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चंडीगढ़ को मिला उत्तर भारत का पहला बुजुर्गों का अस्पताल, ये होंगी खासियतें, 250 होंगे बेड

Sat, 02 Mar 2019 11:54 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 02 Mar 2019 11:54 AM IST
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250 beds hospital approved for elderly in PGI chandigarh
pgi chandigarh

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में पीजीआई में बनने वाले जेरिएट्रिक हास्पिटल (बुजुर्गों के लिए अस्पताल) एवं पुनर्वास केंद्र को मंजूरी मिल गई है। करीब 469 करोड़ रुपये से बनने वाले इस प्रोजेक्ट का लाभ चंडीगढ़ सहित आसपास के प्रदेशों की करीब दस करोड़ की आबादी को मिलेगा। 

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इस विशेष सेंटर में बुजुर्ग मरीजों के लिए ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू, वेंटिलेटर और डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ होगा, जो बुजुर्गों के लिए विशेष तौर पर ट्रेंड होगा। इसमें 60 साल से ऊपर के लोगों को दाखिल किया जाएगा और उन्हें सस्ती दरों में उच्च श्रेणी का इलाज मुहैया करवाया जाएगा।
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इसलिए जरूरी है यह हास्पिटल
पीजीआई ने अपने प्रस्ताव में बताया था कि भारत सहित पूरे विश्व में बुजुर्गों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इनकी उम्र और संख्या बढ़ने से बीमारों की संख्या भी बढ़ी है। वृद्धों को खासतौर पर हाइपरटेंशन, मोतियाबिंद, आस्टियो अर्थराइटिस, पल्मोनेरी डिजीज, डिप्थीरिया, डिप्रेशन सहित कई बीमारियों का खतरा रहता है। साल 2001 में भारत में 77 मिलियन आबादी बुजुर्गों की थी, जो साल 2021 में बढ़कर 144 मिलियन पहुंचने की संभावना है। 
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पीजीआई की ओपीडी और आईपीडी में भी बुजुर्ग मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। साल 2014 में एक लाख 72 हजार वृद्ध मरीज आए थे, जबकि साल 2017 में यह संख्या बढ़कर तीन लाख 37 हजार पहुंच गई। इसी तरह से आईपीडी में साल 2014 में 6443 मरीज दाखिल हुए थे, जो साल 2017 में बढ़कर 8891 पहुंच गई।

250 beds hospital approved for elderly in PGI chandigarh
pgi chandigarh

इस पूरे रीजन में ऐसा कोई हास्पिटल भी नहीं था, जो सिर्फ बुजुर्गो के लिए समर्पित हो। इस स्थिति में एक ऐसे सेंटर की जरूरत महसूस की गई, जहां एक छत के नीचे डॉक्टर, जांच, वार्ड और पुर्नवास केंद्र की व्यवस्था हो।

250 बेड का होगा हास्पिटल
पीजीआई का जेरिएट्रिक हास्पिटल उत्तर भारत का पहला सेंटर होगा, जहां सिर्फ बुजुर्गों के लिए 250 बेड रिजर्व किए जाएंगे। इसमें करीब 469.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जिसमें 291 करोड़ रुपए बिल्डिंग के निर्माण पर, 90 करोड़ हास्पिटल के उपकरण खरीदने में और करीब 88 करोड़ रुपये मेनपावर में खर्च आएंगे। शिलान्यास के बाद इसके निर्माण में करीब 39 महीने लगेंगे। इसके अतिरिक्त इसमें डॉक्टर और नर्सेज को ट्रेंड भी किया जाएगा।

इन अधिकारियों की वजह से मिला सेंटर 
जेरिएट्रिक हास्पिटल (बुजुर्गों के लिए हास्पिटल) एवं पुनर्वास केंद्र के प्रस्ताव बनाने से लेकर उसकी मंजूरी मिलने तक पीजीआई के अधिकारियों ने काफी कड़ी मेहनत की। इसका पूरा श्रेय डायरेक्टर प्रो. जगतराम और डिप्टी डायरेक्टर अमिताभ अवस्थी को जाता है।  दरअसल जब इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव बन रहा था तो उस समय पीजीआई के कई प्रोजेक्ट पाइपलाइन में थे, जिनकी कास्ट भी 400 करोड़ के आसपास थी।

इनमें न्यूरो साइंस सेंटर, मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर और 50 एकड़ जमीन शामिल थी। इसके साथ-साथ 250 बेड हास्पिटल का प्रोजेक्ट भी शामिल था। इस स्थिति में इस प्रोजेक्ट को पास कराना असंभव कार्य था।

यह बहुत खुशी की बात है कि केंद्र सरकार ने जेरिएट्रिक सेंटर बनाने की मंजूरी दे दी है। इस सेंटर में सीनियर सिटीजन को उच्च कोटि और सस्ता इलाज मिलेगा। जिससे उनका जीवन अच्छा बीतेगा। यह हमारा ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके लिए मैं भारत सरकार को धन्यवाद करता हूं। प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई

यह सेंटर पूरे उत्तर भारत को कवर करेगा। इस सेंटर में बुजुर्गों के इलाज के लिए ट्रेंड डॉक्टर व स्टाफ होंगे। अभी इलाज के लिए बुजुर्गों को एक से दूसरे डिपार्टमेंट में जाना पड़ता है। इस सेंटर के निर्माण के बाद उन्हें एक छत के नीचे सारी सुविधाएं मिलेंगी। 469 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में 250 बेड होंगे, जो सिर्फ बुजुर्गों के लिए होंगे। अमिताभ अवस्थी, डिप्टी डायरेक्टर पीजीआई

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