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कैसे इंसान के पेशाब से पिघल रहा ग्लेशियर? हर वर्ष हजारों टन बर्फ बन रहा पानी, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

Mon, 07 Sep 2026 01:58 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Mon, 07 Sep 2026 01:58 PM IST
सार

नेपाल और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन किया है, जो रीजनल एनवायर्नमेंटल चेंज जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अध्ययन के मुताबिक, माउंट एवरेस्ट पर इंसानों के पेशाब से ग्लेशियर पिघल रहा है। 

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Mount Everest Glacier Is Melting Faster Because Of Human Urine Study science news in hindi
कैसे इंसान के पेशाब से पिघल रहा ग्लेशियर? हर वर्ष हजारों टन बर्फ बन रहा पानी - फोटो : AI

विस्तार

नेपाल में अगस्त के महीने में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि लांगटांग–लिरुंग पर्वत पर ग्लेशियर के ढहने से यह भयानक प्राकृतिक आपदा आई है। अब बढ़ती गर्मी से पिघलते ग्लेशियर और इसके खतरों पर होने वाली बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है। अब इस बीच एक अध्ययन सामने आया है, जिसमें ग्लोबल वार्मिंग और दूसरी वजहों के साथ ही इंसान के पेशाब को भी किसी ग्लेशियर के पिघलने की बड़ी वजह माना गया है। अध्ययन में बताया गया है कि ऐसा माउंट एवरेस्ट पर हो रहा है। खासतौर पर एवरेस्ट पर लगने वाले कैंपों की इसमें बड़ी भूमिका है।

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नेपाल और अमेरिका के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन रीजनल एनवायर्नमेंटल चेंज जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन में खुलासा हुआ है कि हर वर्ष माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले पर्वतारोहियों के पेशाब से हर साल करीब 2500 टन बर्फ पिघल रहा है। एवरेस्ट बेस कैंप खुम्बु ग्लेशियर के ऊपर लगता है। जहां हर साल 1600 टेंट लगाए जाते हैं, जिनमें किचन, शॉवर, जनरेटर, वाई-फाई और दूसरी सुविधाएं होती हैं। इनसे निकलने वाली गर्मी से जमीन का तापमान बढ़ता है।
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गर्मी से पिघल रही है बर्फ

नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस बात पर ध्यान दिया कि जलवायु परिवर्तन और फॉसिल फ्यूल के इस्तेमाल के साथ इंसान का पेशाब ग्लेशियर को पिघला रहा है। ऊंचाई पर होने की वजह से पर्वतारोहियों को अधिक पानी पीने की जरूरत पड़ती है, जिससे उन्हें ज्यादा पेशाब आता है। वर्ष 2023 के मौसम में हर दिन 6,766 लीटर पेशाब यहां पर बहा। विशेषज्ञों के मुताबिक, पेशाब की गर्मी से ग्लेशियर पिघलता है।
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शोधकर्ताओं ने हैरान करने वाला खुलासा करते हुए कहा कि सिर्फ एक क्लाइंबिंग सीजन में ग्लेशियर की 154 टन बर्फ पिघल गई। हालांकि, यहां पर इंसान का पेशाब सबसे बड़ी वजह नहीं है, क्योंकि शरीर से 37 डिग्री सेल्सियस पर निकलने के बाद यह ठंडा हो जाता है। शोधकर्ताओं ने पता किया कि इस स्थिति में इससे कितनी बर्फ पिघल सकती है। उन्हें अध्ययन में पता चला कि उस गर्मी का बहुत कम भाग बर्फ तक पहुंचता है, क्योंकि अन्य गर्मी हवा या चट्टानों में चली जाती है।

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हिमालय पर बढ़ते तापमान को लेकर चेतावनी

वैज्ञानिकों ने चेतावनी देते हुए कहा कि हिमालय का तापमान अन्य इलाकों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2000 के बाद यहां बर्फ पिघलने की रफ्तार बीते तिमाही की तुलना में दोगुनी हो चुकी है। बेस कैंप की सतह का तापमान खुम्बु ग्लेशियर के दूसरे इलाकों की तुलना में और अधिक तेजी से बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह हर वर्ष 0.28 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह रफ्तार भविष्य में बड़ी मुश्किल पैदा कर सकती है। 

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