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इस बुलेट प्रूफ जैकेट के आगे AK-47 की गोलियां भी होंगी बेअसर

Sat, 12 May 2018 07:04 AM IST
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 12 May 2018 07:04 AM IST
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Bullet proof jacket developed in Defense materials and stores research and development establishment
बुलेट प्रूफ जैकेट
रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) कानपुर ने ऐसी बुलेट प्रूफ जैकेट विकसित की है जिस पर एके-47 से निकली स्टील की गोली भी बेअसर हो जाएगी। यह विश्व की ऐसी पहली बुलेट प्रूफ जैकेट है। खास बात यह है कि इसे गले से लेकर कमर तक पहना जा सकेगा ताकि किसी भी दिशा से आ रही गोली से जवानों को बचाया जा सकेगा। इस जैकेट को सेना ने पास कर दिया है। 1.5 लाख बुलेट प्रूफ जैकेट का आर्डर भी दिया है। टेक्नोलॉजी डे की पूर्व संध्या पर डीएमएसआरडीई में आयोजित पत्रकार वार्ता में यह जानकारी संस्थान के कार्यकारी निदेशक एसबी यादव और वैज्ञानिक डा. अशोक रंजन ने दी।
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कार्यकारी निदेशक ने बताया कि यह बुलेट प्रूफ जैकेट सेना के मानकों के सापेक्ष 10 किलो 600 ग्राम की तुलना में 10 किलो 400 ग्राम भार वाली है। इस बुलेट प्रूफ जैकेट की तकनीक भी चार फर्मों को ट्रांसफर की जा चुकी है। इसमें एक फर्म कानपुर की है जबकि अन्य फर्म दिल्ली, कोलकाता की हैं। डा. अशोक रंजन ने बताया कि इस बुलेट प्रूफ जैकेट में पॉलीमर के साथ सेरेमिक बोरान का प्रयोग किया गया है जो जैकेट को हल्की बनाता है। साथ ही यह इतनी सख्त है कि  स्टील की बनी गोली भी इसे भेद नहीं सकती है। उन्होंने बताया कि जैकेट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि गले से लेकर कमर तक के हिस्से को बचाया जा सके। 360 डिग्री कोण के अनुसार इसे तैयार किया गया है ताकि छिपकर मारी गई गोली से जवान को बचाया जा सके। वार्ता के दौरान वैज्ञानिक बीएन त्रिपाठी और राजेश जैस भी मौजूद रहे।
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माइनस 60 डिग्री तापमान पर भी नहीं गलेंगे हाथ  
डा. अशोक रंजन ने बताया कि संस्थान ने एक्सट्रीम कोल्ड वेदर ग्लब्स तैयार किए हैं। इनक ी खासियत यह है कि इन ग्लब्स को पहनने के बाद सियाचिन, जहां तापमान माइनस 40 से माइनस 60 तक चला जाता है, वहां पर भी जवानों के हाथ सुरक्षित रहेंगे। इसमें ऐसे फीचर जोड़े गए हैं जिससे उन्हें आर्द्रता का अहसास नहीं होगा। यह इतने आरामदायक और हल्के हैं कि जवानों को कोई परेशानी नहीं होगी। सेना ने ग्लब्स का कई चरणों में ट्रायल किया है। इसके बाद एक लाख ग्लब्स तैयार करने का आर्डर दिया है।
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पानी से आर्सेनिक, क्रोमियम भी साफ करेगा वाटर फिल्टर 
कार्यकारी निदेशक ने बताया कि संस्थान ने आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखकर पानी को शुद्घ करने वाला वाटर फिल्टर तैयार किया है जो लेड, आर्सेनिक, क्रोमियम युक्त पानी को भी साफ कर देगा। इस तकनीक से कानपुर, उन्नाव, जोधपुर, बंगाल के ऐसे क्षेत्र जहां पर क्रोमियम, लेड, आर्सेनिक युक्त पानी है की मात्रा अधिक है, को साफ और शुद्घ किया जा सकेगा। इसकी लागत मौजूदा बाजार में बिकने वाले वाटर फिल्टर से दो तिहाई कम होगी। इसका लैब ट्रायल पूरा कर लिया गया है। मानव पर इसके ट्रायल शुरू कर दिए हैं। बेहद कम स्थान पर रखे जाने वाला वाटर फि ल्टर एक साल बाद बाजार में आ जाएगा।
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