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असली टॉपर तो स्तुति अत्री, स्पेशल चाइल्ड होने के बावजूद प्राप्त किए 82.4% अंक
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 29 May 2017 09:19 AM IST
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- फोटो : File Photo
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भूमि, आदित्य, मन्नत, शौर्य, नूर। ये सभी चंडीगढ़ के टॉपर हैं। मगर असली टॉपर सेक्टर 16 स्थित गवर्नमेंट माडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा स्तुति अत्री है। स्तुति स्पेशल चाइल्ड है। वह न्यूरोलाजिकल डिस्आर्डर सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित है। यह एक गंभीर बीमारी है। इससे स्तुति का राइट हिस्सा काम नहीं करता है। इसके बावजूद उसने बारहवीं की परीक्षा में 82.4 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।
स्तुति के पिता डा. एके अत्री जीएमसीएच 32 के सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी हैं, जबकि उनकी मां डा. सविता अत्री पीजीआई के पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं। डा. अत्री ने अपनी बेटी की सफलता का श्रेय स्तुति की मां डा. सविता अत्री और स्कूल के टीचरों को दिया है। स्कूल की पढ़ाई के अलावा स्तुति रोजाना चार से पांच घंटे पढ़ती थीं। साथ में उसकी मां भी जुटती थी। साथ ही स्कूल के टीचरों की मेहनत को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
स्तुति की पढ़ाई के लिए अभिभावकों को सीबीएसई से सब्जेक्ट कांबिनेशन के लिए विशेष परमिशन लेनी पड़ी। हालांकि सीबीएसई के नियमों में स्पेशल चाइल्ड के लिए सब्जेक्ट कांबिनेशन के लिए विशेष छूट का प्रावधान था। इससे स्तुति की पढ़ाई की राह आसान हुई। स्तुति के सब्जेक्ट हिंदी, अंग्रेजी, सोशियोलाजी, पेंटिंग म्यूजिक थे। स्कूल की ओर से आयोजित नेशनल स्तर पर इंटर स्टेट स्कूल कंपटीशन में भी उसने नेशनल स्तर पर बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओं पर बेहतरीन अभिनय किया। डा. अत्री ने बताया कि जब वह आठ महीने की थी, तब पता चला था कि वह सीपी चाइल्ड नामक बीमारी से पीड़ित है। राइट हिस्सा खराब होने पर वह लेफ्टी बनी। सभी काम वह बाएं हाथ से करती है।
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स्तुति के पिता डा. एके अत्री जीएमसीएच 32 के सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी हैं, जबकि उनकी मां डा. सविता अत्री पीजीआई के पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं। डा. अत्री ने अपनी बेटी की सफलता का श्रेय स्तुति की मां डा. सविता अत्री और स्कूल के टीचरों को दिया है। स्कूल की पढ़ाई के अलावा स्तुति रोजाना चार से पांच घंटे पढ़ती थीं। साथ में उसकी मां भी जुटती थी। साथ ही स्कूल के टीचरों की मेहनत को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
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स्तुति की पढ़ाई के लिए अभिभावकों को सीबीएसई से सब्जेक्ट कांबिनेशन के लिए विशेष परमिशन लेनी पड़ी। हालांकि सीबीएसई के नियमों में स्पेशल चाइल्ड के लिए सब्जेक्ट कांबिनेशन के लिए विशेष छूट का प्रावधान था। इससे स्तुति की पढ़ाई की राह आसान हुई। स्तुति के सब्जेक्ट हिंदी, अंग्रेजी, सोशियोलाजी, पेंटिंग म्यूजिक थे। स्कूल की ओर से आयोजित नेशनल स्तर पर इंटर स्टेट स्कूल कंपटीशन में भी उसने नेशनल स्तर पर बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओं पर बेहतरीन अभिनय किया। डा. अत्री ने बताया कि जब वह आठ महीने की थी, तब पता चला था कि वह सीपी चाइल्ड नामक बीमारी से पीड़ित है। राइट हिस्सा खराब होने पर वह लेफ्टी बनी। सभी काम वह बाएं हाथ से करती है।
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क्या होती सीपी चाइल्ड
क्या होती सीपी चाइल्ड
सेरेब्रल पल्सी का मतलब दिमाग को लकवा मार जाना है। इसमें बच्चे के दिमाग का एक हिस्सा काम करना बंद कर देता है। धीरे-धीरे शरीर के अंग भी काम करना बंद कर देते हैं। इसे ठीक कर पाना काफी मुश्किल है, सिर्फ लंबे इलाज से ही शरीर में थोड़ा मूवमेंट लाया जा सकता है। बीमारी मेें दिमाग की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इसमें मस्तिष्क के एक या अधिक हिस्से में असामान्य विकास या क्षति होती है, जहां से मांसपेशियों का तालमेल और संचालन होता है। ये समस्या आमतौर पर नवजात या बचपन में पता चलती हैं।
सेरेब्रल पल्सी का मतलब दिमाग को लकवा मार जाना है। इसमें बच्चे के दिमाग का एक हिस्सा काम करना बंद कर देता है। धीरे-धीरे शरीर के अंग भी काम करना बंद कर देते हैं। इसे ठीक कर पाना काफी मुश्किल है, सिर्फ लंबे इलाज से ही शरीर में थोड़ा मूवमेंट लाया जा सकता है। बीमारी मेें दिमाग की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इसमें मस्तिष्क के एक या अधिक हिस्से में असामान्य विकास या क्षति होती है, जहां से मांसपेशियों का तालमेल और संचालन होता है। ये समस्या आमतौर पर नवजात या बचपन में पता चलती हैं।