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हरियाणा में 23 अगस्त को जन्माष्टमी की छुट्टी, प्लास्टिक के तिरंगे पर पाबंदी, होगी सख्ती

Tue, 20 Aug 2019 09:15 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 20 Aug 2019 09:15 PM IST
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23 August will be observed as a Gazetted Holiday in Haryana
प्रतीकात्मक तस्वीर

हरियाणा सरकार 23 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएगी और सरकार की ओर से इसी दिन जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में अवकाश रहेगा। इस संदर्भ में हरियाणा सरकार के सामान्य प्रशासनिक विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के अंतर्गत मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने बताया कि हरियाणा में 24 अगस्त की बजाए 23 अगस्त को जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में अवकाश रहेगा। 

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23 अगस्त को ही प्रदेश के सभी सरकारी विभाग, बोर्ड, निगमों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकार के अधीनस्थ अन्य संस्थानों में छुट्टी रहेगी। उक्त निर्देश प्रदेश के सभी जिलों के उपायुक्तों, मंडलायुक्तों, सरकारी विभागों के मुखिया, एमडी व डीजी स्तर के अफसरों को भेजे जा चुके हैं।
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प्लास्टिक के तिरंगे पर पाबंदी, होगी सख्ती
हरियाणा में किसी भी आयोजन व समारोह के दौरान प्लास्टिक के झंडे का इस्तेमाल नहीं होगा। यदि ऐसा हुआ तो सख्ती कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश सरकार ने इस बाबत जिलों के अफसरों को दिशा-निर्देश दिए हैं। अफसरों से कहा गया है कि वे अपने जिले में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के दृष्टिगत राष्ट्रीय गौरव अपमान अधिनियम 1971 व भारतीय झंडा संहिता 2002 मे निहित प्रावधानों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें। 
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इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए उचित सम्मान मिलना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज के लिए एक सार्वभौमिक लगाव, आदर और निष्ठा होती है। 

अकसर देखने में आता है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेलकूद के अवसरों पर कागज के झण्डों के स्थान पर प्लास्टिक के तिरंगे झंडों का प्रयोग किया जाता है। चूंकि प्लास्टिक से बने झण्डे कागज के समान बायो-डिग्रेडेबल नहीं होते और ये लंबे समय तक नष्ट नहीं होते। इसके अलावा, प्लास्टिक से बने झंडों का सम्मानपूर्वक उचित निपटान सुनिश्चित करना भी एक व्यावहारिक समस्या है।

इसलिए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेलकूद के अवसरों पर भारतीय झंडा संहिता 2002 के प्रावधान के अनुरूप जनसाधारण द्वारा केवल कागज से बने झण्डों का ही प्रयोग किया जाए तथा समारोह संपन्न होने के पश्चात ऐसे कागज के झंडों को न तो विकृत किया जाए और न ही जमीन पर फेंका जाए। ऐसे झंडों का निपटान उनकी मर्यादा के अनुरूप एकांत में किया जाए।

 

 

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