Gold Rates 2020-21: सोना: चालू वित्त वर्ष में कोरोना से प्रभावित हुआ दाम, विशेषज्ञ से जानें अगले साल सस्ता होगा या महंगा
- अगले वित्त वर्ष में सोने में 20 फीसदी के करीब तेजी आ सकती है- अर्थशास्त्री आकाश जिंदल।
- इस वित्त वर्ष में सोने में काफी तेजी आई। धातु ने उच्चतम स्तर को छुआ।
- चालू वित्त वर्ष 2020-21 के पहले 11 महीनों में सोने का आयात 3.3 फीसदी घटा है।
विस्तार
चालू वित्त वर्ष 2020-21 के पहले 11 महीनों में सोने का आयात 3.3 फीसदी घटकर 26.11 अरब डॉलर रह गया। सोने का आयात देश के चालू खाते के घाटे को प्रभावित करता है। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में पीली धातु का आयात 27 अरब डॉलर रहा था। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सोने के आयात में कमी से देश के व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिली है। चालू वित्त वर्ष के पहले 11 माह में व्यापार घाटा कम होकर 84.62 अरब डॉलर रह गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 151.37 अरब डॉलर रहा था। भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोने का आयातक देश है। मुख्य रूप से आभूषण उद्योग की मांग को पूरा करने के लिए सोने का आयात किया जाता है। मात्रा के हिसाब से भारत सालाना 800 से 900 टन सोने का आयात करता है।
वित्त वर्ष 2020-21 में सोने में आई तेजी- अर्थशास्त्री आकाश जिंदल
अर्थशास्त्री और बाजार विशेषज्ञ आकाश जिंदल ने अमर उजाला को बताया कि इस वित्त वर्ष में सोने में काफी तेजी आई। सोने ने सबसे उच्चतम स्तर को छुआ। यह 55 हजार से 56 हजार तक पहुंच गया। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना वायरस महामारी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था में घबराहट थी। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में डर होता है, तो सोने की तरफ लोगों का रुझान बढ़ता है क्योंकि सोने को एक सेफ-हैवेन एसेट यानी अनिश्चित्ता के समय निवेश के लिए एक बढ़िया एसेट माना जाता है। इसलिए लोगों ने सोने में पैसा लगाया। पूरे साल निवेश के लिए ज्यादा जोखिम वाले विकल्प यानी शेयर बाजार में गिरावट आई। वित्त वर्ष के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स काफी नीचे आया। जब कोरोना की वजह से लॉकडाउन हुआ, तो वैश्विक शेयर बाजार में भी गिरावट आई। रियल एस्टेट सेक्टर में भी मंदी छाई क्योंकि लोग उस समय घबराए हुए थे। इसलिए लोगों ने शेयर बाजार और रियल एस्टेट में पैसा नहीं लगाया। वे अपने पैसे को सुरक्षित रखना चाहते थे। इस वजह से उस समय सोने में काफी वृद्धि दर्ज की गई।
निवेश के लिए अच्छे विकल्प के तौर पर सामने आया सोना
ब्याज की बात करें, तो आकाश जिंदल ने बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान संकट के समय में ब्याज से लोगों को कम लाभ मिला था। भारत में एफडी पर ब्याज दर पांच से 5.50 फीसदी तक हो गया है। इसपर टैक्स भी देना पड़ता है। दुनियाभर में एफडी पर ब्याज दर एक या दो फीसदी तक ही रह गया था, वहीं कुछ देशों में तो यह नेगेटिव भी हो गया था। यानी ब्याज मिलने के बजाय लोगों को ब्याज देना पड़ा। ऐसे में जब एफडी और बॉन्ड में कम लाभ हो रहा था, तब निवेशकों के लिए सोना एक अच्छे विकल्प के तौर पर सामने आया। इसलिए इस वित्त वर्ष सोने में जोरदार वृ्द्धि आई। मंदी और कोरोना के कारण सोना लाभदायक रहा।
कैलेंडर वर्ष की बात करें, तो जनवरी 2020 से 15 मार्च तक कोरोना का भय कम हुआ। बाजार में उछाल आया। कारोबार फिर से शुरू हुए। रियल एस्टेट में भी सुधार देखने को मिला। दिल्ली से सटे गुरुग्राम में कई प्लॉट के दाम 35 से 40 फीसदी बढ़े। चंडीगढ़ में 30 फीसदी तक का उछाल आया। मुंबई में भी प्लॉट के दाम काफी बढ़े हैं। जनवरी 2020 से 15 मार्च तक अर्थव्यवस्था खुली, तो लोगों का रुझान दोबारा से बाजार और रियल एस्टेट की ओर बढ़ा और सोना सस्ता होने लगा। लेकिन पिछले 15 दिनों से दोबारा देश में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र में सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं। भारत से बाहर भी कई देशों में मामले बढ़ रहे हैं।
अगले वित्त वर्ष में 20 फीसदी और महंगा हो सकता है सोना
एक अप्रैल 2021 से शुरू हो रहे वित्त वर्ष में सोने में 20 फीसदी के करीब तेजी आ सकती है। इसलिए अर्थशास्त्री आकाश जिंदल ने यह सलाह दी है कि अगर आपको इस साल शादी के लिए या किसी और उद्देश्य के लिए सोना लेना है, तो यह समय खरीदारी के लिए सही है। आने वाले समय में सोने की कीमत काफी बढ़ सकती है। इसलिए आपको निवेश या ज्वैलरी, जिस भी उद्देश्य से सोना खरीदना हो, ये समय उसके लिए उपयुक्त है।
खुदरा आभूषण उद्योग में तेजी की उम्मीद- इंडिया रेटिंग्स
सोने की कीमतों में भारी गिरावट के बाद खुदरा आभूषण उद्योग में इस साल 30-35 फीसदी तेजी की उम्मीद है। इंडिया रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में कहा, आर्थिक गतिविधियों के कोरोना पूर्व पर पहुंचने और सोने की कीमतों में नरमी से सुधार को गति मिलेगी। इससे पहले 2020-21 की तीसरी तिमाही में त्योहारी सीजन, शादी-विवाह के कारण मांग बढ़ने और कीमतों में 10 फीसदी गिरावट के कारण सोने की मांग में तेजी देखने को मिली थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मांग में वृद्धि की वजह से चालू वित्त वर्ष के मुकाबले 2021-22 में आभूषणों की मांग 30-35 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है।
विक्रेताओं का मुनाफा बढ़ा
इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआती तीन तिमाहियों के दौरान बड़े आभूषण विक्रेताओं का मुनाफा कोरोना के पूर्व स्तर से 7.7 फीसदी बढ़ा है। 2019-20 के दौरान उनका कुल मुनाफा 5.9 फीसदी था। इसके अलावा, आयात शुल्क घटाने, मेकिंग शुल्क में नरमी और कीमतों में गिरावट से बड़े विक्रेताओं के मुनाफे में और तेजी आ सकती है, जो कोरोना पूर्व स्तर के मुकाबले 25-50 फीसदी ज्यादा रहने की उम्मीद है।