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मानसा में मर रहे हैं किसान, 15 दिन में 6 ने दी जान

Wed, 20 Jan 2016 05:00 PM IST
जगतार सिंह/अमर उजाला, मानसा(पंजाब)
जगतार सिंह/अमर उजाला, मानसा(पंजाब) Updated Wed, 20 Jan 2016 05:00 PM IST
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16 farmer die in mansa due to white fly and debt

मानसा जिले में बीते साल से अब तक सफेद मक्खी और कर्ज से परेशान 43 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। किसान जत्थेबंदियां इसकी वजह सरकार की घटिया नीति और नकली कीटनाशक दवाओं की बिक्री मान रही है।

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उनका कहना है कि किसी भी नेता ने अब तक खुदकुशी कर चुके किसानों के घर जाकर दुख सांझा नहीं किया। हालांकि खुदकुशी करने वाले किसानों को कोर्ट ने मुआवजा देने के आदेश दिए हैं, इसके बावजूद कई किसानों के परिवार मुआवजे से वंचित हैं।
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बीते साल में मानसा जिले के करीब 37 किसानों ने खुदकुशी की, वहीं छह किसान इस साल जनवरी माह में अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुके हैं। इन किसानों में दो सगे भाई हैं। इसके अलावा एक ही गांव के दो-दो किसान भी शामिल हैं।
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खुदकुशी करने वालों में गांव मोहर सिंह वाला का जगरूप सिंह, झंडुके का कुलदीप सिंह, रल्ला का जगमेल सिंह, बछोआना का गुरचरण सिंह, बुर्ज ढिलवा का जंगीर सिंह, पेरों का तेजा सिंह, कोरवाला का हरदेव सिंह, मुस्सा का बलविंदर सिंह, अकलिया का शमशेर सिंह, उड्डत भगत राम का गुलजार सिंह, बणावाला का चरणजीत सिंह, झेरिया वाला का बिक्कर सिंह, टाडियां का जगसीर सिंह, नंदगढ़ का तेजा सिंह, खीवा का बिंदर सिंह, गांव पेरों के दो सगे भाई अवतार सिंह व जगतार सिंह, अचानक का सूरत सिंह, रिओंद कला का मक्खन सिंह, मढाली का गुरजंट सिंह, रामनगर भट्ठल का बलवीर सिंह, मल सिंह वाला का गुरप्रीत सिंह, झंडूके का नाजर सिंह, फफड़े भाईके का हरजिंदर सिंह, दानेवाला का प्रेम सिंह, साहनेवाला के शिंगारा सिंह व जसविंदर सिंह, अचानक का जगदीप सिंह, हीरेवाला का हरदेव सिंह, झेरिया का सुखपाल सिंह, खारा का रेशम सिंह, भैणीवाघा का गुरप्रीत सिंह, लालियावाली का बोरिया सिंह, मोजिया का सोनी सिंह, चुडिया का मंगा सिंह, भलाईके का बिक्कर सिंह और ख्याला कला के बलकार सिंह का नाम शामिल हैं।

साल 2016 का आगाज होते ही किसानों की खुदकुशी का सिलसिला थम नहीं रहा है। इनमें कुलरिया का मेजर सिंह, गांव बोहा का गुरमेल सिंह, गांव रल्ला का काला सिंह व गांव माखे वाला का अमनदीप सिंह, रायपुर का मेजर सिंह व बुर्ज ढिल्वा के त्रिलोचन सिंह का नाम भी खुदकुशी करने वाले किसानों में जुड़ गया है।

‘सरकार पूरा मुआवजा देती तो किसान नहीं करते खुदकुशी’
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिलाध्यक्ष राम सिंह भैणीवाघा, पंजाब किसान यूनियन के रूलदू सिंह, भारतीय किसान यूनियन डकौंदा के गोरा सिंह भैणीवाघा ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों, सफेद मक्खी प्रभावित कपास और कर्ज से परेशान होकर किसान खुदकुशी कर रहे हैं।

‘किसान परिवारों को दिया जा रहा मुआवजा’
डीसी भूपिंदर सिंह का का कहना है कि कुछ किसान परिवारों को योग्य मुआवजा दिया जा रहा है। वहीं कई किसानों के खुदकुशी मामले में जांच की जा रही है, जो सामने आएगा उनको भी मुआवजा दिया जाएगा।

बेटी की डोली उठने के बजाय पिता ने निकली अर्थी

मानसा। गांव बोेहा के गुरमेल सिंह पर करीब पांच लाख का कर्ज था, साथ ही उसे लड़की की शादी की चिंता सता रही थी। गुरमेल सिंह की पत्नी कुलविंदर कौर बोहा ने बताया कि इसी चिंता के चलते घर से डोली के बजाए उसके पति की अर्थी उठी। इस तरह गांव नंदगढ़ के तेेजा सिंह पर साढ़े तीन लाख रुपये का कर्ज था। वह इस वजह से जमीन का ठेका नहीं भर पाया।

साथ ही उसने अपनी बेटी की शादी भी करानी थी। बढ़ते कर्ज के बोझ ने उसकी जान ले ली। गांव भलाईके के खेत मजदूर बिक्कर सिंह ने घर से बेटी की डोली उठने के बाद ही फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। गांव रल्ला के मृतक किसान काला सिंह की पत्नी हरबंस कौर ने बताया कि उसकी दो बेटियां और एक बेटा हैं।


जिनकी पढ़ाई को लेकर काला सिंह परेशान रहता था। उस पर डेढ़ लाख रुपये का कर्ज था। इसके अलावा गांव माखेवाला के किसान अमनदीप सिंह की पत्नी खुशप्रीत कौर ने बताया कि उसके पति ने आढ़ती, बैंक और सोसाइटी का 10 लाख का कर्ज न चुकाने के चलते फंदा लगा दिया।

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