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ईशानी मरवाहा को मिलेगा अग्निपथ कला श्री अवार्ड
Updated Sun, 14 Oct 2018 01:32 AM IST
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ईशानी मरवाहा को मिलेगा अग्निपथ कला श्री अवार्ड
- 17 नवंबर को गांधी पीस फाउंडेशन करेगा सम्मानित
- इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में होगा कार्यक्रम का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। सफलता उम्र की मोहताज नहीं है। इसे साबित कर दिखाया है सेक्टर-चार निवासी 12 वर्षीय ईशानी ने। जिसे 17 नवंबर को अग्निपथ कला श्री अवार्ड से नवाजा जाएगा। ईशानी कथक और संगीत में इतनी माहिर है कि बड़े-बड़े भी हैरान रह जाएं। ईशानी ने प्रीपेट्री लेवल दो कथक में पूरा कर लिया है। पंचकूला सेक्टर-चार निवासी कथक डांसर ईशानी मरवाहा को अग्निपथ श्री 2018-19 अवार्ड के लिए चुना गया है। यह अवार्ड 17 नवंबर को गांधी पीस फाउंडेशन ऑडिटोरियम में दिया जाएगा।
कथक और संगीत सीखने की विधाएं सीख रही ईशानी पहले खुद सीखती हैं और उसके बाद कॉलोनियों में रहने वाले बच्चों को सिखाती है। डीपीएस पिंजौर में सातवीं की छात्रा ईशानी का उद्देश्य है कि वह कॉलोनियों में रहने वाले बच्चों को कथक और संगीत की ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाए। पिता पीसी मरवाहा ने बताया कि ईशानी को दो साल की उम्र से संगीत और डांस का बहुत शौक था, जब भी घर में संगीत चल रहा होता था तो वह झूमने लग जाती थी। इसलिए उसके शौक को पूरा करने के लिए कथक के मास्टर रूप चंद से ट्रेनिंग दिलवानी शुरू की गई। मास्टर रूपचंद से ट्रेनिंग लेने के बाद पंचकूला की विभिन्न कॉलोनियों में अपने पिता के साथ जाकर छोटे बच्चों को इकट्ठा कर उन्हें म्यूजिक और संगीत सिखाने का प्रयास करती हैं।
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- 17 नवंबर को गांधी पीस फाउंडेशन करेगा सम्मानित
- इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में होगा कार्यक्रम का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। सफलता उम्र की मोहताज नहीं है। इसे साबित कर दिखाया है सेक्टर-चार निवासी 12 वर्षीय ईशानी ने। जिसे 17 नवंबर को अग्निपथ कला श्री अवार्ड से नवाजा जाएगा। ईशानी कथक और संगीत में इतनी माहिर है कि बड़े-बड़े भी हैरान रह जाएं। ईशानी ने प्रीपेट्री लेवल दो कथक में पूरा कर लिया है। पंचकूला सेक्टर-चार निवासी कथक डांसर ईशानी मरवाहा को अग्निपथ श्री 2018-19 अवार्ड के लिए चुना गया है। यह अवार्ड 17 नवंबर को गांधी पीस फाउंडेशन ऑडिटोरियम में दिया जाएगा।
कथक और संगीत सीखने की विधाएं सीख रही ईशानी पहले खुद सीखती हैं और उसके बाद कॉलोनियों में रहने वाले बच्चों को सिखाती है। डीपीएस पिंजौर में सातवीं की छात्रा ईशानी का उद्देश्य है कि वह कॉलोनियों में रहने वाले बच्चों को कथक और संगीत की ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाए। पिता पीसी मरवाहा ने बताया कि ईशानी को दो साल की उम्र से संगीत और डांस का बहुत शौक था, जब भी घर में संगीत चल रहा होता था तो वह झूमने लग जाती थी। इसलिए उसके शौक को पूरा करने के लिए कथक के मास्टर रूप चंद से ट्रेनिंग दिलवानी शुरू की गई। मास्टर रूपचंद से ट्रेनिंग लेने के बाद पंचकूला की विभिन्न कॉलोनियों में अपने पिता के साथ जाकर छोटे बच्चों को इकट्ठा कर उन्हें म्यूजिक और संगीत सिखाने का प्रयास करती हैं।
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