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जिस चार्टर्ड प्लेन से भेजे गए थे 3.5 करोड़, उस कंपनी पर बड़ी कार्रवाई
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला कैंट(हरियाणा)
Updated Sat, 24 Dec 2016 10:01 AM IST
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प्लेन के जरिए ट्रांसफर की गई करोड़ों की पुरानी करेंसी
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जिस चार्टर्ड प्लेन से हिसार से दीमापुर साढ़े 3 करोड़ की पुरानी करेंसी भेजी गई थी, उस कंपनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) ने चार्टर्ड प्लेन कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया है। अब कंपनी का कोई भी प्लेन उड़ान नहीं भर सकेगा।
बीसीएएस ने मंगलवार को यह फैसला लिया। बीसीएस ने कहा कि चार्टर्ड प्लेन के पायलेट को रुपयों से भरे बैगों को चेक कर एयर ट्रैफिक कंट्रोल को जानकारी देने चाहिए थी। पायलेट ने बैग चेक किया था और उसे पता था कि बैग में 1000-500 की पुरानी करेंसी है।
बावजूद इसके एयर ट्रैफिक कंट्रोल को जानकारी नहीं दी गई। गौरतलब है कि 8 से 22 नवंबर तक कंपनी के 3 चार्टर्ड प्लेन ने उड़ान भरी थी। इस घटना के बाद हरियाणा सरकार ने हिसार से उड़ने वाली हर फ्लाइट की जांच के आदेश जारी किए थे।
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22 नवंबर को साढ़े तीन करोड़ की करेंसी दीमापुर भेजी गई थी। जिसे बाद में आयकर विभाग ने जब्त कर लिया था। हिसार से दीमापुर भेजी गई कुल साढ़े 11 करोड़ की करेंसी बरामद की गई थी।
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बीसीएएस ने मंगलवार को यह फैसला लिया। बीसीएस ने कहा कि चार्टर्ड प्लेन के पायलेट को रुपयों से भरे बैगों को चेक कर एयर ट्रैफिक कंट्रोल को जानकारी देने चाहिए थी। पायलेट ने बैग चेक किया था और उसे पता था कि बैग में 1000-500 की पुरानी करेंसी है।
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बावजूद इसके एयर ट्रैफिक कंट्रोल को जानकारी नहीं दी गई। गौरतलब है कि 8 से 22 नवंबर तक कंपनी के 3 चार्टर्ड प्लेन ने उड़ान भरी थी। इस घटना के बाद हरियाणा सरकार ने हिसार से उड़ने वाली हर फ्लाइट की जांच के आदेश जारी किए थे।
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22 नवंबर को साढ़े तीन करोड़ की करेंसी दीमापुर भेजी गई थी। जिसे बाद में आयकर विभाग ने जब्त कर लिया था। हिसार से दीमापुर भेजी गई कुल साढ़े 11 करोड़ की करेंसी बरामद की गई थी।
कंपनी ने मामले में यह तर्क दिया
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कंपनी ने अपने बयान में कहा कि पायलेट को टॉयलेट जाना पड़ा था। इसलिए वह एयरट्रैफिक कंट्रोल को जानकारी नहीं दे पाया। एयरक्राफ्ट कंपनी के चीफ मानव सिंह के अनुसार वह यात्रियों को नहीं जानता था और न ही कभी उनसे मिला था। उनके स्टाफ का भी कोई सदस्य उन्हें नहीं जानता था।
उन्होंने कहा कि हमारे ऑपरेशनल विभाग ने हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल एविएशन से क्लियरेंस ली थी, जिसके बाद सिक्योरिटी उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी उसकी थी। पायलेट को करेंसी बैग में रखी थी इसका तो पता था।
लेकिन कितनी मात्रा में है, टैक्स आदि देना है या टैक्स फ्री है, इसकी जानकारी नहीं थी। कंपनी के मुताबिक उन्हें बताया गया था कि यह पैसा दीमापुर के बैंक में जमा करवाया जाना है। जो टैक्स फ्री दायरे में आता है।
हमारे पास लाइसेंस रद्द होने या अन्य प्रकार की कोई सूचना नहीं है।
- कैप्टन शैलेंद्र हुड्डा, इंचार्ज, हिसार एयरड्रोम
उन्होंने कहा कि हमारे ऑपरेशनल विभाग ने हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल एविएशन से क्लियरेंस ली थी, जिसके बाद सिक्योरिटी उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी उसकी थी। पायलेट को करेंसी बैग में रखी थी इसका तो पता था।
लेकिन कितनी मात्रा में है, टैक्स आदि देना है या टैक्स फ्री है, इसकी जानकारी नहीं थी। कंपनी के मुताबिक उन्हें बताया गया था कि यह पैसा दीमापुर के बैंक में जमा करवाया जाना है। जो टैक्स फ्री दायरे में आता है।
हमारे पास लाइसेंस रद्द होने या अन्य प्रकार की कोई सूचना नहीं है।
- कैप्टन शैलेंद्र हुड्डा, इंचार्ज, हिसार एयरड्रोम