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बिना किसी फीस के रोज करती है सौ से अधिक बच्चों को शिक्षित

Wed, 05 Sep 2018 01:44 AM IST
Updated Wed, 05 Sep 2018 01:44 AM IST
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बिना किसी फीस के रोज करती है सौ से अधिक बच्चों को शिक्षित
भीख मांगना छोड़ अब बिना रुके करते हैं वैदिक मंत्रों का उच्चारण
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बिना किसी फीस के रोज करती है सौ से अधिक बच्चों को शिक्षित

- भविष्य में शिक्षा काम आए इसलिए करवाती है स्कूलों में एडमिशन
- अभी तक नौ बच्चों का हो चुका है नवोदय में एडमिशन
- भीख मांगनी छोड़ी अब बच्चों में साफ नजर आते है नैतिक गुण

रीतिका पठानियां
पंचकूला। जो शिक्षक हमारी जिंदगी बदल दे वह टीचर न केवल हमारे मार्गदर्शक बन जाते हैं, बल्कि हम उन्हें अपना आदर्श भी मानने लगते हैैं, क्योंकि बिना किसी स्वार्थ के कोई शिक्षक गरीब बच्चों का जीवन संवारें तो वह किसी का आदर्श क्यों ना हो। उसका साक्ष्य यह है कि स्लम एरिया, पूअर क्लास व भीख मांगना छोड़ चुके बच्चे भी अब बिना रुके वैदिक मंत्र, महा मृत्युंजय मंत्र जैसे कठिन मंत्र का सही उच्चारण करते हैं। ऐसे ही अनाथ व सड़कों के किनारे भीख मांगने वाले बच्चों की जिंदगी संवार रही है। पंचकूूला सेक्टर-20 निवासी अंजू अहुजा। जो पेशे से गृहणी है। अमर उजाला से बातचीत करते हुए अंजू अहुजा ने बताया कि वह पिछले दो सालों से पंचकूला के बच्चों को शिक्षित कर रही है। उनके पति नरेंद्र अहूजा विवेक प्रदेश में स्टेट कंट्रोलर आफिसर के पद पर कार्यरत है। जो पहले गुरुग्राम में कार्यरत थे। अंजू के अनुसार पहले वे गुरुग्राम में आर्य समाज मंदिर में गरीब बच्चों को पढ़ाती थी। उनके पति का 2011 में पंचकूला में तबादला हो गया। जिस कारण उन्हें शिफ्ट करना पड़ा। जिसके बाद उन्होंने दो साल पहले पंचकूला में फिर से बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।

ऐसे आया विचार
अंजू ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं जिन्हें उन्होंने 8वीं तक पढ़ाया। घर पर बैठी रहती तो बोर हो जाती थी फिर सोचा कि क्यों न उन बच्चों को शिक्षित करूं जो स्कूल नहीं जा पाते। इस विषय में उनके पति ने सहयोग किया जो आर्य समाज मंदिर कमेटी के सदस्य थे उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के लिए मंदिर में ही जगह का बंदोबस्त कर दिया। अब सेक्टर-20 स्थित काली माता मंदिर में ‘प्रयास एक कोशिश’ संस्था के अंदर 100 बच्चों व सेक्टर-21 गुरुकुल स्कूल में आर्य समाज संस्था के साथ मिलकर ‘अहसास’ स्कूल चला रहे हैं। जहां 150 के करीब बच्चे आते हैं। नरेंद्र अहुजा इन दोनों स्कूल में मैनेजमेंट संभालते हैं।
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बच्चों में शिक्षा के साथ हुआ नैतिक और शारीरिक विकास
अंजू ने बताया कि जब से बच्चे उनके पास पढ़ने आ रहे है। तब से उन्होंने भीख मांगना बंद कर दी है। जो बच्चें गाली-गलौच के बिना बात तक नहीं करते थे उनमें आज शिष्टाचार के गुण साफ नजर आते हैं। हम न केवल बच्चों को शिक्षित करते है बल्कि उनके खाने-पीने व न्यूट्रीशन का भी ध्यान रखते हैं। उन्हें सप्ताह के अलग-अलग दिन खाने-पीने की चीजें दी जाती है। बच्चों के नाम की सूची तैयार करने के बाद हम नजदीकी स्कूलों में जाकर प्रधानाचार्य से संपर्क करने के बाद उन बच्चों के एडमिशन दिलाते हैं। बच्चों के लिए हम समय-समय पर प्रतियोगिताओं का आयोजन भी करते हैं। इन बच्चों में से कई के एडमिशन नवोदय विद्यालय में भी हो चुके हैं।
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छह महीने में होता हैं मेडिकल टेस्ट
अंजू अहुजा के पति नरेंद्र अहुजा विवेक ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर हर छह माह में बच्चों का मेडिकल टेस्ट करवाते हैं। ताकि उनका उचित रूप से शारीरिक विकास हो सके। अंजू के अनुसार सेक्टर-14 कॉलेज मधु, ममता, हरदीप से ग्रेजुएट स्टूडेंट्स आकर शाम चार से छह बजे तक बच्चों को पढ़ाती है। अंजू के अनुसार उन्होंने आर्किटेक्ट की पढ़ाई की है।

नैनी रही अंजू अहुजा की बेस्ट स्टूडेंट
फतेहपुर निवासी नैनी अभी सार्थक स्कूल में 12वीं की पढ़ाई कर रही है। अंजू के अनुसार वह उनकी फेवरेट स्टूडेंट रही है। नैनी के पापा दुकानदार व माता गृहणी है। नैैनी ने बताया कि उन्हें यहां से बहुत स्पोर्ट मिला है। जो उन्हें स्कूल में समझ नहीं आता वह उसे मंदिर में जाकर अंजू अहुजा से पूछ लेती थी। नैनी का कहना है वह भी बड़ी होकर अंजू मैडम की तरह बनना चाहती है।

रंजना बनना चाहती डॉक्टर
रंजना कुडी के गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ती थी जिन्होंने 5वीं कक्षा में ‘प्रयास एक कोशिश’ स्कूल में आना शुरू किया। रंजना का एडमिशन डीसी पब्लिक स्कूल सेक्टर-7 में हो चुका है। वह 7वीं में पढ़ती है। रंजना के पापा वर्कर है और माता आया। रंजना बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती है।

रिटायर होने के बाद भी दी निशुल्क शिक्षा
मुंशी राम दिल्ली में अध्यापक रह चुके हैं जो अभी रिटायर होने के बाद भी नि:शुल्क सेवा दे रहे हैं। मुंशी पिछले दो साल से बच्चों की पढ़ाई को शिक्षित कर रहे हैं। उनका मानना है कि बच्चों को शिक्षित करना उनका कर्तव्य है और उन्हें यह करके अच्छा लग रहा है। उनके अन्य सहयोगियों में संजीता, दिनेश, मधु, ममता, हरदीप के नाम शामिल है।


सरकारी स्कूल दे छुट्टी के बाद बच्चों को पढ़ाने की जगह
संस्था के प्रधान संदीप बी सिंघला ने अपील की है कि सरकारी स्कूल उन्हें छुट्टी के बाद अपने स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए जगह दे ताकि वह और भी बच्चों को शिक्षित कर सके। इसके लिए वह स्कूल परिसर का किराया, स्कूल के कमजोर बच्चों को पढाने के साथ-साथ मेंटेन्स चार्जेस देने को भी तैयार है।
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