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रंजीत और रामचंद्र छत्रपति हत्या केस में हुई सुनवाई, बयान दर्ज करवाने पहुंचे तीन गवाह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
Updated Thu, 06 Sep 2018 11:21 AM IST
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गुरमीत राम रहीम पर चल रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख पर डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में बुधवार को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई हुई। मामले में आरोपी इंदर सेन की तबीयत खराब होने के चलते वे कोर्ट में पेश नहीं हुए। वहीं मुख्य आरोपी राम रहीम वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये और अन्य प्रत्यक्ष रूप से कोर्ट में पेश हुए।
बचाव पक्ष वकील अनिल कौशिक ने बताया कि सुनवाई में बुधवार को बयान दर्ज करवाने के लिए तीन गवाह कोर्ट में पहुंचे थे। तीनों गवाहों में से एक गवाह डॉक्टर (सीएमओ) के बयान कोर्ट में दर्ज हुए। वहीं अन्य दो गवाहों के बयानों को जरूरी ना समझते हुए कोर्ट ने उनकी गवाही नहीं करवाई। मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी।
उल्लेखनीय है कि 10 जुलाई 2002 को डेरे के प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत सिंह का मर्डर हुआ था।
डेरा प्रबंधन को शक था कि रणजीत सिंह ने साध्वी यौन शोषण की गुमनाम चिट्ठी अपनी बहन से लिखवाई थी। पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत सिंह के पिता ने जनवरी 2003 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी। इस मामले में बहस अंतिम चरण में चल रही है। कोर्ट कभी भी फैसला सुना सकती है।
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वहीं, 24 अक्तूबर 2002 को सिरसा के संध्या दैनिक समाचार पत्र पूरा सच के संपादक रामचंद्र छत्रपति को पांच गोलियां मारी गईं थीं। इसके बाद 21 नवंबर 2002 को रामचंद्र छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि अपने अखबार में साध्वी यौन शोषण का मामला उठाने पर रामचंद्र छत्रपति की हत्या की गई थी। जनवरी 2003 में रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी।
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बचाव पक्ष वकील अनिल कौशिक ने बताया कि सुनवाई में बुधवार को बयान दर्ज करवाने के लिए तीन गवाह कोर्ट में पहुंचे थे। तीनों गवाहों में से एक गवाह डॉक्टर (सीएमओ) के बयान कोर्ट में दर्ज हुए। वहीं अन्य दो गवाहों के बयानों को जरूरी ना समझते हुए कोर्ट ने उनकी गवाही नहीं करवाई। मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी।
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उल्लेखनीय है कि 10 जुलाई 2002 को डेरे के प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत सिंह का मर्डर हुआ था।
डेरा प्रबंधन को शक था कि रणजीत सिंह ने साध्वी यौन शोषण की गुमनाम चिट्ठी अपनी बहन से लिखवाई थी। पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत सिंह के पिता ने जनवरी 2003 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी। इस मामले में बहस अंतिम चरण में चल रही है। कोर्ट कभी भी फैसला सुना सकती है।
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वहीं, 24 अक्तूबर 2002 को सिरसा के संध्या दैनिक समाचार पत्र पूरा सच के संपादक रामचंद्र छत्रपति को पांच गोलियां मारी गईं थीं। इसके बाद 21 नवंबर 2002 को रामचंद्र छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि अपने अखबार में साध्वी यौन शोषण का मामला उठाने पर रामचंद्र छत्रपति की हत्या की गई थी। जनवरी 2003 में रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी।