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सामाजिक बहिष्कार के बाद 150 दलित परिवारों ने अपनाया बौद्ध धर्म, भाजपा को वोट न देने की खाई शपथ

Tue, 21 Aug 2018 09:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हांसी/हिसार (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हांसी/हिसार (हरियाणा) Updated Tue, 21 Aug 2018 09:51 AM IST
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150 Dalit families adopted Buddhist religion in Hisar
सम्मेलन में जुटे बौद्ध परिवार

हरियाणा के हिसार में जून 2017 में गांव भाटला में हैंडपंप से पानी भरने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बौद्ध धर्म परिवर्तन तक पहुंच गया। भाटला में सोमवार को गुरू रविदास मंदिर में कार्यक्रम का आयोजन कर करीब 150 अनुसूचित परिवार के लोगों ने अपना धर्म परिवर्तन करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया। इसमें रोहनात से आए दलित समुदाय के 22 लोग भी शामिल हुए।

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धर्म अपनाने से पहले बौद्ध भिक्षुओं ने अनुसूचित वर्ग के लोगों को धर्म दीक्षा दी। उत्तराखंड व सहारनपुर से आए बौद्ध भंतों धर्म सागर, भंते आनंद सागर व भंते निर्भय सागर ने धर्म दीक्षा की प्रक्रिया संपन्न करवाई। इस दौरान उन्होंने भविष्य में कभी बीजेपी को वोट न देने की शपथ भी ली।
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धर्म परिवर्त्तन के कार्यक्रम को लेकर रविवार रात से ही तैयारियां शुरू कर ली गई थी। सुबह 10:30 बजे कार्यक्रम शुरू हुआ। दिनेश खापड़ ने समारोह की अध्यक्षता की व श्रवण थुराना ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की। वक्ताओं ने अपने संबोधन में इस धर्म पविरर्तन के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेवार ठहराया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने ऐसे अधिकारियों की भर्ती की है, जो दलितों का उत्पीडऩ कर रहे है। 

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भाजपा को वोट न देने की खाई शपथ

150 Dalit families adopted Buddhist religion in Hisar
बौद्ध धर्म अपनाते दलित परिवार

धर्म परिवर्तन को लेकर प्रक्रिया भी चलती रही। दोपहर एक बज कर 35 मिनट पर अधिवक्ता रजत कल्सन कार्यक्रम में पहुंचे। उन्हें भविष्य में कभी भाजपा को वोट न करने की शपथ दिलवा कर व बौद्ध धर्म प्रक्रिया पूरी करवा कर दो बजे तक कार्यक्रम का समापन कर दिया गया। अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि पुलिस प्रशासन से मांग करने के बावजूद उन्हें सिक्योरिटी नहीं दी गई। इंतजार के बाद गांव का माहौल देखने के बाद वह कार्यक्रम में पहुंचे।

रजत कल्सन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार व पुलिस के ऐसे रवैये के चलते ही गांव में दो समुदायों के बीच यह समस्या पैदा हो गई है। इस मौके पर जिला भिवानी के रोहनात गांव के दलित समाज से संबंधित खजानी, दर्शना, भतेरी, संतरो, वेद सिंह, सुभाष, प्रकाश, धूप सिंह आदि उपस्थित थे।

धर्म सागर, भंते आनंद सागर व भंते निर्भय सागर ने कहा रोहनात गांव के लोगों की जमीन 1857 के गदर के बाद अंग्रेजों ने दूसरे गांवों के लोगों को नीलाम कर दी थी। जिसे वापस पाने के लिए करीबन 150 दलित परिवार पिछले 50 साल से सरकार के साथ लड़ाई लड़ रहे हैं। शहीदों के वंशज होने के बावजूद भी उन्हें आज तक अपनी जमीन वापस ना मिली है।

उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वह भी आने वाले समय में अपने गांव रोहनात में भी बौद्ध धर्म ग्रहण करने का काम करेंगे। इस अवसर पर मौके पर दिनेश खापड़, दिलबाग मुजादपुर, हरज्ञान जनागल, बुधराम सेलवाल, महासिंह, रामचंद्र, होशियार सिंह, भाटला गांव के दलित संघर्ष समिति के प्रधान बलवान सिंह, अजय भाटला, जय भगवान, पवन आदि उपस्थित थे।

यह था मामला

150 Dalit families adopted Buddhist religion in Hisar
बौद्ध धर्म अपनाते दलित परिवार
15 जून 2017 माह में गांव भाटला में हैंडपंप से पानी भरने को लेकर दो जातियों के युवाओं में विवाद हो गया था। अगस्त माह में किसी ने दलित समुदाय के बहिष्कार की मुनादी करवा दी। जिसके बाद मामला बढ़ता गया। 2 सितंबर को हाइकोर्ट की ओर से निर्देश के बाद सेशन जज गांव का दौरा करने पहुंचे थे। एससी-एसटी आयोग की टीम तो कभी हाईकोर्ट से कमीश्नर ने गांव में पहुंच कर दौरा किया था। इस मामले में एससी एसटी कमीशन में तथा हिसार अदालत में भी केस चल रहा है।

रजत कल्सन ने कहा मौजूदा सरकार नफरत के सहारे अपनी राजनीतिक चला रही है। इसी राजनीति के चलते हुए हरियाणा को तीन बार आग के हवाले कर चुकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय मे अन्य जिलों में भी सरकार की दलित विरोधी मानसिकता के चलते इस तरह के बोद्ध धर्म ग्रहण कार्यक्रम के आयोजन किये जाएंगे। बीजेपी को वोट ने करने की शपथ कराई जाएगी। जल्दी ही हांसी में भी 500 दलितों को बौद्ध धर्म ग्रहण कराया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सोमवार को 300 परिवारों ने धर्म परिवर्तन किया है।
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