थैलीसीमिया खत्म करने को घर से निकली एक बेटी

ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 02 Feb 2014 02:56 PM IST
A Girl Campaign Against Thalisimia
थैलीसीमिया को जड़ से खत्म करने के लिए पंजाब के कोटकपुरा की एक युवती सुख बराड़ ने अभियान छेड़ दिया है। सुख पैदल यात्रा कर कालेज गोइंग स्टूडेंट और अन्य लोगों को थैलीसीमिया के प्रति जागरूक कर रही हैं। अब तक पंजाब के 21 शहरों का वे पैदल भ्रमण कर चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि थैलीसीमिया के मरीजों की हालत सबसे ज्यादा पंजाब में खराब है। यहां पर थैलीसीमिया के टेस्ट सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। दवाएं मिलती नहीं। यहां तक ब्लड के लिए पीड़ितों को दर-दर की ठोकरे खानी पड़ती हैं।

अपने आप में अनोखे अभियान को शुरू करने के मकसद के बारे में सुख ने बताया कि उनकी क्लासमेट थैलीसीमिया से पीड़ित थी। वह पंजाब के अमृतसर की रहने वाली थी।

सुख के मुताबिक उनकी दोस्त को काफी दिक्कतें आती थी। वक्त पर दवाएं नहीं मिलती थी। इलाज के दौरान उसे काफी दर्द होता था। उसके साथ-साथ उसके घर वालों को भी बहुत परेशानी आती थी। दोस्त का दर्द देखा नहीं जाता था। इसलिए प्रण लिया कि कुछ भी अब हर हालत में थैलीसीमिया को खत्म करना है।

जागरुकता की कमी के कारण पंजाब में लगातार थैलीसीमिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। पूरे पंजाब में कुल 1890 मरीज हैं। इनमें से पटियाला से कुल 1500 पेशेंट हैं। अमृतसर से 130 और जालंधर से 110 मरीज हैं।

उन्होंने बताया कि थैलीसीमिया को जड़ से खत्म करने के लिए सिर्फ जागरूकता जरूरी है। इसीलिए यंगस्टर को फोकस कर उन्हें जागरूक किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी थैलीसीमिया से मुक्त हो। वे अब तक पंजाब के कुल 21 शहरों का भ्रमण कर चुकी हैं।

पेशे से एडवंचर्स करने वाली सुख ने बताया कि पहले उन्होंने उत्तराखंड के कुछ साथियों के साथ काम किया। इसी सिलसिल में वे पुणे और मुंबई पहुंची। वहां से अनुभव हासिल करने के बाद पंजाब में अभियान की शुरुआत की।

चंडीगढ़ में किया जागरूक
शनिवार को सुख बराड़ चंडीगढ़ पहुंची और लोगों को थैलीसीमिया के बारे में विस्तार से बताया। सुख ने बताया कि उन्होंने अपनी यात्रा दस जनवरी से कोटकपूरा से शुरुआत की थी। वे पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर भी पहुंची। यहां पर सुख बराड़ का जोरदार स्वागत किया गया।

उन्होंने थैलीसीमिक पीड़ितों से भी मुलाकात की। पीजीआई के मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉक्टर एके गुप्ता, पीडियाट्रिक के एडिश्नल प्रोफेसर डॉ. दीपक बंसल, ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुचेज सचदेव ने फूलों के गुलदस्ते से उनका स्वागत किया। उन्होंने बताया कि थैलीसीमिया को खत्म करने की दिशा में यह एक शुरुआत है। जल्द ही इस पर सफलता मिलेगी।

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