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Hindi News ›   Chandigarh ›   126th birth anniversary of Swiss-born architect Pierre Jeannere

पियरे जेनरे की 126वीं जयंती: एक ऐसा वास्तुकार जिसने ली कार्बूजिए के साथ मिल चंडीगढ़ को बनाया था देश का सबसे खूबसूरत शहर 

Tue, 22 Mar 2022 11:59 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 22 Mar 2022 11:59 AM IST
सार

जेनरे के डिजाइन ली कार्बूजिए से काफी अलग होते थे। वे इमारतों में बड़े पत्थरों की दीवारें बनाते थे। कई लोग होते हैं जो अपने काम के बारे में लोगों को ज्यादा बोलते नहीं, जेनरे उन्हीं में से एक थे।

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126th birth anniversary of Swiss-born architect Pierre Jeannere
पियरे जेनरे। - फोटो : फाइल

विस्तार

ली कार्बूजिए के साथ मिलकर चंडीगढ़ को देश का सबसे खूबसूरत शहर बनाने वाले स्विट्जरलैंड मूल के वास्तुकार (आर्किटेक्ट) पियरे जेनरे की मंगलवार को 126वीं जयंती है। जेनरे ने चंडीगढ़ में स्कूल, घर, कॉलेज, अस्पताल, फर्नीचर, होटल आदि का निर्माण तो किया ही, यहां वास्तुकारों की पहली पीढ़ी भी तैयार की। 

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जानकार कहते हैं कि जेनरे के डिजाइन ली कार्बूजिए से काफी अलग होते थे। वे इमारतों में बड़े पत्थरों की दीवारें बनाते थे। कई लोग होते हैं जो अपने काम के बारे में लोगों को ज्यादा बोलते नहीं, जेनरे उन्हीं में से एक थे। उन्होंने चंडीगढ़ शहर को 15 साल दिए और यहां सबसे ज्यादा काम किया। उन्हें चंडीगढ़ से इस कदर प्यार था कि अपनी मौत के बाद वह अपनी अस्थियों को यहीं विसर्जित कराना चाहते थे। उनकी अंतिम इच्छा के मुताबिक, निधन के बाद उनकी अस्थियां यहां लाई गईं और उन्हें सुखना में प्रवाहित किया गया था। जेनरे की जयंती पर आइए इन छह बिंदुओं से उनकी शख्सियत को समझे हैं।    

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1. कौन थे पियरे जेनरे 

चंडीगढ़ को एक व्यवस्थित और खूबसूरत शहर बनाने में स्विस-फ्रांसिसी वास्तुकार ली कार्बूजिए के साथ पियरे जेनरे की भूमिका काफी अहम रही। वह ली कार्बूजिए के सहयोगी थे। हालांकि कई जानकारों का कहना है कि पियरे जेनरे ने चंडीगढ़ के लिए ली कार्बूजिए से भी ज्यादा काम किया है लेकिन वह अपने काम के बारे में ज्यादा बोलते नहीं थे। उनका जन्म 22 मार्च 1896 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में हुआ था। एक युवा छात्र के रूप में वह एक शानदार चित्रकार, कलाकार और वास्तुकार थे। वह अपने चचेरे भाई ली कार्बूजिए से बहुत प्रभावित थे।

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2. 1950 से लेकर 1965 तक रहे चंडीगढ़ में

पियरे जेनरे 1950 से लेकर 1965 तक चंडीगढ़ में रहे। चंडीगढ़ के निर्माण के दौरान वह सेक्टर-5 के मकान नंबर-57 में रहते थे। ये मकान आज भी है। अब इसे जेनरे म्यूजियम का रूप दिया जा चुका है। यह घर भी उन्होंने खुद ही डिजाइन किया था। वर्ष 2017 में इसे ठीक कराने के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने उद्घाटन किया था। यह घर सुखना लेक के ठीक सामने पार्किंग की पिछली साइड में कुछ मीटर की दूरी पर है। यहां सिर्फ जेनरे से जुड़ी चीजें ही रखी गईं हैं।

3. भवन से लेकर मैनहोल का ढक्कन तक किया डिजाइन

पियरे जेनरे ने शहर के स्कूल, घर, कॉलेज, अस्पताल, होटल आदि को डिजाइन किया। इसके अलावा फर्नीचर व मैनहोल का ढक्कन भी उन्होंने ही डिजाइन किए। जानकार बताते हैं कि पियरे ने तीन तरह के मैनहोल ढक्कन डिजाइन किए थे। ये तीनों भले ही देखने में एक से लगते हों, लेकिन गौर से देखने पर तीनों के डिजाइन अलग-अलग नजर आते हैं। शहर में वास्तुकारों की पहली पीढ़ी को प्रशिक्षित करने का श्रेय भी पियरे जेनरे को ही जाता है। 

4. चंडीगढ़ में पियरे जेनरे की निशानियां

ली कार्बूजिए सेंटर, सेक्टर-3 और 4 स्थित एमएलए हॉस्टल, टाउन हॉल बिल्डिंग-17, पीयू का गांधी भवन, सेंट्रल लाइब्रेरी (पीयू), पीयू का एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिस, एसी जोशी लाइब्रेरी (पीयू), फाइन आर्ट्स बिल्डिंग व म्यूजियम (पीयू), पीयू के कई हॉस्टल, सेक्टर-2, 3, 7, 11, 15, 20, 22, 24, 27, 28 में सरकारी घर, सीसीईटी-26, सेक्टर-7, 16, 22 और 23 में नर्सरी स्कूल, सेक्टर-22 का सेकेंडरी स्कूल, जीएमएसएसएस-10, कई तरह के फर्नीचर व अन्य। 

5. चंडीगढ़ से इतना प्यार, कि अस्थियां भी सुखना में विसर्जित की गईं 

पियरे जेनरे को चंडीगढ़ से इस कदर से प्यार था कि उनकी आखिरी ख्वाहिश थी कि वह आखिरी सांस चाहे कहीं भी लें, उनकी अस्थियों को चंडीगढ़ में ही प्रवाहित किया जाए। 1967 में उनकी मृत्यु स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हुई थी। तीन साल बाद साल 1970 में उनकी भतीजी पियरे जेनरे की अस्थियां लेकर चंडीगढ़ पहुंचीं, जिसे सुखना लेक में विसर्जित किया गया।

6. पियरे जेनरे ने जो फर्नीचर डिजाइन किए, उनकी कीमत लाखों में

पियरे जेनरे के काम को पसंद करने वालों की संख्या बहुत हैं। उनके चाहने वाले कीमत की परवाह किए बिना उनके द्वारा डिजाइन किए गए सामानों को खरीदते हैं। उनके डिजाइन किए गए कई फर्नीचर चंडीगढ़ में जगह-जगह रखे गए हैं। इन फर्नीचरों की मांग कितनी है, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि वर्ष 2020 में चंडीगढ़ का एक सोफा विदेश में करीब 32 लाख रुपये में बिका था।

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