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PMI: महंगाई के बाद भी अप्रैल में विर्निमाण क्षेत्र की गतिविधियों में रफ्तार, अर्थव्यवस्था में सुधार के मिले संकेत

Mon, 02 May 2022 02:48 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीपक चतुर्वेदी Updated Mon, 02 May 2022 02:48 PM IST
सार

आईएचएस मार्किट की रिपोर्ट के अुनसार, अप्रैल महीने में मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई इंडेक्स 54.7 फीसदी रहा, जो कि मार्च महीने में 54.0 था। जबकि फरवरी महीने में 54.9 के स्तर पर था। उम्मीद जताई जा रही है कि ये वृद्धि आने वाले समय में भी जारी रहेगी।

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Indias manufacturing PMI quickens in April amid high inflation signs of recovery in the economy
Manufacturing - फोटो : STUDDS Accessories Ltd

विस्तार

देश में बढ़ती महंगाई के बीच अप्रैल महीने में विर्निमाण क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार देखने को मिला है। मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई इंडेक्स 54.7 फीसदी रहा, जो कि मार्च महीने में 54.0 था। गौरतलब है कि 50 से ऊपर पीएमआई संबंधित क्षेत्र में विस्तार को प्रदर्शित करता है, जबकि इसका 50 से नीचे पहुंचा संकुचन को दर्शाता है। 

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मार्च में 54.0 दर्ज की गई थी ग्रोथ 
आईएचएस मार्किट की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में उत्पादन में उछाल के साथ ही फैक्ट्री ऑर्डर में भी तेजी देखने को मिली है। इसमें कहा गया कि बीते महीने कंपनियों ने ज्यादा कर्मचारियों की भर्ती की है। हालांकि मार्च के मुकाबले यह ग्रोथ मामूली है। बता दें कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण मार्च महीने में विर्निमाण क्षेत्र का पीएमआई इंडेक्स घटकर 54 के स्तर पर पहुंच गया था, जो कि बीते छह महीने का निचला स्तर था। फरवरी में यह इंडेक्स 54.9 के स्तर पर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा और कमोडिटी के भाव बढ़ने का प्रभाव इस सेक्टर पर पड़ा है। 
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वृद्धि जारी रहने की उम्मीद 
एस एंड पी ग्लोबल की निदेशक पोलीएमा डि लीमा ने कहा कि लागत बढ़ने की दौरान भी फैक्ट्रियों ने अपना उत्पादन बढ़ाया है और यह आने वाले समय में भी जारी रहने की उम्मीद है। इस संबंध में जारी रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ कंपनियों का अनुमान है कि यह वृद्धि आने वाले 12 महीने तक जारी रहेगी, जबकि कुछ का मानना है कि इसमें रुकावट आ सकती है।  यहां बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई को काबू में करने के मकसद से जून में होने वाली एमपीसी की बैठक में नीतिगत दरों में इजाफा कर सकता है। 

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