Gold Silver Price: चांदी 3400 रुपये फिसली; सोना स्थिर, समझें वैश्विक उथल-पुथल के बीच इसके क्या मायने
पश्चिम एशिया में तनाव और घरेलू व वैश्विक शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच बीच 9 मार्च 2026 को भारत में सोने और चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने, चांदी के ताजा भाव, टैक्स और बाजार का पूरा सार यहां पढ़ें।
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विस्तार
डॉलर की मजबूती के चलते चांदी की कीमत में 3,400 रुपये की गिरावट आई और यह 2.68 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जबकि सोने की कीमत स्थिर रही। सोमवार को दिल्ली में चांदी की कीमतों में 3,400 रुपये की गिरावट आई और यह 2,68,300 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जबकि सोने का भाव लगभग स्थिर रहा और 1,64,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना रहा। अस्थिर वैश्विक बाजारों के बीच मजबूत अमेरिकी डॉलर ने कीमती धातुओं की मांग को कम कर दिया।
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, सफेद धातु (सोने) में लगातार तीसरे दिन गिरावट जारी रही और शुक्रवार के बंद भाव 2,71,700 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 3,400 रुपये या लगभग 1.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,68,300 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने कहा, "कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि से मुद्रास्फीति का दबाव फिर से बढ़ने की आशंका बढ़ गई है, जिसके चलते चांदी की कीमतों में पिछले सप्ताह की गिरावट जारी रही।"
ऊर्जा की बढ़ती कीमतें व्यापक मुद्रास्फीति की आशंकाओं को बढ़ावा देती हैं, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की गति में देरी हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि इस परिदृश्य से अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड को समर्थन मिला, जिससे बदले में कीमती धातुओं पर दबाव पड़ा।
इस बीच, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में मामूली 200 रुपये की वृद्धि हुई और यह 1,64,300 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गया। एसोसिएशन के अनुसार, पिछले बाजार सत्र में पीले धातु की कीमत 1,64,100 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।
वैश्विक स्तर पर, हाजिर सोने की कीमत 65.23 अमेरिकी डॉलर या 1.26 प्रतिशत गिरकर 5,105.89 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि चांदी की कीमत भी 0.53 प्रतिशत गिरकर 83.92 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
बाजार को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक
- मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल से जुड़े घटनाक्रमों के कारण निवेशकों का रुझान 'सुरक्षित निवेश' के तौर पर सोने-चांदी की तरफ बना हुआ है।
- औद्योगिक मांग: चांदी को न सिर्फ एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) सेक्टर से मिल रही मजबूत औद्योगिक मांग भी इसकी कीमतों को सपोर्ट दे रही है।
- टैक्स और लोकल फैक्टर: घरेलू खरीदारों को सोने और चांदी की कुल वैल्यू पर 3% वस्तु एवं सेवा कर चुकाना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, आभूषणों की खरीदारी पर डिजाइन और ब्रांड के आधार पर 5% से लेकर 35% तक मेकिंग चार्ज भी लागू होते हैं।
अब आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि सोने और चांदी दोनों में मौजूदा समय में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है और हालिया गिरावट एक सीमित दायरे में है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए, डिजिटल गोल्ड या गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ के जरिए एसआईपी का विकल्प बाजार की इस अस्थिरता को प्रबंधित करने के लिए एक कारगर रणनीति साबित हो सकता है। जब तक वैश्विक कूटनीतिक हालात और ब्याज दरों पर अनिश्चितता के बादल नहीं छंटते, कीमती धातुओं में यह मजबूती बने रहने की संभावना है।