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धावक मिल्खा सिंह
Updated Thu, 22 Feb 2018 02:24 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय स्तर के दिव्यांग धावक को केंद्र सरकार देगी हर साल तीस लाख रुपये
- पंचकूला सेक्टर-21 के विनय को पूरी ट्राइसिटी में टॉप्स (टारगेट ओलंपिक पोडियम) स्कीम के तहत चुना
- इंडिया की टॉप रैंकिंग में पहले और एशिया में चौथे स्थान पर काबिज हैं विनय
दीपक शाही
पंचकूला।
‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से मशहूर पूर्व एथलीट मिल्खा सिंह के जीवन पर आधारित ‘भाग मिल्खा भाग’ एक दिव्यांग के लिए प्रेरणा बन गई और वह निकल पड़ा खेल के मैदान में उड़ान भरने के लिए। महज दो साल के खेल कैरियर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी पहचान बनाई कि टॉप्स (टारगेट ओलंपिक पोडियम) स्कीम के तहत केंद्र सरकार ने जापान 2020 में होने वाले पैरा ओलंपिक के लिए तैयार करने का फैसला लिया। पूरी ट्राइसिटी में सिर्फ 18 वर्षीय विनय को टॉप्स स्कीम के तहत चुना गया है। इस स्कीम के तहत चुने जाने के बाद 2018 से सरकार विनय लाल को हर साल तीस लाख रुपये तक की ग्रांट स्कॉलरशिप के रूप में देगी। सिर्फ इतना हीं नहीं इस युवा को पॉकेट मनी के लिए हर माह 50 हजार रुपये भी मिलेंगे। खेल में प्रदर्शन के आधार पर ये रकम घटती और बढ़ती रहेगी।
इंडिया रैंकिंग में विनय का पहला स्थान
इंडिया के तेज धावकों की 100 मीटर रैंकिंग में विनय लाल पहले स्थान पर काबिज हैं। वहीं, एशिया में चौथे स्थान पर हैं। विनय का सपना है कि वह देश के लिए पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाए। इसकी तैयारी को लेकर सुबह साढ़े छह से शाम पांच बजे तक स्पोर्ट्स ग्राउंड में पसीना बहाता है। इस बीच वह सिर्फ तीन घंटे का रेस्ट करता है। बाकि समय विनय दौड़ की प्रैक्टिस बीताता है।
मां नहीं देख पाईं बेटे का सपना
‘भाग मिल्खा भाग’ देखने के बाद धावक बनने का फैसला विनय ने किया। उसके इस फैसले का समर्थन पूरे घर में उसकी मां ने किया। फिर मिल्खा सिंह की तरह अच्छा धावक बनने के लिए विनय ने जिम ज्वाइन किया, लेकिन वहां लोग विनय का मजाक उड़ाने लगे। फिर विनय की मां स्व. बबली लाल ने रोजाना उसे खाली सड़कों पर दौड़ की प्रैक्टिस के लिए भेजना शुरू किया। कुछ दिनों बाद जब वह दौड़ में अभ्यस्त हो गया, तो विनय के किसी दोस्त ने पीयू में एथलेटिक कोच अरविंद से मिलवाया। कोच ने कुछ दिनों तक चंडीगढ़ पीयू में उसे दौड़ की ट्रेनिंग दी। उसके बाद कोच ने सनौली गांव स्थित अंबाला रोड पर अपनी लीवइट अकादमी खोली और वहां विनय को प्रॉपर ट्रेनिंग देना शुरू किया। सबसे पहले 2015 नेशनल में दो सिल्वर पदक हासिल किया। इस बीच विनय की मां का ओपन हार्ट सर्जरी हुआ और उनका निधन हो गया। विनय ने बताया कि मां के निधन के बाद वह काफी दिनों तक परेशान रहा। लेकिन अब उसकी मां का सपना भी उसके लक्ष्य के साथ जुड़ गया था और वह दौड़ की प्रैक्टिस करने लगा। इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियन गेम्स की तैयारी में इस समय विनय जुटा है। यह गेम्स में 2018 अक्तूबर में आयोजित की जाएगी।
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खेल उपलब्धियों पर एक नजर
इंटरनेशनल स्तर पर
- मई 2017 चाइना के बीजिंग में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स ग्रेड पिक्स में एक स्वर्ण और एक सिल्वर पदक।
- जुलाई 2017 लंदन में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में फोर्थ रैकिंग हासिल की।
- अगस्त 2017 स्विट्जरलैंड में आयोजित वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में फोर्थ रैकिंग हासिल किया।
- दिसंबर 2017 में आयोजित एशियन जूनियर एथलेक्टिस गेम्स में सौ मीटर में गोल्ड और चार सौ मीटर में सिल्वर पदक।
नेशनल स्तर पर
- नेशनल 2017 में दो स्वर्ण पदक।
