फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   81 year old woman cured from Coronavirus in Mohali of Punjab

जज्बे से जीती जंग: 81 साल की उम्र, हार्ट और शुगर की मरीज, जिंदादिली से दी कोरोना को मात

Tue, 07 Apr 2020 09:07 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली ( पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली ( पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 07 Apr 2020 09:07 AM IST
विज्ञापन
81 year old woman cured from Coronavirus in Mohali of Punjab
81 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने दी कोरोना को मात।

81 साल की कुलवंत निर्मल कौर कोरोना कोविड-19 को मात देकर सकुशल होकर अपने घर लौटी हैं। यह ट्राइसिटी की सबसे बुजुर्ग कोरोना की मरीज थीं। उनका इलाज करने वाले मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल फेज-छह के डॉक्टर दीपक भसीन का कहना है कि वह काफी पॉजिटिव थीं।

विज्ञापन


उन्हें भरोसा था कि वह ठीक हो जाएंगी। इलाज करने वाली टीम में भी अपनी जिंदादिली से जोश भर देती थीं। इसी का नतीजा है कि वह सकुशल होकर घर लौटी हैं। डॉक्टर ने इस दौरान उनके इलाज से जुड़े कई पहलू भी शेयर किए।
विज्ञापन


डॉ. भसीन ने बताया कि कुलवंत कौर ने चालीस साल स्टाफ नर्स के रूप में काम किया है। वह चंडीगढ़ के सरकारी अस्पताल से रिटायर हुई थीं। उनके घर कोई विदेश से आया था। उसी के संपर्क में आने से वह कोरोना की शिकार हुई थीं। हालांकि जब यह अस्पताल पहुंची तो यह अस्पताल के लिए काफी संवेदनशील मरीज थीं। क्योंकि वह पहले ही हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज से यह पीड़ित थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


आयु 81 साल थी। कोविड के सबसे घातक लक्षण उनमें थे। रिस्क काफी था। लेकिन खुद पर भरोसे और जिंदादिली के कारण दो हफ्ते के बाद वह आखिर स्वस्थ होकर घर लौट गईं। 

सब पर लुटाया प्यार दुलार

डॉ. दीपक भसीन ने बताया कि बुजुर्ग महिला दो हफ्ते उनके अस्पताल में रहीं। इलाज की शुरूआत में उन्होंने बुजुर्ग महिला का शुगर कंट्रोल करने से लेकर अन्य दिक्कतों पर काबू किया। इसके बाद इलाज में उन्हें कोई दिक्कत नहीं आई। वह अस्पताल में बड़े प्यार से रहीं। उनकी टीम ने दो टेस्ट किए, जो निगेटिव आए। इसके बाद अब सकुशल होकर लौटी थी। 

कोरोना के लक्षण भी फ्लू की तरह ही हैं
डॉक्टर ने बताया कि बुजुर्ग महिला के बेटों को भी सेहत विभाग की तरफ से घर में क्वांरटीन करके रखा था। ऐसे में उनकी टीम कुलवंत की उनके बेटों से बात करवा देती थी। ऐसे में हौंसला अफजाई से उनका काम बढ़िया तरीके से चलता रहा। 

लॉकडाउन के पीछे ही यह है वजह
डॉक्टर भसीन के मुताबिक, अध्ययन बताता है कि 81 फीसदी लोगों को इस बीमारी से कोई दिक्कत नहीं आती है। केवल चौदह फीसदी लोगों को डॉक्टर की जरूरत पड़ती है। सांस में दिक्कत आती है। जबकि पांच फीसदी को आईसीयू की जरूरत पड़ती है। सबसे खतरनाक बात इसका एक से दूसरे व्यक्ति में फैलना है। जबकि अन्य वायरस में ऐसा नहीं होता है। जिसके चलते लॉकडाउन से लेकर अन्य कदम सरकार उठा रही है।

घर में मास्क लगाकर न रखें, हो जाएगा गला खराब
डॉ भसीन ने कहा कि जो चीजें हम बाहर से लेकर आते हैं। वे आसानी से धुल सकती हैं, उन्हें धोने में कोई दिक्कत नहीं है। जहां तक हो सके कि अपने हाथ जरूर धोने चाहिए। घर में मास्क लगाकर नहीं रहना चाहिए। उससे भी गला खराब होने की भी आशंका रहती है। बाहर जाना है तो ही मास्क पहनें व सामाजिक दूरी बनाकर चलें। हो सके तो मास्क की जगह रुमाल या कपड़े का प्रयोग करें। एक रुमाल दो से तीन दिन नहीं चलाना चाहिए बल्कि इसे रोजाना धोना चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed