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अब दसवीं पास ही बन सकेंगे सरपंच, जानिए क्या है ये फैसला

Tue, 11 Apr 2017 09:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 11 Apr 2017 09:20 AM IST
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10 ths pass will fight panchayt election in punjab
पेयजल एवं सेनिटेशन मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा
सरपंच और पंच को दसवीं पास होना जरूरी होने वाला है। यानी अब आपकी पंचायतों के सरपंच पढ़े लिखे होंगे। पंजाब सरकार ने पड़ोसी राज्य हरियाणा की तर्ज पर सूबे में पंचायती नुमाइंदों के चुनाव में शिक्षा को महत्व देने का फैसला किया है। पंजाब के गांवों में भी अब पंच व सरपंच पढ़-लिखे होंगे। राज्य मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में इस बारे में कोई फैसला लिया जा सकता है। यह कहना है पंजाब के पंचायत, पेयजल एवं सेनिटेशन मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा का। 
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उन्होंने कहा कि पंचों और सरपंचों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता तय करने पर विचार किया जा रहा है। वे स्वयं भी पंचायती नुमाइंदों की शैक्षिक योग्यता तय करने के पक्षधर हैं। पढ़े-लिखे नुमाइंदे अपने गांवों के विकास में पूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और गांवों को मिलने वाली ग्रांट का सही ढंग से इस्तेमाल कर ग्रामीणों की मदद कर सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल की अगली बैठक 20 अप्रैल को होने की संभावना है। उम्मीद है कि उस बैठक में इस मुद्दे पर भी सरकार कोई फैसला लेगी। सोमवार को पंजाब सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बाजवा ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान सूबे की पंचायतों का जो हाल हो गया है, उसमें यह भी देखने में आया है कि पंचायत सचिव व अन्य अधिकारी पंचों-सरपंचों के अनपढ़ होने का फायदा उठाते रहे हैं।
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अनपढ़ पंचों-सरपंचों से अधिकारी किसी भी कागज में साइन करवा लेते हैं और इससे पंचायत को मिली ग्रांट में हेराफेरी होती है। बाद में इसका दोष पंच-सरपंच के सिर आ जाता है। 

एक करोड़ से अधिक ग्रांट लेने वाले गांवों की पंचायतों से मांगा हिसाब

10 ths pass will fight panchayt election in punjab
पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा
पंचायत मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने जिन गांवों को एक करोड़ रुपये से अधिक की ग्रांट राशि दी थी, वहां विकास कार्य उस हिसाब से दिखाई नहीं दे रहे। आखिर पैसा कहां गया?  ऐसे में संबंधित पंचायतों से ग्रांट राशि का हिसाब मांगा गया है। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते तक इस बाबत रिपोर्ट आने पर कोई बड़ा खुलासा होने से इंकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा केंद्र सरकार के फैसले के अनुसार सूबे में पंचायतों का थर्ड पार्टी आडिट अवश्य करवाया जाएगा। यह नहीं कराए जाने की स्थिति में पंचायतों को नए वित्त वर्ष में ग्रांट नहीं मिल सकेगी। 

पंचायतों का सोशल ऑडिट कराने की उठी मांग
पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान पंचायतों में हुई ग्रांट की बंदरबांट को लेकर थर्ड पार्टी आडिट कराने का एलान कर दिया है लेकिन ज्यादातर कांग्रेस विधायकों का मानना है कि इस पूरे मामले का सोशल ऑडिट भी कराया जाना चाहिए। 
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