दिशा समिति में उठा मामला: लिंगानुपात बढ़ाने में पहली छमाही में पिछड़े 12 जिले, 2021 की तुलना में गिरावट दर्ज
लड़कियों के जन्म में गिरावट आने वाले जिलों में मुख्यमंत्री का खुद का गृह जिला करनाल और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री कमलेश ढांडा का गृह जिला भी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपी है।
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हरियाणा के 12 जिले 2022 की पहली छमाही में लिंगानुपात बढ़ाने में पिछड़ गए हैं। 2021 की तुलना जनवरी से जून तक के इनके लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, ओवरऑल लिंगानुपात 914 से बढ़कर 916 हुआ है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य एक हजार लड़कों के मुकाबले 950 लड़कियों तक पहुंचना है। 2019 में रिकॉर्ड लिंगानुपात 923 रहा है, उसके बाद नीचे ही लुढ़के।
लिंगानुपात में गिरावट का मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल के संज्ञान में है। बीते 22 अगस्त को हुई दिशा समिति की बैठक में यह एजेंडा भी शामिल था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अफसरों के पेच कसने के साथ ही निर्देश दिए हैं कि लिंगानुपात बढ़ाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लिंगानुपात तेजी से न बढ़ने के कारण जानने के लिए भी कहा गया है।
लड़कियों के जन्म में गिरावट आने वाले जिलों में मुख्यमंत्री का खुद का गृह जिला करनाल और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री कमलेश ढांडा का गृह जिला भी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपी है। भ्रूण लिंग जांच करने वाले केंद्रों के खिलाफ पीएनडीटी एक्ट के तहत कार्रवाई कर रहे हैं। लिंगानुपात गिरने वाले जिलों में जून तक 58 छापे मारे हैं। जिन केंद्रों को भ्रूण लिंग जांच में शामिल पाया है, उन्हें बंद करने और अन्य कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
जिला वार लिंगानुपात में गिरावट
- जिला 2021 2022
- कुरुक्षेत्र 921 894
- पंचकूला 930 905
- करनाल 912 888
- फरीदाबाद 983 879
- महेंद्रगढ़ 904 881
- रेवाड़ी 903 883
- रोहतक 945 929
- झज्जर 895 881
- चरखी दादरी 919 910
- पानीपत 918 910
- हिसार 925 917
- मेवात 926 919
- कैथल 913 907
830 से 916 तक पहुंचे, हासिल करेंगे लक्ष्य: ढांडा
महिला एवं बाल विकास की राज्य मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि 2011 में हरियाणा में एक हजार लड़कों पर 830 लड़कियां ही पैदा हो रही थीं। 2022 में 916 तक पहुंच गए हैं। यह 2015 में पानीपत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से शुरू कि गए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का नतीजा है। नोडल विभाग के नाते अच्छा काम हो रहा है।
स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। लिंगानुपात में थोड़ी कमी देखने को मिली है, यह अस्थायी है। सामाजिक स्तर पर बदलाव के लिए अहम कदम उठा रहे हैं। 12 लाख जागरूकता रैलियां की हैं।
44 लाख 76 हजार बेटियों के जन्म पर कार्यक्रम किए। 23 लाख 81 हजार साक्षरता अभियान चलाए। 15 लाख स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खुद अभियान की समीक्षा कर रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग हर महीने व त्रैमासिक स्तर पर समीक्षा बैठक करता है। लिंगानुपात बढ़ाने के लिए मुख्यालय अधिकारियों को फील्ड में भेजते हैं।
सामाजिक सुरक्षा की भावना जगानी होगी: सांगवान
जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष और समाज विज्ञानी डॉ. जगमति सांगवान ने कहा कि लड़कियों को लेकर अभिभावकों में सामाजिक सुरक्षा की भावना जगानी होगी। लिंगानुपात बढ़ाने की प्रक्रिया की कमियों को दूर करना जरूरी है।
जिलों से गलत आंकड़े नहीं दिए जाने चाहिए। कमजोर वर्गों को सुदृढ़ करना होगा ताकि वे बेटियों को बोझ न समझें। सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक तौर पर भी कदम उठाने की जरूरत है। बेटियों को प्रोत्साहन, रोजगार और सुरक्षा की दिशा में काम करना होगा।
2015 से अब तक लिंगानुपात
- 2015 876
- 2016 900
- 2017 914
- 2018 914
- 2019 923
- 2020 922
- 2021 914
- 2022 916 जून तक