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हरियाणा की मौलिक शिक्षा निदेशक ने बाला प्रोजेक्ट की तैयारियों का लिया जायजा

Fri, 16 Jun 2017 01:59 AM IST
Updated Fri, 16 Jun 2017 01:59 AM IST
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हरियाणा की मौलिक शिक्षा निदेशक ने बाला प्रोजेक्ट की तैयारियों का लिया जायजा
मौलिक शिक्षा निदेशक ने ‘बाला’ प्रोजेक्ट की तैयारियों का लिया जायजा
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- निदेशालय की ओर पंचकूला में पायलट प्रोजेक्ट के तहत होगी शुरुआत
- जिले के चार स्कूलों को किया गया है शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
सेक्टर-12ए स्थित सार्थक मॉडल स्कूल में ‘बाला’ (बिल्डिंग एज लर्निंग एड) प्रोजेक्ट की तैयारियां चल रही हैैं। वीरवार को हरियाणा की मौलिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गरिमा मित्तल ने बाला प्रोजेक्ट की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान निदेशक ने बाला प्रोजेक्ट के प्रोग्राम ऑफिसर प्रमोद कुमार को निर्देश दिए कि इस प्रोजेक्ट जल्द पूरा किया जाए। जुलाई के पहले सप्ताह में इसका उद्घाटन हरियाणा के शिक्षा मंत्री करेंगे।
डॉ. गरिमा मित्तल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद स्कूल की दीवार और सीढ़ियां भी बच्चों को खेल खेल में पढ़ाई के कई सीख देंगी। बात गणित, विज्ञान, अंग्रेजी या फिर कला साहित्य की क्यों न हो। ये जानकारी स्कूली बच्चों को क्लास रूम में नहीं बल्कि स्कूल में प्रवेश करते ही स्कूली की बिल्डिंग के चित्र से मिलेगी। उन्होंने बताया कि हरियाणा मौलिक शिक्षा विभाग ‘बाला’ (बिल्डिंग एज लर्निंग एड) की पहल करने जा रहा है। इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पंचकूला की जाएगी। इसमें विभाग ने दो शहरी और दो ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों को बाला प्रोजेक्ट केे लिए चुना है। इसमें पंचकूला शहर के सार्थक मॉडल स्कूल और संस्कृति मॉडल स्कूल के अलावा पिंजौर और बरवाला के एक एक सरकारी स्कूल भी शामिल हैं। अगर ये प्रोजेक्ट हरियाणा सरकार को पसंद आया तो अलग साल पूरे प्रदेश में इसे लागू किया जाएगा।
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क्या है ‘बाला’ :
‘बाला’ (बिल्डिंग एज लर्निंग एड) एक ऐसी शुरुआत है, जिससे बच्चे और स्कूल के खाली स्थान के बीच संबंध दिखाई देता है. ‘बाला’ (बिल्डिंग एज लर्निंग एड) का उद्देश्य फर्श, दीवार, खंभे, सीढ़ियां, खिड़कियां, दरवाजे, छत, पंखे आदि का ऐसा इस्तेमाल है, जिससे कुछ न कुछ बच्चों को सीखने को मिले। इस क्रम में पंचकूला के ये चारों स्कूल पूरे राज्य में बाला प्रोजेक्ट के तहत एक मिशाल बन सकते हैं।
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जंतर मंतर की तर्ज पर समय का आकलन भी कर सकेंगे बच्चे :
‘बाला’ (बिल्डिंग एज लर्निंग एड) के तहत स्कूली बच्चे जंतर मंतर की तर्ज पर स्कूल की दीवार देखकर समय भी बता देंगे। इतना ही नहीं बच्चों को छोटे छोटे यंत्रों के माध्यम से हवा के रुख की जानकारी मिलेगी।

क्या होगा ‘बाला’ का तर्ज :
- सीढ़ियों पर गणित के फार्मूले लिखे जाएंगे।
- बच्चों के बैठने की डेस्क को अलग तहर से सजाया जाएगा। उन पर इंच टेप या चांद के चित्र बने होंगे।
- क्लास रूम की छतों पर नए डिजाइन के पेंट किए जाएंगे। जिसमें कलाकृतियां होंगी।
- दीवारों पर अलग अलग तरह के ट्री बनाए जाएंगे। जिसकी पत्ती पर हर छात्र स्कूल के बारे में अपने विचार लिखेंगे।
- कुछ दीवारों पर गणित और साइंस के फार्मूले लिखे होंगे।
- क्लास रूम के बोर्ड अलग तरह के होंगे।
- क्लास रूम के खिड़कियों के शीशों पर कलाकृतियां आ बनाई जाएंगी।
- बच्चों के बाथरूम की दीवारों पर समान्य ज्ञान की जानकारी मिलेगी।
- स्कूल की बड़ी दीवारों पर इल्यूजन (दृश्य भ्रम) बनाई जाएंगी।
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