'आप' विधायक एचएस फुलका को राहुल गांधी को चैलेंज, बोले- 1984 के दंगों पर मुझसे डिबेट करो
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ब्रिटेन की दो दिवसीय यात्रा पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों को बेहद दुखद त्रासदी बताया और कहा कि वह किसी के भी खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा में शामिल लोगों को सजा देने का समर्थन करते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षक द्वारा हत्या के बाद 1984 में हुए दंगों में करीब 3,000 सिख मारे गए थे। उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।
राहुल गांधी ने कहा कि यह घटना एक त्रासदी थी और बहुत दुखद अनुभव था लेकिन उन्होंने इससे असहमति जताई कि इसमें कांग्रेस शामिल थी। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि किसी के भी खिलाफ कोई भी हिंसा गलत है। भारत में कानूनी प्रक्रिया चल रही है लेकिन जहां तक मैं मानता हूं उस समय कुछ भी गलत किया गया तो उसे सजा मिलनी चाहिए और मैं इसका 100 फीसदी समर्थन करता हूं।
वह वर्ष 1991 में लिट्टे द्वारा उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का जिक्र कर रहे थे। वहीं राहुल गांधी के इस बयान का चौतरफा विरोध हो रहा है। बीजेपी के अनिल विज का कहना है कि राहुल की दलीलें पूरी तरह झूठी हैं। जब 1984 में सिख दंगे हुए थे, तो राहुल गांधी खुद बच्चे थे। उन्हें क्या मालूम सिख दंगों का जिम्मेवार कौन है। राहुल यदि कांग्रेस का इतिहास खंगालेंगे, तो उन्हें मालूम चल जाएगा।
राहुल गांधी के बचाव में आए कैप्टन अमरिंदर सिंह
1984 के सिख दंगों के मुद्दे पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बचाव में आए हैं। उन्होंने शिअद प्रधान सुखबीर बादल द्वारा इसे लेकर राहुल पर किए हमले की आलोचना करते हुए सुखबीर के बयान को अनुचित और बेतुका बताया है।
सीएम ने कहा कि 1984 के दंगों के समय राहुल स्कूल में पढ़ते थे। उन्हें हर बात के लिए जिम्मेदार ठहराए जाना हास्यास्पद है। यह अजीब बात है कि राहुल को उस बात के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जिसके बारे में उन्हें उस समय कुछ पता भी नहीं होगा। एक पार्टी के तौर पर कांग्रेस कभी भी दंगों में शामिल नहीं हुई। अगर कोई व्यक्तिगत तौर पर इसमें शामिल था, उस पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। कुछ व्यक्तियों के कारण पूरी पार्टी पर दोष लगाना सुखबीर की राजनीतिक तौर पर अपरिपक्वता दर्शाता है।
राहुल का हाल का बयान उनके 1984 पर पहले दिए बयानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। राहुल ने खुद कुछ कांग्रेसियों के नाम लिए थे। 1984 की निर्मम हत्याओं में शामिल लोगों को फांसी पर लटका देना चाहिए, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों। सीएम ने कहा कि विचारहीन और जरूरत से ज्यादा बयान अकालियों, खासकर बादलों की आदत है। सुखबीर का यह बयान उनकी बौखलाहट का नतीजा है क्योंकि पंजाब में उनकी पार्टी बिल्कुल अलग-थलग पड़ गई है।
1984 के दंगों पर राहुल के बयान को सिर्फ सुखबीर जैसा व्यक्ति ही ऐसे बेतुके तरीके से परिभाषित कर सकता है। अकालियों में डॉ. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी द्वारा इस पर जताए दुख के पीछे की भावनाओं की सराहना की संवेदनशीलता भी नहीं है। कैप्टन ने कहा कि उन्होंने कभी भी इसमें कांग्रेस की संलप्तिता का बयान नहीं दिया है तो फिर राहुल पर पलटी मारने का सवाल ही नहीं उठता। राहुल ने 1984 के दंगों सहित हर तरह की हिंसा की आलोचना की है। दुर्भाग्य की बात है कि अदालती प्रणाली में देरी के कारण 1984 के पीड़ितों को न्याय नहीं मिला।