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DEBT: राजकोषीय घाटा पूरा करने के लिए केंद्र का बड़ा कदम, बाजार से 8.2 लाख करोड़ उधार लेने की तैयारी में सरकार

Sat, 28 Mar 2026 06:13 AM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Sat, 28 Mar 2026 06:13 AM IST
सार

वित्त मंत्रालय ने बताया कि केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-सितंबर अवधि में राजस्व घाटा पूरा करने के लिए 8.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की योजना बना रही है। इसमें 15,000 करोड़ रुपये के संप्रभु ग्रीन बॉन्ड शामिल हैं। पहले से 17.2 लाख करोड़ रुपये सकल बाजार उधार प्रस्तावित था, जो अदला-बदली के बाद 16.09 लाख करोड़ रुपये रह गया। 

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Central Government is planning to borrow ₹8.2 lakh crore from the market News In Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

वित्त मंत्रालय ने बताया कि केंद्र सरकार राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए 2026-27 की अप्रैल-सितंबर अवधि के दौरान प्रतिभूतियों के माध्यम से 8 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में सकल बाजार उधार 17.20 लाख करोड़ रुपये था। बजट पेश होने के बाद से राजकोषीय प्रतिभूतियों की अदला-बदली की गई, जिससे सकल बाजार उधार घटकर 16.09 लाख करोड़ रुपये रह गया।

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मंत्रालय ने कहा, 16.09 लाख करोड़ रुपये में से, 8.20 लाख करोड़ रुपये (51 प्रतिशत) पहली छमाही में दिनांकित प्रतिभूतियों के माध्यम से उधार लेने की योजना है, जिसमें 15,000 करोड़ रुपये के संप्रभु ग्रीन बॉन्ड शामिल हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत अनुमानित राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने का प्रस्ताव रखा था। पूर्ण रूप से, 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा 16.9 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। बयान के अनुसार, 8.2 लाख करोड़ रुपये का सकल बाजार उधार 26 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
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संस्थागत और खुदरा निवेशकों को अपने निवेश की कुशलतापूर्वक योजना बनाने में सक्षम बनाने और सरकारी प्रतिभूति बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता प्रदान करने के लिए, सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक के परामर्श से इस अवधि के दौरान प्रति सप्ताह 28,000 करोड़ रुपये से 34,000 करोड़ रुपये तक का उधार लेने की योजना बनाई है। 

पांच फीसदी हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित
सरकार ने कहा कि इस कैलेंडर में शामिल सभी नीलामियों में गैर-प्रतिस्पर्धी बोली की सुविधा होगी, जिसके तहत अधिसूचित राशि का पांच प्रतिशत खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित होगा। सरकार पहले की तरह अधिसूचित राशि, निर्गमन अवधि, परिपक्वता अवधि आदि के संदर्भ में उपरोक्त कैलेंडर में संशोधन करती रहेगी। बाजार की बदलती स्थितियों और अन्य प्रासंगिक कारकों के आधार पर, गैर-मानक परिपक्वता वाले उपकरण, फ्लोटिंग रेट बॉन्ड, मुद्रास्फीति वाले बॉन्ड सहित विभिन्न प्रकार के उपकरण जारी करने के लिए लचीलापन बनाए रखेगी।

राज्यों के कर्ज लेने की लागत बढ़कर चार साल में सबसे ज्यादा
भारत में राज्यों के लिए कर्ज लेना तेजी से महंगा होता जा रहा है और शुक्रवार को हुई नीलामी में इसकी साफ झलक देखने को मिली। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, कई राज्यों की बॉन्ड यील्ड 8 फीसदी के ऊपर पहुंच गई। ये जुलाई, 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। इस नीलामी में राज्यों ने करीब 40,000 करोड़ रुपये जुटाए, जिसमें से लगभग 45 फीसदी रकम 8 से 8.09 फीसदी की ऊंची ब्याज दर पर उठानी पड़ी। पिछली नीलामी में यह दर 7.60 से 7.88 फीसदी के बीच थी।

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क्या कहना है विशेषज्ञों का?
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज दरों में यह उछाल कई वजहों से आई है। इसमें बाजार में कर्ज की अधिक सप्लाई, वैश्विक स्तर पर बढ़ती यील्ड, और पश्चिम एशिया संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी शामिल है। इसके अलावा इरडा के प्रस्तावित नियमों ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। इससे बीमा कंपनियों को राज्य बॉन्ड में निवेश पर अधिक पूंजी अलग रखनी पड़ सकती है।

इससे इन बॉन्ड की मांग कमजोर पड़ रही है और यील्ड बढ़ रही है। ट्रेडर्स के मुताबिक, इस बार नीलामी में मांग भी खास मजबूत नहीं रही, खासकर बीमा कंपनियों की ओर से, क्योंकि नए नियमों को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। वहीं, पश्चिम एशिया तनाव से तेल कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा उछाल आया है, जिससे महंगाई और वित्तीय संतुलन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसका असर केंद्र और राज्य दोनों के कर्ज पर दिख रहा है। आगे बीमा कंपनियों की मांग कम हो सकती है और राज्यों के बॉन्ड कम आकर्षक हो सकते हैं।

क्यों बढ़ रही है ब्याज दर
बाजार में ज्यादा कर्ज n बॉन्ड यील्ड में सामान्य बढ़ोतरी n इरडा के नए नियमों का असर n पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल कीमतों में उछाल n सरकारी बॉन्ड यील्ड मार्च में 28 बेसिस पॉइंट बढ़ी

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