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चंडीगढ़ः 600 करोड़ के पोंजी घोटाले में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी को मिली जमानत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 28 Jul 2018 10:05 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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600 करोड़ के पोंजी घोटाले में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी कमल कुमार बख्शी को शुक्रवार को जिला अदालत से जमानत मिल गई। बख्शी को पिछले साल जुलाई में ईडी ने गुरुग्राम से दबोचा था। इसके बाद ईडी ने उसे चंडीगढ़ सेक्टर-36 थाना पुलिस को सौंप दिया था। क्योंकि वह उनके एक केस में भगौड़ा था। सेशन जज ने आरोपी को 50 हजार रुपये के श्योरिटी बॉन्ड पर जमानत के आदेश दिए हैं।
इससे पहले आरोपी की ओर से दायर जमानत याचिका में दलील दी गई थी कि वह पिछले एक साल से जेल में है और ईडी मामले में चार्जशीट दायर कर चुकी है। वहीं, ट्रायल शुरू होने में अभी वक्त है। उसकी ओर से अदालत को आश्वासन दिया गया है कि वह पुलिस को पूरा सहयोग करेगा। उधर, उसकी ओर से दलील दी गई थी कि उसे केस में बलि का बकरा बनाया गया है। केस में अन्य आरोपियों में से कोई भी अब तक गिरफ्तार नहीं हुआ है। उसे कंपनी में एजेंट दिखाया गया था, लेकिन वह न तो एजेंट था और न ही उसे कंपनी में कोई पोस्ट दी गई थी।
बता दें कि पिछले साल 27 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कंपनी के सभी डायरेक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी थी। चार्जशीट में ईडी ने कंपनी के डायरेक्टरों के खिलाफ मनी लांड्रिंग अधिनियम 45 के तहत उन्हें आरोपी बनाया है। इनके खिलाफ केस में सौ के करीब गवाह बनाए गई हैं। डायरेक्टरों में मुगुनधन गंगम, सेलाथुराई भास्कर, चेलाधुरी, अमाल राज, राम कृष्णामूर्ति और कमल कुमार बख्शी के नाम शामिल हैं।
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ईडी ने आरोपियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग एक्ट 2002 के अधिनियम 3, 4 के तहत भी आरोप पत्र दायर किया था। आरोपियों में से केवल कमल बख्शी ही गिरफ्तार है। अन्य आरोपियों में से कंपनी के डायरेक्टर सेलाथुराई भास्कर, चेलाधुरी अमाल राज और राम कृष्णामूर्ति को जिला अदालत भगौड़ा घोषित कर चुकी है।
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इससे पहले आरोपी की ओर से दायर जमानत याचिका में दलील दी गई थी कि वह पिछले एक साल से जेल में है और ईडी मामले में चार्जशीट दायर कर चुकी है। वहीं, ट्रायल शुरू होने में अभी वक्त है। उसकी ओर से अदालत को आश्वासन दिया गया है कि वह पुलिस को पूरा सहयोग करेगा। उधर, उसकी ओर से दलील दी गई थी कि उसे केस में बलि का बकरा बनाया गया है। केस में अन्य आरोपियों में से कोई भी अब तक गिरफ्तार नहीं हुआ है। उसे कंपनी में एजेंट दिखाया गया था, लेकिन वह न तो एजेंट था और न ही उसे कंपनी में कोई पोस्ट दी गई थी।
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बता दें कि पिछले साल 27 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कंपनी के सभी डायरेक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी थी। चार्जशीट में ईडी ने कंपनी के डायरेक्टरों के खिलाफ मनी लांड्रिंग अधिनियम 45 के तहत उन्हें आरोपी बनाया है। इनके खिलाफ केस में सौ के करीब गवाह बनाए गई हैं। डायरेक्टरों में मुगुनधन गंगम, सेलाथुराई भास्कर, चेलाधुरी, अमाल राज, राम कृष्णामूर्ति और कमल कुमार बख्शी के नाम शामिल हैं।
