जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया में प्राकृतिक तौर पर कई परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। इससे सिर्फ इंसान ही प्रभावित नहीं है, बल्कि समुद्र के भीतर बसी एक बेहद खूबसूरत दुनिया भी इसकी मार झेल रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण समु्द्र का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे दुनिया की कोरल रीफ तेजी से सफेद पड़ती जा रही हैं और दम तोड़ रही हैं। ग्रेट बैरियर रीफ से लेकर फ्लोरिडा तक प्रवाल भित्तियां गंभीर संकट में हैं। अच्छी बात यह है कि वैज्ञानिकों ने इन्हें बचाने के लिए तरीका खोज लिया है, जिसके बारे में जानकर पहली बार में शायद आपको यकीन न हो। वैज्ञानिक कोरल रीफ को बचाने के लिए समुद्र के अंदर छाता लगाएंगे।
समुद्र के अंदर खुला छाता और फिर..., वैज्ञानिकों का अनोखा प्रयोग कर देगा हैरान
वैज्ञानिकों ने समुद्र में कोरल रीफ को तेज धूप और गर्मी से बचाने के लिए समुद्र के भीतर एक अनोखा छाता लगाएंगे। वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोग बारे में हैरान करने वाली जानकारी दी है।
गर्म पानी से क्यों सफेद पड़ता है कोरल?
कोरल रीफ सिर्फ पत्थर जैसी संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि इनके भीतर बेहद छोटे-छोटे शैवाल रहते हैं, जो कोरल को ऊर्जा देते हैं और उनके खूबसूरत रंगों को बनाए रखने में मदद करते हैं। लेकिन जब समुद्र का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है तो कोरल इन शैवालों को अपने शरीर से बाहर निकाल देते हैं। इसके बाद कोरल अपनी ऊर्जा का बड़ा स्रोत खो देते हैं और उनका रंग उड़ने लगता है, जिसे कोरल ब्लीचिंग कहा जाता है। अगर गर्मी लंबे समय तक रहती है, तो यही ब्लीचिंग कोरल की मौत की वजह भी बन सकती है।
2024 में किया था छाते का पहला टेस्ट
वैज्ञानिकों ने 2024 में फ्लोरिडा के पास न्यूफाउंड हार्बर में पहली बार इस अनोखे प्रयोग का परीक्षण किया था। नोवा साउथईस्टर्न यूनिवर्सिटी की समुद्री जीवविज्ञानी करेन एल नीली के नेतृत्व में टीम ने दो प्रजातियों के ब्रेन कोरल की कॉलोनियों पर विशेष छाया संरचनाएं लगाईं। उन्होंने कुल 10 कोरल कॉलोनियों पर 20 अस्थायी छाया संरचनाएं गईं, तो वहीं 20 अन्य कॉलोनियों को बिना छाया के नियंत्रण समूह में रखा गया। यह समुद्री छाते किसी आम छाते की तरह नहीं थे, जिन्हें पाइप और नायलॉन के कपड़े से तैयार किया गया था और कोरल से लगभघ 30 सेंटीमीटर ऊपर लगाया गया था।
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पानी को ठंडा करना नहीं था उद्देश्य
यहां पर वैज्ञानिकों की तरीका थोड़ा अलग था। इन छाया संरचनाओं का उद्देश्य समुद्र के पानी को ठंडा करना नहीं था, बल्कि कोरल तक पहुंचने वाली तेज धूप और खतरनाक विकिरण को कम करना मकसद था। क्योंकि गर्म समुद्री पानी के साथ जब तेज धूप और अल्ट्रावायलेट विकिरण का दबाव भी बढ़ता है, तो कोरल पर तनाव ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में छाया उन्हें कुछ समय के लिए राहत दे सकती है।
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वैज्ञानिकों के इस प्रयोग से निश्चित रूप से उम्मीद जगी है, लेकिन इसे ग्लोबल वार्मिंग का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। समुद्र का तापमान लगातार बढ़ रहा तो दुनिया की कोरल रीफ को लंबे समय तक सिर्फ छाया देकर बचाना बेहद मुश्किल होगा। फिर भी, जब समुद्री गर्मी की लहरें आती हैं, तब ऐसे अंडरवॉटर अम्ब्रेला संवेदनशील कोरल को महत्वपूर्ण अस्थायी राहत दे सकते हैं।