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Karnataka: हाईकोर्ट ने बैंक को ऋण वसूली के लिए सेवानिवृत्त कर्मी की पूरी पेंशन काटने से रोका, दिया ये निर्देश

Fri, 28 Mar 2025 01:51 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 28 Mar 2025 01:51 PM IST
सार

Karnataka: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केनरा बैंक को एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी से बकाया ऋण वसूलने के लिए उसकी पेंशन में से 50 प्रतिशत से अधिक की कटौती करने से रोक दिया है। क्या है पूरा मामला आइए जानते हैं।

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Karnataka HC restricts bank from deducting full pension of retired employee for loan recovery
कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केनरा बैंक को निर्देश दिया है कि वह किसी सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी से बकाया ऋण वसूलने के लिए उसकी पेंशन में से 50 प्रतिशत से अधिक की कटौती न करे।

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अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि पेंशन सेवानिवृत्त लोगों के लिए वित्तीय सुरक्षा का काम करती है और इसे धोखाधड़ी, जालसाजी या कदाचार के मामलों को छोड़कर अन्य मामलों में पूरी तरह से ऋण चुकौती में नहीं लगाया जाना चाहिए।
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न्यायमूर्ति एसजी पंडित ने फैसला सुनाते हुए इस बात पर जोर दिया कि बैंकों को बकाया राशि वसूलने का कानूनी अधिकार है, लेकिन उन्हें पेंशनभोगियों की आजीविका की सुरक्षा करने वाले नियमों का पालन करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि पेंशनभोगी की वित्तीय स्थिरता आवश्यक है, और उन्हें ऋण चुकाने के लिए अपनी पूरी पेंशन छोड़ने के लिए मजबूर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होगा, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है। यह मामला अदालत के समक्ष 70 वर्षीय मुरुगन ओके की ओर से लाया गया। जो केनरा बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और वर्तमान में केरल के त्रिशूर में रहते हैं।

मुरुगन 30 नवंबर 2014 को सेवानिवृत्त हुए थे और अपनी पेंशन के एक हिस्से से लगातार अपने लोन की ईएमआई का भुगतान कर रहे थे। हालांकि, जुलाई 2024 से, केनरा बैंक ने बकाया चुकाने के लिए उनकी पूरी पेंशन काटनी शुरू कर दी, जिससे उन्हें कानूनी हस्तक्षेप की मांग करनी पड़ी। उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि बैंक को उस शैक्षिक ऋण पर दंडात्मक ब्याज लगाने से रोका जाए, जिसके लिए वह अपनी बेटी के साथ सह-देनदार थे।


केनरा बैंक ने तर्क दिया कि मुरुगन पर 8.5 लाख रुपये बकाया हैं और इस बात पर जोर दिया कि बकाया राशि वसूलना उसके अधिकार में है। हालांकि, अदालत ने फैसला सुनाया कि बैंक ऋण वसूली के लिए उनकी पेंशन का केवल 50 प्रतिशत ही काट सकता है और सुझाव दिया कि वह अन्य कानूनी रूप से स्वीकार्य रास्ते तलाशें। न्यायमूर्ति पंडित ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यहां तक कि अभी भी सेवारत कर्मचारियों के लिए भी ऋण वसूली आमतौर पर उनके हाथ में मिलने वाले वेतन के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होती है। उन्होंने कहा कि पेंशनभोगियों की वित्तीय भलाई सुनिश्चित करने के लिए यही सिद्धांत उन पर भी लागू किया जाना चाहिए।

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