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गुडग़ांव में हुडा को एफएआर से मिलने वाले राजस्व में करोड़ों का घोटला
Updated Sun, 04 Nov 2018 01:21 AM IST
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हुडा को मिलने वाले राजस्व में करोड़ों के घोटाले का आरोप
- गुड़गांव में विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का सनसनीखेज मामला आया सामने
- हुडा को एफएआर से मिलना था करोड़ों का राजस्व, सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रेस कांफ्रेंस कर दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूूला। एक निजी होटल में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अरुण अग्रवाल ने आरोप लगाया कि हुडा के मुख्य प्रशासक जेे गणेशन गुरुग्राम के संपदा अधिकारी भारत भूषण गोगिया हुडा के प्रशासक चंद्रशेखर खरे के साथ मिलकर आठ करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व का घोटाला किया है। जिसमें हुडा को मिलने वाला राजस्व नहीं मिला।
क्या है पूरा मामला
अक्षित प्रापर्टी प्राइवेट लिमिटेड प्लाट नंबर 20 सेक्टर-18 एरिया 13,519 स्कवायर मीटर के मालिक का एफएआर 125 प्रतिशत से 250 प्रतिशत बढ़ाने में लगभग आठ करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व का नुकसान किया गया है।
घोटाले को अंजाम देने के लिए एक ही दिन में 2 मई 2018 को संपदा अधिकारी भारत भूषण गोगिया की ओर से सारा काम करके उक्त पार्टी का एफएआर बढ़ा दिया गया। दो अगस्त को अधिकारी गोगिया ने अक्षित प्रापर्टी को पत्र लिखकर एफएआर बढ़ाने की मंजूरी दे दी। मंजूरी पत्र के अनुसार पार्टी से 32 करोड़ 44 लाख 56 हजार की डिमांड की गई। जो कि प्लाट मालिक से प्रार्थना पत्र लेकर और कंपनी की ओर से ही एफएआर की केलकुलेशन करा कर उपरोक्त राशि 32 करोड़ 44 लाख 56 हजार की मांग कराई गई। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हुडा के अधिकारियों की ओर से फाइल पर एफएआर की केलकुलेशन 40 करोड़ 55 लाख 70 हजार रुपये बनती है। ऐसे में क्या वजह हुई कि प्राइवेट पार्टी की बात को मान लिया गया और सबको नजरअंदाज करते हुए एक ही दिन में 2 मई 2018 को प्लाट फाइल की नोटिंग के अनुसार मुख्य प्रशासक जे गणेशन आईएएस की मंजूरी से प्लाट मालिक को इसी दिन पत्र जारी कर दिया गया।
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साथ में कागजों की खानापूर्ति करते हुए पार्टी से यह लिखवा लिया गया कि अगर भविष्य में यदि कोई एफएआर की डिमांड बढ़ती है तो वह पार्टी को जमा कराना होगा। वहीं अपने बचाव के लिए अधिकारी भारत भूषण गोगिया ने एक हलफनामा कंपनी से खानापूर्ति के लिए ले लिया जबकि हलफनामा व्यक्ति विशेष के नाम से तैयार होता है न कि किसी कंपनी के नाम से।
संपदा अधिकारी गोगिया ने इस मामले में 2 मई 2018 को हुडा प्रशासक गुरुग्राम चंद्रशेखर खरे को पत्र लिखकर उनके संज्ञान में ला दिया, लेकिन मिलीभगत होने के कारण इस मामले में तब से कोई कार्रवाई हुडा प्रशासक की ओर से नहीं की गई।
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- गुड़गांव में विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का सनसनीखेज मामला आया सामने
- हुडा को एफएआर से मिलना था करोड़ों का राजस्व, सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रेस कांफ्रेंस कर दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूूला। एक निजी होटल में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अरुण अग्रवाल ने आरोप लगाया कि हुडा के मुख्य प्रशासक जेे गणेशन गुरुग्राम के संपदा अधिकारी भारत भूषण गोगिया हुडा के प्रशासक चंद्रशेखर खरे के साथ मिलकर आठ करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व का घोटाला किया है। जिसमें हुडा को मिलने वाला राजस्व नहीं मिला।
क्या है पूरा मामला
अक्षित प्रापर्टी प्राइवेट लिमिटेड प्लाट नंबर 20 सेक्टर-18 एरिया 13,519 स्कवायर मीटर के मालिक का एफएआर 125 प्रतिशत से 250 प्रतिशत बढ़ाने में लगभग आठ करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व का नुकसान किया गया है।
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घोटाले को अंजाम देने के लिए एक ही दिन में 2 मई 2018 को संपदा अधिकारी भारत भूषण गोगिया की ओर से सारा काम करके उक्त पार्टी का एफएआर बढ़ा दिया गया। दो अगस्त को अधिकारी गोगिया ने अक्षित प्रापर्टी को पत्र लिखकर एफएआर बढ़ाने की मंजूरी दे दी। मंजूरी पत्र के अनुसार पार्टी से 32 करोड़ 44 लाख 56 हजार की डिमांड की गई। जो कि प्लाट मालिक से प्रार्थना पत्र लेकर और कंपनी की ओर से ही एफएआर की केलकुलेशन करा कर उपरोक्त राशि 32 करोड़ 44 लाख 56 हजार की मांग कराई गई। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हुडा के अधिकारियों की ओर से फाइल पर एफएआर की केलकुलेशन 40 करोड़ 55 लाख 70 हजार रुपये बनती है। ऐसे में क्या वजह हुई कि प्राइवेट पार्टी की बात को मान लिया गया और सबको नजरअंदाज करते हुए एक ही दिन में 2 मई 2018 को प्लाट फाइल की नोटिंग के अनुसार मुख्य प्रशासक जे गणेशन आईएएस की मंजूरी से प्लाट मालिक को इसी दिन पत्र जारी कर दिया गया।
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साथ में कागजों की खानापूर्ति करते हुए पार्टी से यह लिखवा लिया गया कि अगर भविष्य में यदि कोई एफएआर की डिमांड बढ़ती है तो वह पार्टी को जमा कराना होगा। वहीं अपने बचाव के लिए अधिकारी भारत भूषण गोगिया ने एक हलफनामा कंपनी से खानापूर्ति के लिए ले लिया जबकि हलफनामा व्यक्ति विशेष के नाम से तैयार होता है न कि किसी कंपनी के नाम से।
संपदा अधिकारी गोगिया ने इस मामले में 2 मई 2018 को हुडा प्रशासक गुरुग्राम चंद्रशेखर खरे को पत्र लिखकर उनके संज्ञान में ला दिया, लेकिन मिलीभगत होने के कारण इस मामले में तब से कोई कार्रवाई हुडा प्रशासक की ओर से नहीं की गई।