अनदेखी: चंडीगढ़ में कोरोना टीके की 23 हजार से ज्यादा खुराक बर्बाद, 12 से 14 साल के बच्चों को लगने वाले टीके की ज्यादा बर्बादी
विशेषज्ञों का कहना है कि टीके के महत्व को समझकर उसकी एक-एक खुराक का उपयोग किया जाना बेहद जरूरी है क्योंकि टीके की प्रतिरक्षा क्षमता तय समय के लिए ही है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना से बचाव के लिए चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान में अब तक चंडीगढ़ में टीके की 23737 खुराक बर्बाद हो चुकी हैं। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो इसमें परिणाम के आधार पर 12 से 14 साल तक के बच्चों को लगाए जाने वाले टीके का नुकसान सबसे ज्यादा हुआ है। वहीं वयस्कों के अभियान में नुकसान का प्रतिशत सबसे कम रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टीके के महत्व को समझकर उसकी एक-एक खुराक का उपयोग किया जाना बेहद जरूरी है क्योंकि टीके की प्रतिरक्षा क्षमता तय समय के लिए ही है। उसके बाद बूस्टर या प्रिकॉशन डोज लगवानी ही होगी। ऐसे में अगर उसे ऐसे ही बर्बाद होने दिया गया तो स्थिति खराब हो सकती है। वहीं स्वास्थ्य विभाग शिक्षा विभाग के साथ मिलकर बच्चों और उनके अभिभावकों को जागरूक करने की कार्ययोजना बना रहा है ताकि समय रहते टीकाकरण अभियान को पूरा किया जा सके।
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह का कहना है कि सरकार ने टीका और उसे लगवाने की सुविधा मुहैया करा दी है। स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रहा है कि लाभार्थियों को बिना किसी परेशानी के टीका लगे लेकिन जब तक लोग इसमें पूरी सहभागिता नहीं करेंगे तब तक सफलता संभव नहीं है। कर्मचारी लगातार इस प्रयास में लगे हुए हैं कि टीके की एक भी खुराक बेकार न जाए। ऐसे में लोगों को भी अपनी सुरक्षा के लिए टीके के महत्व को समझना होगा। खुद के साथ अपने बच्चों और परिवार के सभी सदस्यों को जल्द से जल्द टीका लगवाए।
बच्चों के अभियान का परिणाम निराशाजनक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वयस्कों के अभियान को तो चंडीगढ़ ने तय समय से पहले ही पूरा कर लिया था लेकिन बच्चों के अभियान में स्थिति निराशाजनक है। खासतौर पर 12 से 14 साल तक के ग्रुप में टीका लगवाने को लेकर कोई उत्साह नजर नहीं आ रहा। इसकी वजह अभिभावकों का इसमें रुचि न दिखाना है जबकि ये उनके बच्चे की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। भारतीय बाल अकादमी की सदस्य डॉ. गुंजन बवेजा का कहना है कि संक्रमण से बचाव के लिए टीका बेहद जरूरी है। बच्चों को बेझिझक टीका लगवाएं क्योंकि इसका कोई नुकसान नहीं है। हल्के बुखार से डरने की जरूरत नहीं है। टीका लगवाने के बाद ऐसा होना सामान्य स्थिति है।
अभियान में टीके की अब तक की स्थिति
टीका अब तक इतना लगा इतना हुआ बर्बाद नुकसान प्रतिशत मेंकोविशिल्ड 1974818 21328 1.08 प्रतिशत
कोवैक्सिन 102734 1479 1.44 प्रतिशत
कोर्बोवक्स 13661 930 6.81 प्रतिशत
(नोट- टीके की खुराक संख्या और प्रतिशत में बताई गई है।)
कोरोना टीकाकरण अभियान में उपयोग किए जाने वाले टीके की एक वॉयल में 10 डोज होती है। यानी अगर वॉयल खोल दी गई तो उसे दस लोगों को लगाया जाएगा। लाभार्थियों के न आने पर डोज समय पर उपयोग न होने से खराब होने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक-दूसरे केंद्र से बेहतर तालमेल स्थापित कर बचे डोज को एक से दूसरे स्थान पर भेजकर खराब होने से पहले उपयोग करने की रणनीति अपनाई है। उससे काफी फायदा हुआ है। - डॉ. मंजीत सिंह, राज्य टीकाकरण अधिकारी