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धर्मपाल की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली

Tue, 21 Apr 2015 01:57 PM IST
सुरजीत सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरजीत सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 21 Apr 2015 01:57 PM IST
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3 murder accused dharampal death sentence turned into life imprisonment

हरियाणा में सोनीपत के गांव शाहपुर तुर्क निवासी धर्मपाल पुत्र चन्द्र सिंह की फांसी की सजा को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उम्र कैद में बदल दिया है। अप्रैल 2013 में राष्ट्रपति ने उनको माफी देने की अर्जी को ठुकरा दिया था। धर्मपाल पर आरोप है कि उसने रेप के एक मामले में जमानत पर आने के बाद 5 लोगों की हत्या कर दी।

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इस मामले में थाना सदर सोनीपत ने भादंसं की धारा 302/34 के अन्तर्गत 10 जून 1993 को मामला दर्ज किया था। करीबन साढ़े तीन साल बाद 5 मई 1997 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने धर्मपाल को फांसी की सजा सुनाई थी। इस मामले में धर्मपाल की याचिका को 29 सितबर 1998 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
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इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी 18 मार्च 1999 को अपील खारिज कर दी। अर्थात कानून की नजर में धर्मपाल की फांसी पर अन्तिम मुहर लग गई। इसके बाद शुरू हुआ दया याचिका का सिलसिला। हरियाणा के राज्यपाल ने भी धर्मपाल की दया याचिका को खारिज कर दिया।
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धर्मपाल इसके बाद पहुंचा राष्ट्रपति के द्वार। 7 फरवरी 2000 को धर्मपाल ने राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दायर की थी, जिसे अप्रैल 2013 में ठुकरा दिया गया। मामला इसके बाद हाईकोर्ट में चल रहा था।

अन्य फैसले का हवाला देते हुए की थी याचिका दायर

3 murder accused dharampal death sentence turned into life imprisonment

धर्मपाल ने याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा त्रिवेणी बेन बनाम गुजरात सरकार एवं अन्य के मामले के फैसले का हवाला देते हुए फांसी की सजा को उम्रकैद में बदले जाने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने त्रिवेणी मामले में अपने फैसले में कहा था कि यदि फांसी की सजा के मामले में दया याचिका पर लंबे समय तक फैसला नहीं होता तो दोषी फांसी की सजा उम्रकैद में बदले जाने की मांग कर सकता है।

धर्मपाल ने अपनी याचिका में कहा था कि उसकी दया याचिका भी १४ साल तक राष्ट्रपति के पास लंबित रही, इसलिए उसकी  सजा को उम्रकैद में तबदील किया जाए।

इस दलील के बाद छह अप्रैल २०१३ को हाईकोर्ट ने उसकी फांसी पर रोक लगाई थी और इसी रोक को सोमवार को भी जारी रखा गया है।

यह था मामला

3 murder accused dharampal death sentence turned into life imprisonment

सोनीपत के शाहपुर तुर्क गांव में 10 जून 1993 को धर्मपाल पुत्र चंद्र सिंह ने अपने भाई निर्मल के साथ मिलकर गांव के तालेराम, उसकी पत्‌नी कृष्णा, बेटी नीलम, बेटे प्रवीन व टीनू की तेजधार हथियार से हत्या कर दी थी।

धर्मपाल पर तालेराम की एक बेटी के साथ जनवरी, 1991 में दुष्कर्म करने का आरोप लगा था, जिसमें उसे सेशन कोर्ट ने दस वर्ष की सजा सुनाई थी। बाद में पैरोल पर वह 4 जून, 1993 को जेल से बाहर आया था।

धर्मपाल ने 9 जून की रात को नृशंस हत्याकांड को अंजाम दिया था। 10 जून को उसके खिलाफ सोनीपत के सदर थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया था।

इस मामले में 18 मार्च 1999 को सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी फांसी की सजा बरकरार रखी थी। जिसके बाद उसने राष्ट्रपति से सजा माफी की गुहार लगाई थी। धर्मपाल के पिता चंद्र सिंह ने पुनर्विचार की गुहार लगाई है।

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