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सुखना लेक में मेहमान परिंदों की संख्या में 57 फीसदी गिरावट
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चंडीगढ़। सुखना लेक में प्रवासी पक्षियों (मेहमान परिंदों) की संख्या में लगातार कमी आ रही है। चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब ने रविवार को अपनी वार्षिक गणना की एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि इस साल सुखना लेक पर 24 प्रजातियों की 368 जलपक्षी आए हैं जबकि तीन साल पहले वर्ष 2018 में यह संख्या दोगुनी से ज्यादा थी। उस साल 31 प्रजातियों की 850 जलपक्षी सुखना लेक पर आए थे। इसी तरह वर्ष 2020 में 28 प्रजातियों की 734 पक्षी देखे गए थे। तीन वर्षों का आंकड़ा देखने पर पता चलता है कि सुखना में आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या में करीब 57 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बर्ड्स क्लब का कहना है कि इस गिरावट के ठोस कारणों का तो पता नहीं चला है, लेकिन एक कारण यह जरूर हो सकता है कि इस साल गर्मी जल्दी आ गई है। यह पक्षी गर्मी में नहीं टिकते हैं और अपने वास्तविक निवास पर चले जाते हैं।
आमतौर पर ये मेहमान परिंदे चीन, साइबेरिया और हिमाचल की ऊंची चोटियों से उड़कर चंडीगढ़ आते हैं। जब ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ जमने लगती है तो ये पक्षी उन इलाकों की ओर आते हैं, जहां ठंड कम पड़ रही हो और भोजन की भी व्यवस्था हो। बर्ड्स क्लब के पदाधिकारियों ने बताया कि वह अपनी रिपोर्ट चंडीगढ़ पर्यावरण विभाग को सौंपेंगे। साथ ही कम होते प्रवासी पक्षियों की संख्या के कारणों की वैज्ञानिक जांच करने की सिफारिश करेंगे। चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब के बर्ड वॉचर हर साल चंडीगढ़ व आसपास के इलाकों में आने वाले प्रवासी पक्षियों की स्वैच्छिक गणना करते हैं। इसका मकसद शहरवासियों व प्रशासन को पर्यावरण व पक्षियों के प्रति जागरूक करना है। बर्ड्स क्लब के साथ 70 से ज्यादा बर्ड वॉचर जुड़े हैं।
सबसे ज्यादा जलपक्षी घग्गर में मिले
यह पहली बार है जब चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब ने सुखना के अलावा तीन और जलस्रोत पर प्रवासी पक्षियों की गणना की। चारों जलस्रोतों में कुल 2040 जलपक्षी देखे गए हैं। इनमें मोटेमाजरा में 688, घग्गर में 911, धनास में 73 और सुखना लेक में 368 पक्षी मिले हैं। इसके अलावा पेड़ों व जमीन में रहने वाले पक्षियों की कुल 46 प्रजातियां मिली हैं। बर्ड्स क्लब के अध्यक्ष एमएस सेखों ने बताया कि अब हर साल इन जलस्रोतों में आने वाले जलपक्षी की भी गणना होगी, ताकि पता चल सके कि सुखना के पक्षी कम हो रहे हैं या इन जलस्रोतों के भी।
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प्रवासी पक्षी के कम आने के ये कारण हो सकते हैं
सुखना लेक का इको संतुलन का बिगड़ना
अचानक से मौसम में गर्मी का बढ़ना
लेक में पानी के स्तर का बढ़ना
जलवायु परिवर्तन से होने वाला प्रभाव
क्या कहते हैं अधिकारी
पिछले कुछ सालों के दौरान सुखना लेक में प्रवासी पक्षियों की संख्या में काफी कमी आई है। इन कारणों को जानने के लिए शोध की जरूरत है। हम अपनी रिपोर्ट जल्द ही चंडीगढ़ पर्यावरण विभाग को सौंपेंगे। साथ ही सिफारिश करेंगे कि वे विशेषज्ञों के पैनल से इसकी जांच करवाएं कि आखिर लेक पर पक्षियों का आना क्यों कम हो रहा है।
-एमएस सेखों, प्रेसिडेंट चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब
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आमतौर पर ये मेहमान परिंदे चीन, साइबेरिया और हिमाचल की ऊंची चोटियों से उड़कर चंडीगढ़ आते हैं। जब ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ जमने लगती है तो ये पक्षी उन इलाकों की ओर आते हैं, जहां ठंड कम पड़ रही हो और भोजन की भी व्यवस्था हो। बर्ड्स क्लब के पदाधिकारियों ने बताया कि वह अपनी रिपोर्ट चंडीगढ़ पर्यावरण विभाग को सौंपेंगे। साथ ही कम होते प्रवासी पक्षियों की संख्या के कारणों की वैज्ञानिक जांच करने की सिफारिश करेंगे। चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब के बर्ड वॉचर हर साल चंडीगढ़ व आसपास के इलाकों में आने वाले प्रवासी पक्षियों की स्वैच्छिक गणना करते हैं। इसका मकसद शहरवासियों व प्रशासन को पर्यावरण व पक्षियों के प्रति जागरूक करना है। बर्ड्स क्लब के साथ 70 से ज्यादा बर्ड वॉचर जुड़े हैं।
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सबसे ज्यादा जलपक्षी घग्गर में मिले
यह पहली बार है जब चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब ने सुखना के अलावा तीन और जलस्रोत पर प्रवासी पक्षियों की गणना की। चारों जलस्रोतों में कुल 2040 जलपक्षी देखे गए हैं। इनमें मोटेमाजरा में 688, घग्गर में 911, धनास में 73 और सुखना लेक में 368 पक्षी मिले हैं। इसके अलावा पेड़ों व जमीन में रहने वाले पक्षियों की कुल 46 प्रजातियां मिली हैं। बर्ड्स क्लब के अध्यक्ष एमएस सेखों ने बताया कि अब हर साल इन जलस्रोतों में आने वाले जलपक्षी की भी गणना होगी, ताकि पता चल सके कि सुखना के पक्षी कम हो रहे हैं या इन जलस्रोतों के भी।
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प्रवासी पक्षी के कम आने के ये कारण हो सकते हैं
सुखना लेक का इको संतुलन का बिगड़ना
अचानक से मौसम में गर्मी का बढ़ना
लेक में पानी के स्तर का बढ़ना
जलवायु परिवर्तन से होने वाला प्रभाव
क्या कहते हैं अधिकारी
पिछले कुछ सालों के दौरान सुखना लेक में प्रवासी पक्षियों की संख्या में काफी कमी आई है। इन कारणों को जानने के लिए शोध की जरूरत है। हम अपनी रिपोर्ट जल्द ही चंडीगढ़ पर्यावरण विभाग को सौंपेंगे। साथ ही सिफारिश करेंगे कि वे विशेषज्ञों के पैनल से इसकी जांच करवाएं कि आखिर लेक पर पक्षियों का आना क्यों कम हो रहा है।
-एमएस सेखों, प्रेसिडेंट चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब