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हरियाणा की जेलों में बंद 500 कैदियों को परिजनों का इंतजार
Updated Sun, 25 Jun 2017 01:15 AM IST
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हरियाणा की जेलों में बंद 500 कैदियों को परिजनों का इंतजार
छह महीनों में मुलाकात के लिए नहीं पहुंचा कोई रिश्तेदार
अपनों से बढ़ रही हैं दूरियां, संवेदनाएं हुईं कम
सर्वेश कुमार
पंचकूला।
अलग- अलग आपराधिक मामलों में सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों से रिश्तेदार भी मुलाकात से कतराने लगे हैं। आलम यह है कि हरियाणा की जेलों में बंद करीब 18000 में से 500 कैदी ऐसे हैं, जिनकी खैरियत पूछने भी छह महीनों में कोई भी रिश्तेदार नहीं पहुंचा। इनमें गैंगस्टर, बुजुर्ग कैदियों, परिजनों की हत्या मामले में बंद महिलाएं, बार बार अपराध को अंजाम देने वाले कैदियों समेत दूसरे प्रदेशों के लोग हैं, जिन्हें जेलों में कुछ ऐसे ही हालातों से गुजरना पड़ रहा है। हालांकि इसका अध्ययन कर रही संस्था के सदस्यों का मानना है कि मानवीय संवेदनाएं धीरे धीरे कम होने लगी हैं, जिसका असर जेलों में भी दिखने लगा है।
जलों में बंद कैदियों से मुलाकात के लिए अक्सर उनके परिजन या दोस्त पहुंचते हैं। लेकिन जेल प्रशासन की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि करीब 500 ऐसे कैदी हैं, जिनकी खैरियत जानने के लिए ही कोई नहीं पहुंचा। इनमें कुछ ऐसे गैंगस्टर्स, बुजुर्गों के अलावा कुछ ऐसी महिलाएं हैं जो परिजनों की हत्या के मामले में सजा भुगत रही हैं। बार बार आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले आरोपियों से भी परिजनों ने मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है, नतीजतन अगर अंदर हैं तो उनसे मुलाकात के लिए भी कम लोग पहुंचते हैं। जेल के अंदर उन्हें जरूरी सुविधाएं मिल रही हें जबकि बाहर आने पर फिर अपराध का सिलसिला दोबारा न शुरू हो जाए, इसलिए अधिकतर परिजन उनसे दूरियां बनाने लगे हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि जेलों में बंद होने के बाद चूंकि लोगों का सीधा वास्ता खत्म हो जाता है, इसलिए उनसे मिलना भी जरूरी नहीं समझते हैं। अपनी गलतियों की सजा भुगत रहे कैदियों के अपने भी अब धीरे धीरे किनारा करने लगे हैं।
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कोट
हरियाणा की जेलों में बंद ऐसे करीब 500 कैदी हैं, जिनसे मुलाकात के लिए छह महीनों के दौरान परिजन या दोस्त मिलने नहीं पहुुंचे। फिलहाल इस मामले से जुड़े तमाम पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।
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केपी सिंह, डीजी, जेल
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छह महीनों में मुलाकात के लिए नहीं पहुंचा कोई रिश्तेदार
अपनों से बढ़ रही हैं दूरियां, संवेदनाएं हुईं कम
सर्वेश कुमार
पंचकूला।
अलग- अलग आपराधिक मामलों में सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों से रिश्तेदार भी मुलाकात से कतराने लगे हैं। आलम यह है कि हरियाणा की जेलों में बंद करीब 18000 में से 500 कैदी ऐसे हैं, जिनकी खैरियत पूछने भी छह महीनों में कोई भी रिश्तेदार नहीं पहुंचा। इनमें गैंगस्टर, बुजुर्ग कैदियों, परिजनों की हत्या मामले में बंद महिलाएं, बार बार अपराध को अंजाम देने वाले कैदियों समेत दूसरे प्रदेशों के लोग हैं, जिन्हें जेलों में कुछ ऐसे ही हालातों से गुजरना पड़ रहा है। हालांकि इसका अध्ययन कर रही संस्था के सदस्यों का मानना है कि मानवीय संवेदनाएं धीरे धीरे कम होने लगी हैं, जिसका असर जेलों में भी दिखने लगा है।
जलों में बंद कैदियों से मुलाकात के लिए अक्सर उनके परिजन या दोस्त पहुंचते हैं। लेकिन जेल प्रशासन की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि करीब 500 ऐसे कैदी हैं, जिनकी खैरियत जानने के लिए ही कोई नहीं पहुंचा। इनमें कुछ ऐसे गैंगस्टर्स, बुजुर्गों के अलावा कुछ ऐसी महिलाएं हैं जो परिजनों की हत्या के मामले में सजा भुगत रही हैं। बार बार आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले आरोपियों से भी परिजनों ने मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है, नतीजतन अगर अंदर हैं तो उनसे मुलाकात के लिए भी कम लोग पहुंचते हैं। जेल के अंदर उन्हें जरूरी सुविधाएं मिल रही हें जबकि बाहर आने पर फिर अपराध का सिलसिला दोबारा न शुरू हो जाए, इसलिए अधिकतर परिजन उनसे दूरियां बनाने लगे हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि जेलों में बंद होने के बाद चूंकि लोगों का सीधा वास्ता खत्म हो जाता है, इसलिए उनसे मिलना भी जरूरी नहीं समझते हैं। अपनी गलतियों की सजा भुगत रहे कैदियों के अपने भी अब धीरे धीरे किनारा करने लगे हैं।
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कोट
हरियाणा की जेलों में बंद ऐसे करीब 500 कैदी हैं, जिनसे मुलाकात के लिए छह महीनों के दौरान परिजन या दोस्त मिलने नहीं पहुुंचे। फिलहाल इस मामले से जुड़े तमाम पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।
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केपी सिंह, डीजी, जेल