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Hindi News ›   Chandigarh ›   4527 crore of rural development fund not deposited in government treasury in Haryana

कैग रिपोर्ट: सरकारी खजाने में जमा नहीं किए ग्रामीण विकास निधि के 4527 करोड़, जांच रिपोर्ट में उठे सवाल, गड़बड़ी की आशंका

Sat, 18 Dec 2021 11:56 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sat, 18 Dec 2021 11:56 PM IST
सार

सरकारी खजाने में ग्रामीण विकास निधि के 4527 करोड़ जमा नहीं किए गए। राशि सीधे खर्च करने से गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। 

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4527 crore of rural development fund not deposited in government treasury in Haryana
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

हरियाणा ग्रामीण विकास निधि में एकत्रित राशि सरकारी खजाने में जमा कराए बिना ही खर्च की जा रही है। 2011-19 के बीच जमा 4527 करोड़ रुपये सरकार की समेकित निधि में जमा ही नहीं किए गए। इनमें से 4046 करोड़ रुपये की राशि हरियाणा ग्रामीण विकास निधि प्रशासन बोर्ड ने खर्च भी डाली। कर निर्धारण अधिकारियों की लापरवाही से भी सरकार को 1422 करोड़ की चपत लगी है।

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यह खुलासा कैग की जांच रिपोर्ट में हुआ है। शुक्रवार देर शाम विधानसभा में रिपोर्ट सदन पटल पर रखी गई। जांच रिपोर्ट में प्रधान महालेखाकार लेखापरीक्षा हरियाणा विशाल बंसल ने गंभीर सवाल उठाए हैं। साथ ही सरकार से अनेक सिफारिशें की हैं। राशि सीधे खर्च करने में गड़बड़ी से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
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ग्रामीण विकास निधि की राशि बाजार में खरीदे, बेचे या प्रोसेसिंग के लिए लाए गए कृषि उत्पादों पर दो प्रतिशत उपकर से एकत्रित होती है। ये गांवों में सड़कों के विकास, डिस्पेंसरियों की स्थापना, जलापूर्ति, स्वच्छता प्रबंधन व गोदामों के निर्माण पर खर्च किया जाता है। खर्च राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र भी समय से नहीं दिए गए।
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कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि समेकित निधि में हजारों करोड़ रुपये जमा किए बिना सीधे खर्च करना पंजाब खजाना नियमों और संविधान के अनुच्छेद 266-1 का उल्लंघन है। इसके अनुसार पहले ये राशि सरकारी खजाने में जमा होगी और उसके बाद खर्च की जाएगी। लेकिन, ऐसा न होने पर तेरहवें वित्त आयोग ने भी चिंता जताई है।

163 इकाइयों से कम वसूले

रिपोर्ट में कहा गया है कि कर निर्धारण अधिकारियों ने बिक्री कर, वैट, राज्य उत्पाद शुल्क, स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस के 163 इकाईयों के 2805 मामलों में 2019-20 के दौरान 1422 करोड़ रुपये की राशि कम वसूली। कर निर्धारण अधिकारी अंतरराज्यीय खरीद, माल आयात करने व अपंजीकृत डीलर्स से ये 4.98 करोड़ रुपये कर वसूलने में नाकाम रहे। डीलर्स को खरीद का सत्यापन किए बिना इनपुट क्रेडिट टैक्स के लाभ की मंजूरी दे दी। अन्य राज्यों से हुई खरीद पर टर्नओवर छिपाया गया था, उस पर भी कार्रवाई नहीं की।

डीईटीसी ने ठेकों पर नहीं की कार्रवाई

उप आबकार एवं कराधान आयुक्त आबकारी ने समय पर मासिक किश्त जमा नहीं करने पर न तो ठेकों को सील करने के लिए कोई कार्रवाई शुरू की न ही लाइसेंस शुल्क का देरी से भुगतान करने पर 1.61 करोड़ रुपये का ब्याज वसूला। इससे सरकार को राजस्व में चपत लगी। स्टांप शुल्क वसूलने में भी गड़बड़ी की गई है। पंजीकरण अधिकारियों ने नगरपालिका की सीमाओं के अंदर आने वाले 1000 वर्ग गज से कम क्षेत्र वाले 16 प्लाट के बिक्री आलेखों का निर्धारण आवासीय भूमि की बजाय कृषि भूमि के लिए निर्धारित दरों पर किया। इससे 39 लाख रुपये की राजस्व हानि हुई।

प्रधान महालेखाकार ने ये की सिफारिशें

  • ग्रामीण विकास निधि के संग्रहण व उपयोग के लिए उचित लेखांकन प्रक्रिया निर्धारित की जाए। इससे राज्य के लेखों का डाटा आसानी से मिल सकेगा
  • सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति की जाए
  • ग्रामीण विकास व अन्य निधियों के खातों में गैर जरूरी तरीके से पड़ी राशि को वित्त विभाग समेकित निधि में जमा कराए, नियमों का पालन न करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करें
  • वित्तीय हानि, राशि का दुरुपयोग व चोरी के मामलों में कड़ी कार्रवाई के लिए आंतरिक नियंत्रण प्रणाली मजबूत की जाए
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