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बाढ़ जैसे हालात, निपटने के लिए नहीं हैं माकूल इंतजाम
Updated Tue, 14 Aug 2018 01:25 AM IST
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बाढ़ जैसे हालात, निपटने के लिए नहीं हैं माकूल इंतजाम
- खुली सुरक्षा के दावों की पोल
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। लगातार करीब 12 घंटे की बारिश ने जिले में इस कदर कहर बरपाया, जिसे देखकर प्रशासन की ओर से बाढ़ से निपटने की तैयारियां और सुरक्षा के दावों की पोल खुल गई। प्रकृति के इस कहर से बचने के लिए न तो कोई रास्ता दिख रहा था और अगर मिला भी तो रास्ते पर कहीं पुल टूटा तो कहीं सड़क पर पहाड़ों से दरकती मिट्टी। घग्गर के उफान को इस कदर परवान चढ़ा कि रास्ते में जो भी मिला अपने साथ ले गई। पशु, झुग्गी, मिट्टी, दीवार, पुल जो कुछ भी सामने आया, उसका पता बाद में ही चल पाएगा।
गांव चौकी में रविवार रात पुल के अचानक टूटने के साथ ही लोगों के घरों में भी पानी घुस गया। ट्यूबवेल भी पानी की चपेट में आकर खराब हो गया तो जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई। पुल के निर्माण पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी वजह से 3000 की आबादी प्रभावित हुई है।
बारिश के दौरान शहर का पानी भी घग्गर में पहुंचा। जहां भी रास्ता मिल रहा था पानी का रुख उधर ही दिखा। इस रास्ते में जो कुछ भी मिला बहाव उसे अपने साथ ले गया।
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गांव में देर रात ही बारिश के कारण घरों में पानी घुस गया, जबकि पुल के टूटने से भी आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। इस दौरान न तो बच्चे स्कूल जा सके और न ही घर का कोई भी सदस्य अपने काम पर गया। - अमरीक सिंह।
दो साल पहले किए गए पुल के निर्माण में कमियां छोड़ दी गई थी। यहां लेंटर की जगह मलबा इकट्ठा कर, पुलिया बना दी गई। तेज बहाव की चपेट में आकर मलबा निकलने की वजह से पुल टूट गया। - संतोख सिंह।
हालात को काबू करने और लोगों के घरों में पानी न घुसे इसके लिए ग्रामीणों ने खुद ही कचरे को साफ किया। पेड़ भी इस दौरान काटे गए ताकि पानी को रास्ता मिल सके। - कुलदीप सिंह।
एक पुल था जो टूट गया, अब छोटी चौकी और चौकी के बीच आना-जाना भी बंद हो गया। बच्चे न तो स्कूल गए और आगे भी उनके लिए खतरा मंडरा रहा है। - गुरमेल कौर।
गांव में एक पुलिया तो ठीक होनी चाहिए, इसके निर्माण में कहां कमी रह गई, इसकी जांच होनी चाहिए। अगर, यह घटना सुबह के वक्त हुई होती तो बड़ा हादसा भी हो सकता था। - कुलदीप सिंह।
करीब 3000 की आबादी दोनों गंावों में है, लेकिन इस तरफ नगर निगम का ध्यान नहीं। एक पुल बनाया भी तो घटिया, जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा। - प्यारा सिंह।
पुल के निर्माण में ऐसी कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। घटना के करीब 12 घंटे बाद भी कोई आला अधिकारी मौके का मुआयना करने नहीं पहुंचा। - गुरमीत सिंह।
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- खुली सुरक्षा के दावों की पोल
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। लगातार करीब 12 घंटे की बारिश ने जिले में इस कदर कहर बरपाया, जिसे देखकर प्रशासन की ओर से बाढ़ से निपटने की तैयारियां और सुरक्षा के दावों की पोल खुल गई। प्रकृति के इस कहर से बचने के लिए न तो कोई रास्ता दिख रहा था और अगर मिला भी तो रास्ते पर कहीं पुल टूटा तो कहीं सड़क पर पहाड़ों से दरकती मिट्टी। घग्गर के उफान को इस कदर परवान चढ़ा कि रास्ते में जो भी मिला अपने साथ ले गई। पशु, झुग्गी, मिट्टी, दीवार, पुल जो कुछ भी सामने आया, उसका पता बाद में ही चल पाएगा।
गांव चौकी में रविवार रात पुल के अचानक टूटने के साथ ही लोगों के घरों में भी पानी घुस गया। ट्यूबवेल भी पानी की चपेट में आकर खराब हो गया तो जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई। पुल के निर्माण पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी वजह से 3000 की आबादी प्रभावित हुई है।
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बारिश के दौरान शहर का पानी भी घग्गर में पहुंचा। जहां भी रास्ता मिल रहा था पानी का रुख उधर ही दिखा। इस रास्ते में जो कुछ भी मिला बहाव उसे अपने साथ ले गया।
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गांव में देर रात ही बारिश के कारण घरों में पानी घुस गया, जबकि पुल के टूटने से भी आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। इस दौरान न तो बच्चे स्कूल जा सके और न ही घर का कोई भी सदस्य अपने काम पर गया। - अमरीक सिंह।
दो साल पहले किए गए पुल के निर्माण में कमियां छोड़ दी गई थी। यहां लेंटर की जगह मलबा इकट्ठा कर, पुलिया बना दी गई। तेज बहाव की चपेट में आकर मलबा निकलने की वजह से पुल टूट गया। - संतोख सिंह।
हालात को काबू करने और लोगों के घरों में पानी न घुसे इसके लिए ग्रामीणों ने खुद ही कचरे को साफ किया। पेड़ भी इस दौरान काटे गए ताकि पानी को रास्ता मिल सके। - कुलदीप सिंह।
एक पुल था जो टूट गया, अब छोटी चौकी और चौकी के बीच आना-जाना भी बंद हो गया। बच्चे न तो स्कूल गए और आगे भी उनके लिए खतरा मंडरा रहा है। - गुरमेल कौर।
गांव में एक पुलिया तो ठीक होनी चाहिए, इसके निर्माण में कहां कमी रह गई, इसकी जांच होनी चाहिए। अगर, यह घटना सुबह के वक्त हुई होती तो बड़ा हादसा भी हो सकता था। - कुलदीप सिंह।
करीब 3000 की आबादी दोनों गंावों में है, लेकिन इस तरफ नगर निगम का ध्यान नहीं। एक पुल बनाया भी तो घटिया, जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा। - प्यारा सिंह।
पुल के निर्माण में ऐसी कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। घटना के करीब 12 घंटे बाद भी कोई आला अधिकारी मौके का मुआयना करने नहीं पहुंचा। - गुरमीत सिंह।