दुनिया के हर धर्म से जुड़े तमाम किस्से-कहानियां होते हैं। पवित्र चीजें होती हैं, जिनको लेकर उस धर्म के अनुयायी क्रेजी होते हैं। ऐसी ही धार्मिक किंवदंती है 'द होली ग्रेल' की। ईसाई धर्म से जुड़े किस्से-कहानियों में आपने 'द लास्ट सपर' का जिक्र जरूर सुना होगा। अगर नहीं तो इस वाकये की एक पेंटिग तो जरूर देखी होगी, जिसे इटली के महान चित्रकार लिओनार्दो दा विंची ने बनाया था। इस पेंटिग में ईसा मसीह को अपने बारह धर्म प्रचारकों के साथ खाना खाते दिखाया गया है। इस पेंटिंग में खाने की थाली के साथ एक प्याला नजर आता है। इस प्याले को 'होली ग्रेल' के नाम से जाना जाता है।
आखिर कहां है ईसा मसीह का वो 'जादुई प्याला', जिसके इस्तेमाल से इंसान हो जाता है अमर
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ईसाई धर्म की मान्यता के मुताबिक, होली ग्रेल एक जादुई प्याला है, जिसके इस्तेमाल से इंसान अमर हो जाता है। इस प्याले से बहुत से किस्से-कहानियां और दावे जुड़े हैं। दुनिया के लगभग सभी प्राचीन चर्चों में ये प्याला रखा दिखाई दे जाएगा और सभी उसके असली होने का दावा करते हैं। अकेले यूरोप में ही करीब 200 जगहें दावा करती हैं कि उनके पास जो प्याला है वही असली होली ग्रेल है।
असली होली ग्रेल होने का दावा करने वाले तमाम ठिकानों में से एक है स्पेन का शहर वैलेंसिया। वैलेंसिया, स्पेन का तीसरा बड़ा शहर है। यहां आने पर आप को तरक्की के बावजूद वक्त के ठहर जाने का अहसास होता है। शहर पुराना है, बाजार और गलियां पुरानी हैं, मगर यहीं पर आप को चर्च के ठीक बगल में लोग कॉफी शॉप में गप लगाते भी दिख जाएंगे। वैलेंसिया के ही एक बहुत पुराने चर्च में होली ग्रेल होने का दावा किया जाता है। इस चर्च का नाम है वैलेंसिया कैथेड्रल। यहां रखा एक प्याला जिसे स्पेनिश जबान में सांतो चैलिस कहते हैं, उसके होली ग्रेल यानी वो प्याला जिसे प्रभु यीशु ने इस्तेमाल किया था, होने का दावा सदियों से किया जाता रहा है।
आज भी दुनिया भर से श्रद्धालु होली ग्रेल के दर्शन के लिए वैलेंसिया आते हैं। यहां तक कि पोप जॉन पॉल द्वितीय और पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने धार्मिक आयोजनों में इस प्याले का इस्तेमाल किया। होली ग्रेल का जिक्र बाइबिल में नहीं मिलता। ये तो बाद की धार्मिक कहानियों और लोक कथाओं का हिस्सा बना। होली ग्रेल का सबसे पहले जिक्र आया था, ब्रिटेन के राजा किंग ऑर्थर से जुड़े किस्से-कहानियों में। राजा ऑर्थर और उनकी सेना की वीरता के किस्से बताने वाले महाकाव्यों में फ्रेंच कवियों ने होली ग्रेल का जिक्र किया था। प्राचीन काल में फ्रांस के दो बड़े कवियों रॉबर्ट दी बोर्नो और शेरेटिन द ट्रॉय ने अपनी कविताओं में राजा आर्थर के जमाने की कहानियों को और बढ़ा चढ़ाकर लिखा। द ट्रॉय ने इसका देगची या बड़ी डिश के तौर पर जिक्र किया है।
श्रद्धालुओं के लिए होली ग्रेल यानी पवित्र प्याले का मजहबी महत्व होगा, लेकिन रिसर्चरों के लिए इसका साहित्यिक महत्व ज्यादा है। स्पेन के वैलेंसिया में रखे प्याले वाले कैथेड्रल को 'ला केपिला देल सेंतो चैलिस' कहते हैं। मतलब पवित्र प्याले का चर्च। यहां ये प्याला एक अलग कमरे में शीशे के फ्रेम में बंद है। प्याले के दोनों तरफ सोने के बड़े हैंडल हैं। जिस स्टैंड पर ये प्याला रखा है उसकी पेंदी पर पन्ना और माणिक्य जैसे कीमती पत्थर जड़े हैं। हालांकि फिल्मी कल्पनाओं में होली ग्रेल को एक साधारण से लकड़ी के प्याले के तौर पर दिखाया गया है। जैसे कि मशहूर हॉलीवुड सीरीज की फिल्म इंडियाना जोन्स एंड द होली ग्रेल में जिस पवित्र प्याले को दिखाया गया है वो लकड़ी का बना है। ऐसे में सोने और जवाहरात से जड़ा ये प्याला मन में सवाल पैदा करता है। चर्च के लोगों के मुताबिक इस स्टैंड पर जो छोटा सा कप रखा है वही असली होली ग्रेल है। इसके हैंडल और पेंदी मध्यकालीन दस्तकारी का नमूना है, जिसे अब से कुछ समय पहले ही इसके साथ जोड़ा गया है।