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पंजाब: गांवों की भी खराब हो रही आबोहवा, 24 मशीनें छह जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जांच में जुटी

अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 26 Oct 2020 11:13 AM IST
Punjab News: 24 machines installed in villages of Punjab for air quality testing
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) शहरी क्षेत्रों के बाद अब गांवों की आबोहवा की जांच रहा है। इसके लिए बोर्ड की ओर से 48 नई मैनुअल हाई वॉल्यूम सैंपलर (एचवीएस) मशीनें लगाई हैं। इनमें 24 मशीनों को राज्य के गांवों में स्थापित किया गया है। ये मशीनें फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का, पटियाला, संगरूर और बरनाला जिलों के गांवों में लगी हैं।

 

इससे जो आंकड़े आ रहे हैं वह बेहद चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों की प्राथमिक जांच में शहरों के साथ ही गांवों का भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) स्तर बढ़ रहा है। पंजाब में लगातार पराली जलाने की घटनाओं को लेकर पीपीसीबी के अधिकारी चिंतित हैं। पराली से शहरी क्षेत्रों की हवा का स्तर लगातार गिर रहा है। अब तक सूबे के सात शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के स्तर को जानने के लिए एक्यूआई मशीनें लगाई गई थीं। इनमें अमृतसर, बठिंडा, जालंधर, खन्ना, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़ और पटियाला शामिल हैं।



पराली का धुआं है प्रमुख कारण
पंजाब में पराली जलाने के मामलों की संख्या में कोई गिरावट नहीं आ रही है। राज्य में अब तक 11000 से अधिक पराली जलाने के मामले सामने आ चुके हैं। पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने के मामलों की यह संख्या दोगुनी से भी अधिक है। अभी तक अमृतसर, फिरोजपुर, तरनतारन में सबसे अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। पठानकोट जिले में सबसे कम मामले आए हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पराली का धुआं इसमें प्रमुख कारण है।

क्या होता है एचवीएस
हाई वॉल्यूम सैंपलर (एचवीएस) में वायु की गुणवत्ता जांचने के लिए तीन सैंपल लिए जाते हैं। पहला सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) दूसरा एसओटू और तीसरा नाइट्रोजनल ऑक्साइड (एनओएक्स)। वहीं, एक्यूआई मशीन में इसके मुकाबले चार सैंपल अधिक होते हैं।

शहरों में बढ़ते एक्यूआई स्तर के बाद राज्य के गांवों की दूषित हो रही हवा को सुधारने के लिए यह प्रयास किए गए हैं। आंकड़े आने शुरू हो चुके हैं, विशेषज्ञ इन पर काम कर रहे हैं। जल्द ही गांवों में वायु की दूषित हवा को प्रभावित करने वाले कारकों पर चर्चा की जाएगी। - करुणेश गर्ग, मेंबर सेक्रेटरी, पीपीसीबी

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