- नेशनल 2016 में दो सिल्वर पदक।
- नेशनल 2015 में दो सिल्वर पदक।
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- पंचकूला सेक्टर-21 के विनय को पूरी ट्राइसिटी में टॉप्स (टारगेट ओलंपिक पोडियम) स्कीम के तहत चुना
- इंडिया की टॉप रैंकिंग में पहले और एशिया में चौथे स्थान पर काबिज हैं विनय
दीपक शाही
पंचकूला।
‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से मशहूर पूर्व एथलीट मिल्खा सिंह के जीवन पर आधारित ‘भाग मिल्खा भाग’ एक दिव्यांग के लिए प्रेरणा बन गई और वह निकल पड़ा खेल के मैदान में उड़ान भरने के लिए। महज दो साल के खेल कैरियर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी पहचान बनाई कि टॉप्स (टारगेट ओलंपिक पोडियम) स्कीम के तहत केंद्र सरकार ने जापान 2020 में होने वाले पैरा ओलंपिक के लिए तैयार करने का फैसला लिया। पूरी ट्राइसिटी में सिर्फ 18 वर्षीय विनय को टॉप्स स्कीम के तहत चुना गया है। इस स्कीम के तहत चुने जाने के बाद 2018 से सरकार विनय लाल को हर साल तीस लाख रुपये तक की ग्रांट स्कॉलरशिप के रूप में देगी। सिर्फ इतना हीं नहीं इस युवा को पॉकेट मनी के लिए हर माह 50 हजार रुपये भी मिलेंगे। खेल में प्रदर्शन के आधार पर ये रकम घटती और बढ़ती रहेगी।
इंडिया रैंकिंग में विनय का पहला स्थान
इंडिया के तेज धावकों की 100 मीटर रैंकिंग में विनय लाल पहले स्थान पर काबिज हैं। वहीं, एशिया में चौथे स्थान पर हैं। विनय का सपना है कि वह देश के लिए पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाए। इसकी तैयारी को लेकर सुबह साढ़े छह से शाम पांच बजे तक स्पोर्ट्स ग्राउंड में पसीना बहाता है। इस बीच वह सिर्फ तीन घंटे का रेस्ट करता है। बाकि समय विनय दौड़ की प्रैक्टिस बीताता है।
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मां नहीं देख पाईं बेटे का सपना
‘भाग मिल्खा भाग’ देखने के बाद धावक बनने का फैसला विनय ने किया। उसके इस फैसले का समर्थन पूरे घर में उसकी मां ने किया। फिर मिल्खा सिंह की तरह अच्छा धावक बनने के लिए विनय ने जिम ज्वाइन किया, लेकिन वहां लोग विनय का मजाक उड़ाने लगे। फिर विनय की मां स्व. बबली लाल ने रोजाना उसे खाली सड़कों पर दौड़ की प्रैक्टिस के लिए भेजना शुरू किया। कुछ दिनों बाद जब वह दौड़ में अभ्यस्त हो गया, तो विनय के किसी दोस्त ने पीयू में एथलेटिक कोच अरविंद से मिलवाया। कोच ने कुछ दिनों तक चंडीगढ़ पीयू में उसे दौड़ की ट्रेनिंग दी। उसके बाद कोच ने सनौली गांव स्थित अंबाला रोड पर अपनी लीवइट अकादमी खोली और वहां विनय को प्रॉपर ट्रेनिंग देना शुरू किया। सबसे पहले 2015 नेशनल में दो सिल्वर पदक हासिल किया। इस बीच विनय की मां का ओपन हार्ट सर्जरी हुआ और उनका निधन हो गया। विनय ने बताया कि मां के निधन के बाद वह काफी दिनों तक परेशान रहा। लेकिन अब उसकी मां का सपना भी उसके लक्ष्य के साथ जुड़ गया था और वह दौड़ की प्रैक्टिस करने लगा। इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियन गेम्स की तैयारी में इस समय विनय जुटा है। यह गेम्स में 2018 अक्तूबर में आयोजित की जाएगी।
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खेल उपलब्धियों पर एक नजर
इंटरनेशनल स्तर पर
- मई 2017 चाइना के बीजिंग में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स ग्रेड पिक्स में एक स्वर्ण और एक सिल्वर पदक।
- जुलाई 2017 लंदन में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में फोर्थ रैकिंग हासिल की।
- अगस्त 2017 स्विट्जरलैंड में आयोजित वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में फोर्थ रैकिंग हासिल किया।
- दिसंबर 2017 में आयोजित एशियन जूनियर एथलेक्टिस गेम्स में सौ मीटर में गोल्ड और चार सौ मीटर में सिल्वर पदक।
नेशनल स्तर पर
- नेशनल 2017 में दो स्वर्ण पदक।
- नेशनल 2016 में दो सिल्वर पदक।
- नेशनल 2015 में दो सिल्वर पदक।