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करनाल लाठीचार्ज मामला: घटनाक्रम पर जस्टिस अग्रवाल ने तैयार की 150 पन्ने की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री को सौंपेंगे
Fri, 24 Dec 2021 10:53 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 24 Dec 2021 10:53 PM IST
सार
करनाल के बसताड़ा टोल प्रकरण मामले में जस्टिस अग्रवाल ने 150 पन्ने की रिपोर्ट तैयार की। मुख्यमंत्री की व्यस्तता के कारण शुक्रवार को रिपोर्ट नहीं सौंप पाए, अब 29 दिसंबर को सौंपेंगे। रिपोर्ट इस पर आधारित है कि आईएएस आयुष सिन्हा की लाठीचार्ज में भूमिका है या नहीं व घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार कौन है।
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करनाल महापंचायत (फाइल फाेटाे)
- फोटो : PTI
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विस्तार
जस्टिस एसएन अग्रवाल आयोग ने करनाल के बसताड़ा टोल प्लाजा प्रकरण की जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। 150 पन्ने की रिपोर्ट में किसानों पर लाठीचार्ज, घटनाक्रम के लिए बनी परिस्थितियों व आईएएस आयुष सिन्हा की इसमें भूमिका का विस्तार से वर्णन है।
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जस्टिस अग्रवाल को शुक्रवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल को रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन सीएम की व्यस्तता के चलते यह संभव नहीं हो पाया। अब वह 29 दिसंबर को रिपोर्ट सौंपेंगे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में यह बताया है कि आईएएस आयुष सिन्हा की लाठीचार्ज में भूमिका है या नहीं। सिन्हा के एसडीएम करनाल रहते जारी हुए सिर फोड़ने वाले वायरल वीडियो की सच्चाई का भी इसमें उल्लेख किया गया है। पूरे घटनाक्रम के लिए कौन जिम्मेदार है, हालात कैसे बने, इस पर भी प्रकाश डाला गया है।
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जस्टिस अग्रवाल ने 11 अक्तूबर 2021 को आयोग के चेयरमैन का कार्यभार संभालते हुए 24-25 अक्तूबर से प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही व बयान दर्ज करने का काम शुरू किया था। उन्होंने 24 दिसंबर 2021 को रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया। आयोग का कार्यकाल एक माह था, जिसे एक महीने और बढ़ाया गया।
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आयोग ने कार्यकाल एक महीने और बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने मंजूरी नहीं दी। चूंकि, किसान आंदोलन खत्म हो चुका है। किसानों पर दर्ज केस वापस लेने की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में सरकार ने आयोग का कार्यकाल बढ़ाना उचित नहीं समझा।
सरकार ने किसान आंदोलन समाप्त होने पर आयोग को भंग भी नहीं किया, इसलिए जस्टिस अग्रवाल को रिपोर्ट तैयार कर जल्द सौंपनी थी। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर अनेक खुलासे हो सकते हैं। सरकार 29 दिसंबर के बाद इसे सार्वजनिक करेगी या नहीं, इस पर नजरें टिकी रहेंगी। जस्टिस एसएन अग्रवाल इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।