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Haryana News: पांच लाख बच्चों का भविष्य खराब होने का खतरा, प्रदेश में बंद होने की कगार में 4338 निजी स्कूल

Thu, 15 Dec 2022 07:47 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 15 Dec 2022 07:47 PM IST
सार

सरकार के कड़े रुख को देखते हुए गुरुवार को निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने आगे की रणनीति बनाई।

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4338 private schools on verge of close due to not get extension in Haryana
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा के 4338 निजी स्कूल एक साल की एक्सटेंशन न मिलने पर बंद होने की कगार पर हैं। इनमें 3000 स्कूल गैर मान्यता और 1338 स्कूल अस्थायी मान्यता प्राप्त हैं। इन स्कूलों के पांच लाख बच्चों पर भविष्य खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। बीते साल एक्सटेंशन देते समय ही सरकार ने साफ कर दिया था कि यह अंतिम बार है।

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इनमें से 3000 स्कूलों को तो स्कूल शिक्षा विभाग ने इग्जिस्टिंग यानी विद्यमान सूची में ही शामिल नहीं किया है। इन स्कूलों के पास विभाग के मानदंड पूरा करने के लिए एक साल का समय था लेकिन ये नहीं कर पाए। सरकार के कड़े रुख को देखते हुए गुरुवार को निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने आगे की रणनीति बनाई।
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प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार को नियमों में राहत प्रदान करते हुए इन स्कूलों को स्थायी मान्यता देनी चाहिए। सरकार एक साल की और एक्सटेंशन देते हुए पांच लाख बच्चों का भविष्य बर्बाद होने से बचाए। कोरोना महामारी की चपेट में आने के बाद स्कूल आर्थिक मंदी से निकलने की कोशिश कर रहे थे लेकिन सरकार ने मान्यता की अवधि न बढ़ाकर तगड़ा झटका दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में भी आरटीई के नियमों का पालन कराए। सैकड़ों स्कूलों के पास पर्याप्त कमरे, फायर व भवन सेफ्टी सर्टिफिकेट तक नहीं हैं। पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जमीन के मानक भी स्कूल पूरा नहीं करते।
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उन्होंने निजी स्कूलों में दाखिलों को लेकर भी भेदभाव करने का आरोप लगाया। शर्मा ने कहा कि सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन दाखिला होने पर ओटीपी स्कूल मुखिया के फोन पर आता है, जबकि निजी स्कूलों में प्रवेश पर ओटीपी अभिभावकों के फोन पर जाता है। इससे निजी स्कूलों को दाखिला देने में दिक्कत हो रही है। यह प्रक्रिया एक समान होनी चाहिए। 4338 स्कूलों को एक साल की एक्सटेंशन देने के साथ सरकार भेदभाव भी खत्म करे, अन्यथा निजी स्कूल आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

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