आप-फैक्टर नजर आने लगा। अब दोनों को यही चिंता सता रही है कि आप कहीं उनका नुकसान न कर दे।
ये कहना है दिग्गजों का
आम आदमी पार्टी का असर शिरोमणि अकाली दल पर पड़ेगा। शिअद का वोट बैंक ही टूट कर आप की तरफ जाएगा। इससे कांग्रेस को कोई नुकसान नहीं है।
-- रजिंदर कौर भट्ठल, चेयरपर्सन, प्रदेश कांग्रेस कैंपेन कमेटी
आम आदमी पार्टी का पंजाब में कोई प्रभाव नहीं है। दिल्ली के प्रदर्शन के बाद हर कोई आप से नाराज है। अगर कहीं कुछ असर हुआ भी तो नुकसान कांग्रेस का होगा, शिअद का नहीं।
-- डॉ. दलजीत सिंह चीमा, प्रवक्ता, शिरोमणि अकाली दल