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घोर लापरवाहीः सांप ने था काटा लेकिन तीन दिन तक पैरालाइज का उपचार करते रहे डॉक्टर, मौत

Sun, 18 Aug 2019 04:49 PM IST
ajay kumar संजय कुमार, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
संजय कुमार, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sun, 18 Aug 2019 04:49 PM IST
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A Case Of Carelessness At PGIMS Rohtak
रोहतास की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग में खरकड़ा से उपचार के लिए आए रोहतास ने डॉक्टरों की लापरवाही के चलते तीन दिन बाद दम तोड़ दिया। डॉक्टर मरीज के पैरालाइज होने व जहरीले पदार्थ के सेवन की आशंका को देखते हुए उपचार करते रहे, जबकि मरीज की जान जाने के बाद पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ कि उसको सांप ने काटा था। आपातकालीन विभाग व वार्ड नौ में किसी डॉक्टर ने मरीज के शरीर को जांचने की जहमत तक नहीं उठाई कि बीमारी का मूल कारण क्या है।  

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हैरानी भरा ही सही लेकिन सच है कि प्रदेश के सबसे बडे़ चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग व वार्ड नौ के डॉक्टरों को तीन दिन तक यह भी पता नहीं कर पाए कि मरीज ने जहर खाया है या उसे सांप ने काटा है। 
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आखिरकार मरीज उपचार के दौरान दम तोड़ देता है और जब पोस्टमार्टम होता है तो परिजनों के पैरों की जमीन खिसक जाती है। उन्हें बताया जाता है कि मरीज को तो सांप ने काटा था। ऐसे में परिजनों का मानना है कि यदि मरीज को समय पर एंटी स्नैक वीनेम की डोज दी जाती तो उसे बचाया जा सकता था। 
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पहले भी की थी लापरवाही
कुछ ही दिन पहले एक अन्य किशोर को संस्थान में संदेह के आधार पर एंटी स्नैक विनेम की डोज दी गई थी और रिएक्शन होने पर उसकी मौत हो गई। यह डोज सीनियर डॉक्टर के कहने पर दी गई थी और सीनियर के आगे ही यह रिएक्शन हुआ लेकिन वह मौके पर नहीं रुके। तबीयत बिगड़ने के बावजूद उसे आईसीयू की जगह वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। इस मामले की जांच चल रही है।

खेत में बेहोश हो गया रोहतास, डॉक्टरों ने नहीं दिया ध्यान

सोनीपत निवासी सुरेंद्र कुमार ने रोष जताते हुए बताया कि मृतक रोहतास उनके जीजा थे। वह 10 अगस्त को काम से खेत गए थे और अचानक बेहोश हो कर गिर गए। खेत में साथ गए लोग उन्हें उपचार के लिए डेढ़ घंटे के अंदर पीजीआईएमएस ले आए। यहां डॉक्टरों ने बताया कि रोहतास का आधा ब्रेन डेड हो गया है और पैरालाइज भी हो गया है। 

डॉक्टरों ने संदेह जताया कि रोहतास ने कुछ जहरीली चीज खा ली है लेकिन किसी ने सांप के काटने की ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि रोहतास अकेला खेत में नहीं गया था। उसके जहर खाने का कोई मतलब नहीं था लेकिन इस बात को अनसुना कर दिया गया। 10 अगस्त को आपातकालीन विभाग से मरीज को तीन घंटे बाद वार्ड नौ में रेफर कर दिया गया। 

वह बोल भी नहीं पा रहा था और मुंह से झाग आ रहा था। सांस लेने में समस्या के चलते रोहतास को एंबु से सांस दी जा रही थी। अस्पताल में आईसीयू तक उपलब्ध नहीं कराया गया। वार्ड में दर्द से तड़प रहे मरीज की सांस की नली निकल गई तो डॉक्टर को बताया गया। सुरेंद्र कुमार ने बताया कि यहां डॉक्टर ने जवाब दिया, जब नली निकली तो तुम क्या कर रहे थे। 

जहर खाया है तो तकलीफ तो होगी ही, अब जो मुझे समझा रहे हो तो पहले मरीज को क्यों नहीं समझाया कि वह जहर क्यों खा रहा है। इसके बाद मरीज को ऑक्सीजन दी गई और उपचार जारी रखा। 12 अगस्त को रात 11 बजे डॉक्टरों ने रोहतास को डेड घोषित कर दिया। इसके बाद जब पोस्टमार्टम के लिए शव को ले गए तो पता चला कि रोहतास को सांप ने काटा था। 

हैरानी की बात थी कि डॉक्टर तीन दिन में यह पहचान नहीं कर पाए कि सांप काटने और जहर खाने वाले मरीजों में क्या अंतर दिखाई देते हैं। डॉक्टरों की लापरवाही के चलते बहन का सुहाग उजड़ा और एक बेटी व दो बेटे के सिर से उनके बाप का साया भी उठ गया। मरीज को स्वयं देखने की बजाए डॉक्टर जांच करवाने में लगे रहे। 

मामला संज्ञान में नहीं है और न ही किसी की कोई शिकायत मिली है। यदि शिकायत आती है तो इस मामले की जांच कराएंगे। - डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस

कोबरा के न्यूरोटोक्सीन से होता है नर्वस सिस्टम डेड

एक्सपर्ट की मानें तो कोबरा सांप काटने के दौरान व्यक्ति के शरीर न्यूरोटाक्सीन रसायन छोड़ता है। इससे ब्रेन व नर्वस सिस्टम डेड हो जाता है। पीड़ित गफलत में जाता है और उसे धुंधला दिखाई देने लगता है। इसके साथ उसे सांस लेने में समस्या होने लगती है। जबकि दूसरे सांप वायपर किस्म के होते हैं, इनके काटने पर शरीर के विभिन्न हिस्सों से रक्त बहता है। 

अक्सर सांप हाथ व पांव पर काटते हैं। कोबरा के काटने में सूजन आ जाती है। इसलिए डॉक्टर के लिए जरूरी होता है कि बरसात के मौसम में सांप के काटने को अनदेखा न करे। डॉक्टर के लिए जरूरी होता है कि मरीज यदि कुछ बता नहीं पा रहा तो उसके शरीर को देखा जाए और फिर उपचार शुरू किया जाए। हमारे देश में एएसवी की जरूरत 20 से 30 प्रतिशत को ही पड़ती है। सांप काटने वाले मरीज के शरीर पर दो दांतों के निशान होते हैं, इससे व मरीज के लक्षणों से बीमारी की पहचान की जाती है।

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