Haryana News: भ्रष्टाचार के 313 केस पांच साल से लंबित, मुख्य सचिव अफसरों से नाराज
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभागीय कार्रवाई, जुर्माना लगाने के साथ ही विजिलेंस ब्यूरो की सतर्कता विभाग व मुख्यमंत्री को अनुमोदित रिपोर्ट के मामलों में त्वरित कार्रवाई करें।
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हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में अफसरों के ढुलमुल रवैये पर सरकार सख्त हो गई है। भ्रष्टाचार से जुड़े 313 केस पांच साल से लंबित होने पर मुख्य सचिव संजीव कौशल ने नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रशासनिक सचिवों के पेंच कसते हुए लंबित मामलों को जल्द निपटाकर सरकार को रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
कौशल ने मंगलवार को यहां विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिवों के साथ विजिलेंस की ओर से विभागों को भेजे मामलों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से केवल मुख्य सतर्कता अधिकारी से ही करवाई जाने वाली जांच के विभिन्न विभागों में 195 मामले लंबित हैं।
विजिलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभागों की ओर से 118 मामलों में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सभी विभाग ऐसे मामलों में अपने स्तर पर जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करें। 2018 के लंबित मामलों को पहले निपटाएं। विभागों में मुख्य सतर्कता और उप सतर्कता अधिकारी नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभागीय कार्रवाई, जुर्माना लगाने के साथ ही विजिलेंस ब्यूरो की सतर्कता विभाग व मुख्यमंत्री को अनुमोदित रिपोर्ट के मामलों में त्वरित कार्रवाई करें। पहले कुछ अधिकारी भ्रष्टाचार के मामलों को दबा लेते थे और कार्रवाई में देरी होती थी। अब ऐसा नहीं है, खुद मुख्यमंत्री समीक्षा करते हैं।
पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे एटीआर
भ्रष्टाचार के मामलों में एक्शन टेकर रिपोर्ट (एटीआर) अपलोड करने के लिए जल्दी पोर्टल विकसित किया जाएगा। इससे रियल टाइम डाटा उपलब्ध होगा। सेवानिवृत आईएएस, केंद्रीय और स्टेट सर्विस में रहे अधिकारियों को मुख्य सतर्कता, उप सतर्कता अधिकारी लगाने के लिए मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। ये अधिकारियों के नाम शॉर्टलिस्ट करेगी। सीवीओ को संबंधित विभाग से बाहर भी स्टाफ चुनने का अधिकार होगा।
विजिलेंस भेज रहा चार तरह की शिकायतें
- पहली: वे शिकायतें, जिन पर संबंधित विभाग के प्रशासनिक गंभीरता के अनुरूप कार्रवाई करने का निर्णय ले सकते हैं।
- दूसरी: ऐसे मामले, जिनकी जांच केवल सीवीओ से ही करवानी अनिवार्य होती है।
- तीसरी: विभागीय स्तर पर जांच कर र्कारवाई की एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजना।
- चौथी: विजिलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट पर संबंधित विभाग की तरफ से होने वाली कार्रवाई।