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ईडी ने आरोपियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग एक्ट 2002 के अधिनियम 3, 4 के तहत भी आरोप पत्र दायर किया था। आरोपियों में से केवल कमल बख्शी ही गिरफ्तार है। अन्य आरोपियों में से कंपनी के डायरेक्टर सेलाथुराई भास्कर, चेलाधुरी अमाल राज और राम कृष्णामूर्ति को जिला अदालत भगौड़ा घोषित कर चुकी है।
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- फोटो : amar ujala
गुरुग्राम से पकड़ा गया था बख्शी
ईडी ने 29 जुलाई 2017 को पोंजी घोटाले की जांच के लिए दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में रेड की थी। इस दौरान कंपनी का एजेंट और चंडीगढ़ निवासी कमल बख्शी जो सेक्टर-36 थाना पुलिस में दर्ज एक मामले में भगौड़ा था, उसे गुरुग्राम से पकड़ा था। वह इस घोटाले में भी आरोपी है। उसके खिलाफ पानीपत और गुरदासपुर में भी केस दर्ज हैं। ईडी ने रेड के बाद आरोपी की 4.18 करोड़ रुपये की संपत्ति भी सीज की थी। वहीं, ईडी के अनुसार इस घोटाले का मास्टरमाइंड मलेएशिया निवासी मुगुनधन गंगम है और वह मलयेशिया में ही छिपा है।
यह है मामला
चंडीगढ़ बेस मलेशियाई कंपनी यूनीपेय टूयू मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और यूनीगेटवे ट्रेडिंग कंपनी एक तय फीस के बाद ऑनलाइन सदस्य बनाती थी। कंपनी उन्हें डिजिटल वॉलेट की सुविधा उपलब्ध करवाती थी। कंपनी में देशभर से हजारों लोगों ने करोड़ों रुपया लगाया था। शुरुआत में कंपनी ने लोगों को बहुत मोटा रिटर्न दिया। इससे लोगों का विश्वास कंपनी में बढ़ा तो उन्होंने और पैसा लगाया। कंपनी ने अक्तूबर 2010 में निवेशकों को महीने के महीने मिलने वाले रिटर्न को देना बंद कर दिया था। इससे निवेशकों से 600 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई।
ईडी ने 29 जुलाई 2017 को पोंजी घोटाले की जांच के लिए दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में रेड की थी। इस दौरान कंपनी का एजेंट और चंडीगढ़ निवासी कमल बख्शी जो सेक्टर-36 थाना पुलिस में दर्ज एक मामले में भगौड़ा था, उसे गुरुग्राम से पकड़ा था। वह इस घोटाले में भी आरोपी है। उसके खिलाफ पानीपत और गुरदासपुर में भी केस दर्ज हैं। ईडी ने रेड के बाद आरोपी की 4.18 करोड़ रुपये की संपत्ति भी सीज की थी। वहीं, ईडी के अनुसार इस घोटाले का मास्टरमाइंड मलेएशिया निवासी मुगुनधन गंगम है और वह मलयेशिया में ही छिपा है।
यह है मामला
चंडीगढ़ बेस मलेशियाई कंपनी यूनीपेय टूयू मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और यूनीगेटवे ट्रेडिंग कंपनी एक तय फीस के बाद ऑनलाइन सदस्य बनाती थी। कंपनी उन्हें डिजिटल वॉलेट की सुविधा उपलब्ध करवाती थी। कंपनी में देशभर से हजारों लोगों ने करोड़ों रुपया लगाया था। शुरुआत में कंपनी ने लोगों को बहुत मोटा रिटर्न दिया। इससे लोगों का विश्वास कंपनी में बढ़ा तो उन्होंने और पैसा लगाया। कंपनी ने अक्तूबर 2010 में निवेशकों को महीने के महीने मिलने वाले रिटर्न को देना बंद कर दिया था। इससे निवेशकों से 600 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई।