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Chandigarh News: उठान न होने से अनाज मंडी में पड़ा 50 हजार क्विंटल गेहूं
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चंडीगढ़। सेक्टर-39 स्थित अनाज मंडी में गेहूं की आवक बंद हो गई है। वहीं, एफसीआई ने मंडी में आए शत प्रतिशत माल की खरीद कर ली है। इसके बाद भी मंडी से उठान नहीं हो रहा है। इस समय मंडी में गेहूं की एक लाख से ज्यादा बोरियां पड़ी हुई हैं, जिसमें लगभग 50 हजार क्विंटल गेहूं है। एफसीआई फसल की खरीद करने के बावजूद उसका उठान सुनिश्चित नहीं करवा पा रहा है। इससे आढ़ती काफी चिंतित हैं।
मंडी के आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुशील मित्तल ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में गेहूं की क्वालिटी तो काफी अच्छी थी लेकिन फसल के दौरान हुई ओलावृष्टि के कारण इस बार बीते वर्ष की तुलना में आवक लगभग 25 प्रतिशत कम रही। इसलिए खरीद की प्रक्रिया तय समय से पहले ही पूरी हो गई है।
उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर मंडी में गेहूं की खरीद बिक्री अप्रैल से शुरू होकर मई के पहले हफ्ते तक चलती है। आवक कम होने के कारण इस बार समय सीमा कम कर दी गई।
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वहीं, सुशील मित्तल का कहना है कि एफसीआई इस बार भी पिछले वर्ष की तरह माल खरीदने के बाद उसका उठान सुनिश्चित नहीं करवा रहा है। ऐसे में बार-बार खराब होते मौसम के कारण माल की सुरक्षा को लेकर काफी चिंता हो रही है। फिलहाल तिरपाल लगाकर गेहूं की बोरियों को पानी और ओले से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एफसीआई के अधिकारियों से जब भी माल उठान से संबंधित बात की जा रही है तो वह अगले दिन पर उसे टाल दे रहे हैं।
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मंडी के आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुशील मित्तल ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में गेहूं की क्वालिटी तो काफी अच्छी थी लेकिन फसल के दौरान हुई ओलावृष्टि के कारण इस बार बीते वर्ष की तुलना में आवक लगभग 25 प्रतिशत कम रही। इसलिए खरीद की प्रक्रिया तय समय से पहले ही पूरी हो गई है।
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उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर मंडी में गेहूं की खरीद बिक्री अप्रैल से शुरू होकर मई के पहले हफ्ते तक चलती है। आवक कम होने के कारण इस बार समय सीमा कम कर दी गई।
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वहीं, सुशील मित्तल का कहना है कि एफसीआई इस बार भी पिछले वर्ष की तरह माल खरीदने के बाद उसका उठान सुनिश्चित नहीं करवा रहा है। ऐसे में बार-बार खराब होते मौसम के कारण माल की सुरक्षा को लेकर काफी चिंता हो रही है। फिलहाल तिरपाल लगाकर गेहूं की बोरियों को पानी और ओले से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एफसीआई के अधिकारियों से जब भी माल उठान से संबंधित बात की जा रही है तो वह अगले दिन पर उसे टाल दे रहे हैं।