इस धरती पर कई ऐसी जगहें हैं, जो आज के इंसानों के लिए एक रहस्य बनी हुई हैं। उनके बारे में पता लगाने की तमाम कोशिशे हुईं, लेकिन वो ऐसे रहस्य हैं, जिन्हें सुलझाने की जितनी भी कोशिश की गई, वैज्ञानिक या पुरातत्व विभाग के लोग उतना ही उसमें उलझते चले गए। आज हम आपको ऐसे ही दुनिया के उन पांच रहस्यों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आज तक अनसुलझे ही हैं। इनमें से कुछ तो हजारों साल पुराने हैं।
दुनिया के वो पांच रहस्य, जो आज तक हैं अनसुलझे, वैज्ञानिक भी हैं हैरान
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अजरक ओएसिस व्हील
ये रहस्यमय आकृतियां सीरिया से लेकर जॉर्डन और सऊदी अरब तक फैली हुई हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन आकृतियों को 8500 साल पहले बनाया गया होगा। हालांकि यह सिर्फ एक अनुमान है। इन्हें सबसे पहले साल 1927 में देखा गया था, जब ब्रिटेन के रॉयल एयरफोर्स का विमान इस इलाके से गुजर रहा था। अब इन बड़ी-बड़ी आकृतियों को क्यों बनाया गया था, यह अब तक एक रहस्य ही बना हुआ है।
'सी ऑफ गैलिली' के अंदर विशाल चट्टान
इजरायल के 'सी ऑफ गैलिली' के अंदर हजारों छोटे-छोटे पत्थरों से बनी एक विशाल आकृति है। चट्टाननुमा यह आकृति 32 फीट ऊंची और 230 फीट व्यास की है, जिसका वजन लगभग 60 हजार टन बताया जाता है। हैरानी की बात तो ये है कि इनका निर्माण प्राकृतिक रूप से नहीं हुआ था बल्कि इन्हें बनाया गया है। माना जाता है कि यह आकृति 4000 साल पुरानी हो सकती है, लेकिन यह सिद्ध करने के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं। पानी के अंदर इन आकृतियों को क्यों बनाया गया था, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
नैन मडोल
ऑस्ट्रेलिया के टेमवेन द्वीप के पास हजारों साल पुरानी एक खंडहर बस्ती है, जो चारों तरफ से पानी से घिरी हुई है। इस जगह को 'नैन मडोल' के नाम से जाना जाता है। यहां बड़े-बड़े पत्थरों को ऐसे सजाया गया है, जैसे यहां कोई रहता हो। इन पत्थरों को यहां कौन लाया और कितने साल से ये यहां पर हैं, कोई नहीं जानता। रहस्यमय होने की वजह कई लोग इस जगह को 'भगवान का बनाया हुआ शहर' भी कहते हैं।
गोसेक सर्किल
जर्मनी के एक छोटे से शहर गोसेक में यह अजीबोगरीब गोलाकार आकृति है। इसे सबसे पुराना ज्ञात सौर वेधशाला माना जाता है। यह आकृति करीब 250 फीट में फैली हुई है। इसे 'जर्मन स्टोनहेंज' के नाम से भी जाना जाता है। कार्बन डेटिंग से पता चला है कि इसे करीब 4900 साल पहले बनाया गया होगा, लेकिन इसे किसने बनाया था, यह अब तक एक रहस्य ही है। पिछले कई सालों से इसको लेकर शोध चल रहे हैं।