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13 साल बाद पाकिस्तान से लौटा सोनू, भावुक पिता ने चूम लिया माथा, इस कारण अभी नहीं जा पाएगा घर
Sun, 22 Nov 2020 06:51 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब )
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब )
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 22 Nov 2020 06:51 PM IST
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अमृतसर में बेटे सोनू का माथा चूमते रोशन सिंह।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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26 अक्तूबर को पाकिस्तान की ओर से रिहा किए गए उत्तरप्रदेश के जिला ललितपुर के गांव संतवासा निवासी सोनू रविवार को जब अपने पिता से मिला तो उनके गले लगते ही फफक-फफक कर रो पड़ा। पंजाब के अमृतसर नारायणगढ़ के पुनर्वास केंद्र में रविवार को बेटे को देखकर भावुक हुए पिता रोशन सिंह ने बेटे के माथे को चूम लिया और आंसू पोंछे। चाचा उदय सिंह ने भी भतीजे की पीठ थपथपाई।
हालांकि सोनू को अभी घर जाने के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ेगा। उसके पिता स्थानीय पुलिस थाने के दरोगा व एसडीएम का वह पत्र साथ लेकर नहीं आए थे, जिसमें सोनू सिंह की पहचान पर मोहर लगी हो। दरोगा और एसडीएम का पत्र सोमवार सुबह फैक्स से पहुंचने की उम्मीद है।
25 दिन से नारायणगढ़ के पुनर्वास केंद्र में एकांतवास सोनू को अपनों का इंतजार था। उसके साथ रिहा हुए तीन लोग घर लौट चुके हैं। रविवार सुबह जब उसके पिता और चाचा उदय सिंह वहां पहुंचे तो उन्हें देखकर उसके आंसू नहीं थम रहे थे। पिता से गले मिल सोनू ने कहा कि पाकिस्तान की अलग-अलग जेलों में सजा काटने के बाद जब वह वतन लौट रहा था तो उसे इस बात की चिंता सता रही थी कि पता नहीं वह अपनों से मिल भी पाएगा या नहीं। मानसिक रूप से कमजोर हो चुका सोनू सिंह यह बताने में असमर्थ है कि वह पाकिस्तान की कौन-कौन सी जेलों में सजा काट चुका है। वह किस रास्ते पाकिस्तान गया और कहां गिरफ्तार हुआ।
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वोटर और राशन कार्ड लेकर पहुंचे थे परिजन
सोनू सिंह के पिता व चाचा अपने साथ उसकी पहचान के लिए वोटर और राशन कार्ड लेकर आए थे। राशन कार्ड में सोनू सिंह का नाम छठे स्थान पर दर्ज है। रोशन सिंह ने गांव के सरपंच का पत्र भी नारायणगढ़ पुनर्वास केंद्र के अधिकारियों को सौंपा जिसमें इस बात की तस्दीक थी कि सोनू संतवासा गांव का निवासी है। जब केंद्र के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस थाना प्रभारी, एसडीएम और जिला प्रशासन की तरफ से सोनू की पहचान के बारे में पत्र मांगे तो उनके पास ऐसा कोई प्रमाण पत्र नहीं था।
पुनर्वास केंद्र के अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान से रिहा होकर आने वाले भारतीयों के लिए जिला प्रशासन के पत्र जरूरी है। जब तक यह औपचारिकता पूरी नहीं होती सोनू को उन्हें नहीं सौंपा जा सकता। सुरक्षा अधिकारी मनिंदर सिंह ने उन्हें अपने थाना या सब डिवीजन ऑफिस से फैक्स से प्रमाण पत्र मंगवाने को कहा।
मानसिक परेशानी में घर से चला गया था सोनू
रोशन सिंह ने अमर उजाला को बताया कि उनके चार बेटे हैं। सोनू सिंह सबसे छोटा है। करीब 13 साल पहले मानसिक परेशानी की हालत में वह घर से चला गया था। पूरा परिवार उसकी तलाश में भटकता रहा। कुछ वर्षों के बाद पता चला कि सोनू पाकिस्तान की जेल में बंद है। जिला अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सोनू रिहा होकर लौट आया है और अमृतसर के नारायणगढ़ के एक केंद्र में दाखिल है। वह अपने गांव में संपर्क कर जरूरी दस्तावेज मंगवाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बेटे को घर ले जा सकें।
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हालांकि सोनू को अभी घर जाने के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ेगा। उसके पिता स्थानीय पुलिस थाने के दरोगा व एसडीएम का वह पत्र साथ लेकर नहीं आए थे, जिसमें सोनू सिंह की पहचान पर मोहर लगी हो। दरोगा और एसडीएम का पत्र सोमवार सुबह फैक्स से पहुंचने की उम्मीद है।
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25 दिन से नारायणगढ़ के पुनर्वास केंद्र में एकांतवास सोनू को अपनों का इंतजार था। उसके साथ रिहा हुए तीन लोग घर लौट चुके हैं। रविवार सुबह जब उसके पिता और चाचा उदय सिंह वहां पहुंचे तो उन्हें देखकर उसके आंसू नहीं थम रहे थे। पिता से गले मिल सोनू ने कहा कि पाकिस्तान की अलग-अलग जेलों में सजा काटने के बाद जब वह वतन लौट रहा था तो उसे इस बात की चिंता सता रही थी कि पता नहीं वह अपनों से मिल भी पाएगा या नहीं। मानसिक रूप से कमजोर हो चुका सोनू सिंह यह बताने में असमर्थ है कि वह पाकिस्तान की कौन-कौन सी जेलों में सजा काट चुका है। वह किस रास्ते पाकिस्तान गया और कहां गिरफ्तार हुआ।
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वोटर और राशन कार्ड लेकर पहुंचे थे परिजन
सोनू सिंह के पिता व चाचा अपने साथ उसकी पहचान के लिए वोटर और राशन कार्ड लेकर आए थे। राशन कार्ड में सोनू सिंह का नाम छठे स्थान पर दर्ज है। रोशन सिंह ने गांव के सरपंच का पत्र भी नारायणगढ़ पुनर्वास केंद्र के अधिकारियों को सौंपा जिसमें इस बात की तस्दीक थी कि सोनू संतवासा गांव का निवासी है। जब केंद्र के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस थाना प्रभारी, एसडीएम और जिला प्रशासन की तरफ से सोनू की पहचान के बारे में पत्र मांगे तो उनके पास ऐसा कोई प्रमाण पत्र नहीं था।
पुनर्वास केंद्र के अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान से रिहा होकर आने वाले भारतीयों के लिए जिला प्रशासन के पत्र जरूरी है। जब तक यह औपचारिकता पूरी नहीं होती सोनू को उन्हें नहीं सौंपा जा सकता। सुरक्षा अधिकारी मनिंदर सिंह ने उन्हें अपने थाना या सब डिवीजन ऑफिस से फैक्स से प्रमाण पत्र मंगवाने को कहा।
मानसिक परेशानी में घर से चला गया था सोनू
रोशन सिंह ने अमर उजाला को बताया कि उनके चार बेटे हैं। सोनू सिंह सबसे छोटा है। करीब 13 साल पहले मानसिक परेशानी की हालत में वह घर से चला गया था। पूरा परिवार उसकी तलाश में भटकता रहा। कुछ वर्षों के बाद पता चला कि सोनू पाकिस्तान की जेल में बंद है। जिला अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सोनू रिहा होकर लौट आया है और अमृतसर के नारायणगढ़ के एक केंद्र में दाखिल है। वह अपने गांव में संपर्क कर जरूरी दस्तावेज मंगवाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बेटे को घर ले जा सकें।