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17 को बनेगा ये अदभुत संयोग, मिलेगी कष्टों से मुक्ति
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 16 Nov 2013 03:25 PM IST
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कार्तिक पूर्णिमा पर इस वर्ष महाकार्तिकी योग बन रहा है। सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारयण मिश्र का कहना है कि 17 नवंबर दिन रविवार को सूर्योदय सुबह 6:54 बजे होगा और रात आठ बजकर 45 मिनट तक पूर्णिमा है। सुबह 11:40 बजे तक भरणी नक्षत्र है।
इसके बाद कृतिका नक्षत्र का आगमन 11:41 बजे होगा। उन्होंने कहा कि यदि कार्तिक मास में भरणी और कृतिका नक्षत्र का संयोग हो तो यह महाकार्तिक योग बनता है। इस योग में गंगा स्नान, जाप पूजा और शाम में दीप दान करने से अनेक प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। जिसकी कुंडली में शुक्र की महादशा है या शुक्र अच्छा नहीं है, उसे कई परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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इसके कारण उन्हें विवाह में विलंब और पति-पत्नी में मतभेद जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में उन्हें इनसे निजात पाने के लिए विष्णु और शिव का पूजन और गूलर की लकड़ी से हवन करना चाहिए।
वहीं कृतिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। मिश्र के अनुसार जिसका सूर्य अच्छा नहीं या सूर्य की महादशा है, उसका पढ़ाई मे मन नहीं लगेगा, बीमारी का पता नहीं चलेगा और समाज में अपमान के कारण मन परेशान हो सकता है।
ऐसे लोगों को इन परेशानियों से बचने के लिए शिव जी पर 41 दिन आम का मंजर चढ़ाना, सूर्य का जप कराकर हवन करना चाहिए।
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इसके बाद कृतिका नक्षत्र का आगमन 11:41 बजे होगा। उन्होंने कहा कि यदि कार्तिक मास में भरणी और कृतिका नक्षत्र का संयोग हो तो यह महाकार्तिक योग बनता है। इस योग में गंगा स्नान, जाप पूजा और शाम में दीप दान करने से अनेक प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। जिसकी कुंडली में शुक्र की महादशा है या शुक्र अच्छा नहीं है, उसे कई परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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इसके कारण उन्हें विवाह में विलंब और पति-पत्नी में मतभेद जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में उन्हें इनसे निजात पाने के लिए विष्णु और शिव का पूजन और गूलर की लकड़ी से हवन करना चाहिए।
वहीं कृतिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। मिश्र के अनुसार जिसका सूर्य अच्छा नहीं या सूर्य की महादशा है, उसका पढ़ाई मे मन नहीं लगेगा, बीमारी का पता नहीं चलेगा और समाज में अपमान के कारण मन परेशान हो सकता है।
ऐसे लोगों को इन परेशानियों से बचने के लिए शिव जी पर 41 दिन आम का मंजर चढ़ाना, सूर्य का जप कराकर हवन करना चाहिए।