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पंजाब में 11 महीने में हाइपरटेंशन के 9 लाख मरीज पंजीकृत
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चंडीगढ़। कोविड-19 के दौरान पंजाब में इस साल नवंबर माह तक हाइपरटेंशन से ग्रस्त 9 लाख मरीजों का पंजीकरण किया जा चुका है। प्रदेश में हाइपरटेंशन की बढ़ती रफ्तार पर काबू के लिए सरकार की तरफ से विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। मौजूदा समय में देश में हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या कुल आबादी में 25 प्रतिशत है जबकि पंजाब में यह आंकड़ा 35 प्रतिशत पर पहुंच चुका है। यह बेहद गंभीर स्थिति है। इस पर तत्काल काबू पाना होगा अन्यथा स्थिति खराब हो सकती है। यह बातें पंजाब सरकार की तरफ से राज्य में बढ़ते हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या पर काबू पाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत पीजीआई कम्युनिटी मेडिसिन, साइफर और ग्लोबल हेल्थ एडवोकेसी इनक्यूबेटर संस्था की ओर से सोमवार को आयोजित कार्यशाला में कही गई।
पंजाब सरकार के आर्थिक सलाहकार नीलांबुज शरण ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए हमें अपने भोजन के साथ ही जीवन शैली में सकारात्मक बदलाव लाना होगा। उच्च रक्तचाप वाले मरीजों को इसका पालन करना बेहद जरूरी है तभी हम इस बीमारी पर काबू पा सकेंगे। पीजीआई कम्युनिटी मेडिसिन के प्रो सोनू गोयल और पंजाब के पूर्व निदेशक स्वास्थ्य डॉ. आर के गुप्ता ने बताया कि दिवाली के दौरान चलाए गए ट्रांस फैट फ्री दिवाली कैंपन से भी जागरूकता फैलाने में काफी मदद मिली है। ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित होते रहने चाहिए। इसके साथ ही दवाओं की निर्बाध आपूर्ति भी बेहद जरूरी है। इसलिए सरकार को इस बात पर ध्यान रखना होगा कि 6 महीने का स्टॉक होने के दौरान ही दवाओं की डिमांड कर आपूर्ति सुनिश्चित करा ली जाए ताकि मरीजों के इलाज में किसी तरह की बाधा ना आने पाए।
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पंजाब सरकार के आर्थिक सलाहकार नीलांबुज शरण ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए हमें अपने भोजन के साथ ही जीवन शैली में सकारात्मक बदलाव लाना होगा। उच्च रक्तचाप वाले मरीजों को इसका पालन करना बेहद जरूरी है तभी हम इस बीमारी पर काबू पा सकेंगे। पीजीआई कम्युनिटी मेडिसिन के प्रो सोनू गोयल और पंजाब के पूर्व निदेशक स्वास्थ्य डॉ. आर के गुप्ता ने बताया कि दिवाली के दौरान चलाए गए ट्रांस फैट फ्री दिवाली कैंपन से भी जागरूकता फैलाने में काफी मदद मिली है। ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित होते रहने चाहिए। इसके साथ ही दवाओं की निर्बाध आपूर्ति भी बेहद जरूरी है। इसलिए सरकार को इस बात पर ध्यान रखना होगा कि 6 महीने का स्टॉक होने के दौरान ही दवाओं की डिमांड कर आपूर्ति सुनिश्चित करा ली जाए ताकि मरीजों के इलाज में किसी तरह की बाधा ना आने पाए।
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